डॉ. गीता
_प्रेम पत्रों के संकलन प्रकाशित होना कोई नई बात नहीं है। लगता है शायद हिंदी में भी ऐसा हो चुका है ।अभी कुछ दिन पहले एक संपादक ने फोन पर कहा कि वे मेरा कोई प्रेम पत्र संकलन में छापना चाहते है।_
मैंने जवाब दिया कि मेरे लिखे हुए प्रेम पत्र हिंदी फिल्मी गाने के अनुसार : 'लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में हज़ारों रंग के नज़ारे बन गए.... कभी जुगनू बन गए ... कभी फूल बन गए.....' अब जुगनू और फूल कहां मिलेंगे?
संपादक ने सुझाया की काल्पनिक प्रेम पत्र भी लिखा जा सकता है।
मैंने अपने सर मानवश्री से संपर्क किया. उन्होंने जो लिखा उसका अपने अनुरूप पुनर्लेखन करना था मुझे. मग़र समयाभाव के कारण उसे वैसे ही यूज़ क़र ली.नीचे काल्पनिक प्रेम पत्र है :
समझ में नहीं आ रहा मैं तुम्हें कैसे संबोधित करूं? ऐसा नहीं है कि मैं पहली बार किसी को प्रेम पत्र लिख रहा हूं।
कहना तो नहीं चाहिए लेकिन छिपाना भी ठीक नहीं है कि मैंने इससे पहले कई लड़कियों को जो अब लड़कियां नहीं रहीं, प्रेम पत्र लिख चुका हूं।
तुम यह पूछ सकती हो कि मैंने उनको प्रेम पत्र क्या उस समय लिखे थे जब वे लड़कियां थीं या उस समय लिखे थे जब वे लड़कियां नहीं रहीं थीं। तो मैं साफ-साफ बताता हूं कि जब वे लड़कियां थी तब काफी अनाड़ी थीं और उस समय उनसे प्रेम करने का कोई मतलब नहीं था।
वैसे भी उनसे मिलना जुलना काफी मुश्किल था । उनके गुंडे भाई और खूंखार माता पिता सपने में आकर डराया करते थे। इसलिए उनको प्रेम पत्र लिखकर फाड़ देता था । कभी-कभी फटे हुए प्रेम पत्रों के टुकड़े उड़ते हुए प्रेमिकाओं के आंगन तक पहुंच जाते थे और प्रेमिका उनको उपेक्षा से पढ़ लिया करती थी।
अब तुम यह पूछ सकती हो कि मैं कबूतर का सहारा क्यों नहीं लेता था, तो मैं बताना चाहता हूं कि उस जमाने में कबूतर का शिकार बहुत प्रचलित था। मुझे डर था कि मेरा संदेश वाहक कबूतर मार दिया जाएगा।
मैं नहीं चाहता था कि मेरे प्रेम के लिए मेरे अलावा और कोई किसी तरह की कुर्बानी दे। तुम यह भी कह सकती हो कि मैंने बादलों का सहारा क्यों नहीं लिया? मेघ दूत बन जाते हैं। उसकी वजह यह है कि वह अकाल का ज़माना था।
बारिश बहुत कम होती थी। मेघ बहुत कम आते थे और मेघ दूत बनने से तो बिल्कुल ही इंकार कर देते थे।
दो – चार प्रेम पत्र जो किसी तरह प्रेमिकाओं तक पहुंच गए थे उन्हें आज प्रेमिकाओं के लड़के और लड़कियां पढ़कर माताजी के प्रेम का मज़ाक़ उड़ाते हैं। कहते हैं, अरे मॉम तुम गर्मियों की दोपहर में नंगे पांव छत पर बस अपने ‘लवर’ को सिर्फ देखने जाती थीं। इट इज वेरी स्ट्रेंज।
भूतपूर्व प्रेमिकाओं के बच्चे मुझे बुज़दिल क़रार देते हैं। पतिदेव कहते हैं, मैंने तुम्हें एक गुंडे से बचाया है यह बात तुमने कभी नहीं मानी, आज मान लो।
प्रेम पत्र की भूमिका थोड़ी लंबी हो गई है और तुम जानती हो कि फेसबुक के ज़माने में दस लाइनों से अधिक यदि किसी को पढ़ना पड़ जाता है तो वह बेहोश हो जाता है और मैं यह भी नहीं चाहता कि मेरे प्रेम पत्र से किसी के होश हवास गुम हो जाएं।
पुराने जमाने में एक प्रेमिका को प्रेम पत्र में मैंने एक शेर लिखकर भेज दिया था शेर था :
दिल को तुम्हारी याद से बेगाना कर दिया,
तुमसे भी दिल फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के।
प्रेमिका को उर्दू कम आती थी। पूरे शेर में सिर्फ एक शब्द उसकी समझ में आया था जो था, फ़रेब। और उसने यह समझा लिया था कि मैं फ़रेबी हूं। उसके बाद वही हुआ था जो फ़रेबी के साथ होता है।
मतलब उसकी जल्दी ही शादी हो गई थी। उसकी शादी में मैं मेहमान था लेकिन मैंने वहां कोई गाना नहीं गाया था। वैसे मैं गा सकता था, ‘चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों…..: पर सच्चाई यह थी कि हम दोस्त ही कहां बन पाए थे जो अजनबी बन जाते।
कभी-कभी क्या आमतौर से प्रेम बड़े महंगे पड़ जाते हैं इसलिए प्रेम करने से पहले बहुत सोचना पड़ता है और प्रेम पत्र लिखने से पहले तो उससे भी पहले सोचना पड़ता है।
आप देखिए एक छोटी सी बात बताऊं मैं पांच साल एक विदेश में पढ़ा चुका हूँ और प्रेम का सही अर्थ मैंने उस देश में रहकर ही समझा था। उस देश का नाम हंगरी है। उस देश के अपने अलग कानून है। देश, प्रेमियों को बहुत सम्मान देता है। अपने देश वाली बात नहीं है जहां प्रेमियों की कोई इज्जत ही नहीं है।
उदाहरण यह है कि एक हंगेरियन छात्र के पिताजी पड़ोस की एक विधवा औरत से प्रेम करने लगे। छात्र और उसकी माता जी को जब पता चला तो उन्होंने इस खबर को बहुत सहज ढंग से लिया।
लेकिन कुछ समय बाद जब यह पता चला की पिताजी की प्रेमिका ने गर्भ धारण कर लिया है और वह बच्चा पैदा करना चाहती है तब छात्र और उसकी माताजी काफी गुस्से में आ गए क्योंकि देश के कानून के हिसाब से पिताजी को न केवल गर्भवती महिला का पूरा खर्चा उठाना पड़ेगा बल्कि बच्चे की पैदाइश उसकी परवरिश उसकी शिक्षा सबका भार पिताजी पर पड़ेगा।
देखिए कितनी सच्ची बात है कि उर्दू के महान कवि मीर तक़ी ‘मीर’ ने इश्क को एक भारी पत्थर माना है। एक बड़ी अच्छी कहावत है के प्रेम अंधा होता है लेकिन पड़ोसियों के आंखें होती हैं।
इसीलिए प्रेम करने वाला जितना प्रेमिका को देखता है उससे ज्यादा पड़ोसियों पर निगाह रखता है। मैं भी यह कर चुका हूं ।अच्छा यह था कि पड़ोस में कोई लड़की नहीं थी नहीं तो यह माना जा सकता था कि मैं उस पर नज़र रख रहा हूं । बहर हाल जो भी है सब तुम्हारे सामने है। प्रेम पत्र लिखने वाली बात तो फिर रह गई।
उर्दू शायरी में मरीज़- ए – इश्क की काफी चर्चा मिलती है। मेरे एक पुराने मित्र जावेद कमाल कहा करते थे, बल्कि 7- 8 घंटे का लेक्चर इस बात पर दिया करते थे कि इश्क़ एक बीमारी है।
वे कहते थे इस बीमारी का उल्लेख प्राचीन यूनानी किताबों में भी मिलता है और अरबी संस्कृति में भी यह माना जाता है कि प्रेम एक बीमारी है और इस बीमारी के दौरान प्रेमिका जो पत्र लिखे जाते हैं वे उस बीमारी के लक्षण बताते हैं।
वे यह भी कहते थे कि इस बीमारी का इलाज भी है लेकिन वह ऐसा इलाज है कि अगर किसी को बता दिया जाए तो वह जीवन भर कम से कम प्रेम नहीं करेगा और इस कारण प्रेम पत्र लिखने से बच जाएगा।
लेकिन मैं न तो प्रेम से बच पाया और न प्रेम पत्र लिख पाने से बच पाया। यह बात दूसरी है कि आजकल s.m.s. देकर व्हाट्सएप पर प्रेम पत्र लिखता हूं। जिसको बताना चाहता हूं उसे समझ में आ जाता है और जिस को नहीं बताना चाहता हूं उसकी समझ में नहीं आता।
“मेरा प्रेम पत्र पढ़कर तुम नाराज़….”
प्रेम पत्र पर लिखा यह गाना याद आया तो एक और बहुत रोचक घटना याद आ गयी। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुमताज होस्टल के एक कमरे में हम चार लोग रहा करते थे। तीन तो पुराने दोस्त थे लेकिन चौथे सज्जन मोहम्मद ताहिर नए थे।
वे उम्र दराज भी थे। किसी जिले में बीडीओ के पद पर काम कर चुके थे और एम. ए. करने के लिए यूनिवर्सिटी आए थे। उनके पीठ पीछे उन्हें लोग डैडी कहा करते थे। डैडी सीधे-साधे सरल सज्जन व्यक्ति थे।
उन दिनों उर्दू डिपार्टमेंट में एक बहुत सुशील और सुंदर लड़की पीएचडी कर रही थी। इस सुशील और सुंदर लड़की हिना को लगभग सभी लोग पसंद करते थे।
एक दिन हम लोगों ने मोहम्मद ताहिर से कहा कि खबर यह मिली है कि हिना ने अपनी एक दोस्त से आपके बारे में पूछा है कि आप कौन हैं।
डैडी ने कहा कि आप लोग मजाक कर रहे हैं।
मैंने कहा- हमें आपसे मजाक करने की क्या जरूरत है। ख़ैर चलिए छोड़िए… भूल जाइए इस बात को। वैसे यह बात मुझे अकरम ने बताई है जिसकी भाभी भी उर्दू में रिसर्च कर रही है।
तीर अपने निशाने पर लग चुका था। रोज रात को कमरे में हिना की बातें हुआ करती थी। एक आध बार डैडी को बताया गया कि हिना उसी वक्त लाइब्रेरी जाती है जब वे जाते हैं। इस बात को डैडी ने भी नोट किया।
अब क्या था हम लोगों के डैडी के दिल में हिना के लिए प्रेम का ऐसा बीज डाला जो बहुत जल्दी एक तनावर दरख़्त बन गया।
_धीरे धीरे बात यहां तक पहुंचेगी कि हम सब कहने लगे हैं कि हिना से अगर उनकी शादी हो जाए तो बहुत अच्छा हो। बड़ा आइडियल कपल होगा। डैडी ने कहा वह मुझसे शादी क्यों करेगी? हमने कहा देखिए शादी तो उसे कहीं न कहीं करनी ही होगी और अब यह बताइए कि आप में क्या कमी है जो आप उसके शौहर नहीं हो सकते ? आप पढ़े लिखे हैं। गजेटेड ऑफिसर रह चुके हैं। अच्छे खानदान के हैं। ठीक-ठाक शक्ल सूरत है। स्मार्ट हैं। और उसे क्या चाहिए।
ऐसे ऐसे तर्क दिए गए कि डैडी बिल्कुल पस्त पड़ गए और उन्होंने यह मान लिया कि ऐसा हो सकता है।
अब सवाल यह था कि बात को आगे कैसे बढ़ाया जाए।
सबकी राय यह बनी कि डैडी हिना को एक लेटर लिखें।।इस बात पर पहले तो डैडी बिल्कुल ही तैयार नहीं हुए लेकिन उन्हें समझाया गया कि देखिए बहुत क़ायदे से, बहुत तहज़ीब और तमीज़ के साथ, बहुत शालीन और बहुत सुलझा हुआ एक छोटा सा खत होना चाहिए जिसमें कोई ग़लत बात न हो।
प्यार मोहब्बत की तो कोई झलक भी नहीं होनी चाहिए। बहुत सादा, बहुत प्रोफेशनल और बहुत साहित्यिक लेटर होना चाहिए। सिर्फ यह लिखा हो कि मेरी बहन उर्दू में एम. ए. करना चाहती है। वह अलीगढ़ आ रही है। क्या आप थोड़ा वक्त निकाल कर उससे कुछ ‘गाइड’ कर सकती हैं।
डैडी को यह आईडिया बहुत पसंद आया और हम सब बैठकर ख़त ड्राफ्ट करने लगे।
एक – एक लफ्ज़ पर बहुत संजीदगी से बहस होने लगी। यह तय पाया कि डैडी हिना को मोहतरमा हिना साहिबा लिखेंगे। हिना खुद ही ‘बिटवीन द लाइंस’ पढ़ सकेगी तो बात उसकी समझ में आएगी।
ड्राफ्ट पूरा हो जाने के बाद डैडी शमशाद मार्केट चले गए और एक बहुत खूबसूरत लेटर पैड और लिफाफे खरीद कर लाए। लेटर पैड हल्के नीले रंग का था जिसके ऊपर एक कोने में कुछ गहरे नीले रंग से एक चिड़िया बनी हुई थी जिसकी चोंच में एक लिफाफा दबा हुआ था।
लेटर हेड सब को बहुत पसंद आया और काफी बहस करने के बाद यह तय हुआ कि लिखने के लए काली इंक होना चाहिए ।
डैडी अपनी मेज पर बैठकर खत लिखने लगे। हम लोग धीरे-धीरे सो गए। सुबह कोई छः बजे मेरी आंख खुली है तो मैंने देखा कि डैडी मेज़ कर बैठे खत लिख रहे हैं और पूरे कमरे में चारों तरफ लिखे हुए ख़त फैले पड़े हैं।
मैंने उनसे पूछा आपने इतने बार ख़त क्यों लिखा।
वे बोले किसी में एक लाइन तिरछी हो गई है। किसी में कोई लफ्ज़ टेड़ा लिख गया है। किसी में नुक़्ता बड़ा लग गया है। किसी में छोटी ‘हे’ कुछ नीचे लिख गई है…. मैं चाहता था कि ख़त ऐसा हो जो बिल्कुल ‘परफेक्ट’ हो।
ख़त का परफेक्ट ड्राफ्ट बनाने के बाद वे बाथरूम जाने के लिए कमरे से निकले लेकिन जल्दी ही लौट कर आ गए। कुछ घबराए हुए से थे।
कहने लगे पार्टनर मैं तेरह नंबर कमरे के आगे से निकल रहा था तो अंदर से आवाज आई, मेरा प्रेम पत्र पढ़कर तुम नाराज़ न होना ……..पार्टनर ये उन लोगों को कैसे पता लग गया कि मैं लेटर लिख रहा हूं ?
मैंने कहा आपको गलतफहमी हुई है। यह पॉपुलर गाना है। कोई गा रहा है तो आपका उससे क्या ताल्लुक ।उनको यह पता नहीं था कि पूरे हॉस्टल में यह बात सब को मालूम है कि वे हिना को प्रेम पत्र लिख रहे थे।
[चेतना विकास मिशन]






