
-निर्मल कुमार शर्मा
दुनिया का कथित शिक्षक अपने बच्चों तक को शिक्षित नहीं कर पा रहा है ! अभी पिछले दिनों एक 18 साल के अमेरिकी किशोर ने बंदूक से पहले अपनी दादी को गोली मारकर हत्या कर दिया उसके बाद उसने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकरपास के एक स्कूल में घुसकर धड़ाधड़ 18 छात्रों और 3 स्कूल के शिक्षकों के ऊपर ताबड़तोड़ गोली चलाकर उन्हें मौत के घाट उतार डाला ! हालांकि पुलिस की जवाबी कार्रवाई के दौरान वह सिरफिरा किशोर मारा जा चुका है ! लेकिन 22 निरपराध बच्चों और बड़ों की जघन्यतम् हत्या करने के बाद ! यह दु :खद घटना अमेरिका के टेक्सास राज्य के उवाल्डे नामक शहर में रॉब एलिमेंटरी स्कूल की है !
लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका में यह दु :खद घटना सिरफिरे किशोरों द्वारा यह स्कूलों में गोलीबारी करके निरपराध बच्चों और शिक्षकों को मौत के घाट उतारने की पिछले 5महीनों में यह 27वीं दुर्घटना है !आपको सुनकर यह कुछ अटपटा लगे लेकिन कटु सच्चाई यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा हिंसक राष्ट्रअमेरिका ही है ! यह देश हिंसा की नींव पर ही बसा है,जिसने ‘अपने ही देश के लाखों अमेरिकी मूल निवासी पूर्वजों,जिन्हें रेड इंडियन्स ’कह देते हैं,की लाशों पर ही अपना वजूद खड़ा किया है ! अमेरिका जैसे देश में ही यह संभव है कि वहां हर दिन गोली से 100 से अधिक लोग मारे जाएं ! अमेरिका जैसे देश में ही यह संभव है कि वहां प्रतिदिन 22 बच्चों को गोली मारकर उनमें से कम से कम 5बच्चों को मौत के मुंह में धकेल दिया जाता हो !और यह उसी देश में संभव है कि वहां प्रति वर्ष 1 से 17 वर्ष के लगभग 8,000 बच्चे गोलियों के शिकार हों,जिनमें 1800 से अधिक बच्चों की मौत हो जाए !
कितनी हतप्रभ करनेवाली बात है कि दुनिया का कथित सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका अपने ही देश के अमेरिकी बंदूक लाबी के आगे नतमस्तक और लाचार हो गया है ! इस अमेरिका में आज प्रति 100 लोगों पर 121बंदूकें हैं !अमेरिका के कई राष्ट्रपति समय-समय पर इसे नियंत्रित करने की मंशा जता चुके हैं लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो पाया है !
अमेरिका में अब तक बंदूक कितनों की हत्या हो चुकी है ?
अमेरिका में साल-दर-साल बंदूक से हिंसा के मामले बढ़े हैं ! इस देश में आबादी से भी ज्यादा बंदूकें होना वहां की स्थिति की गंभीरता को बताने के लिए काफी है ! गन लॉबी के आगे सरकार की बेबसी का आलम ये है कि वर्ष 2020 में बंदूक से 45,222 अमेरिकी लोगों की जान गई ! सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन यानी सीडीसी और प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार वर्ष 2020 में 43 फीसदी हत्या, 54 फीसदी आत्महत्या और तीन फीसदी अन्य तरह की मौतों का कारण बंदूक ही हैं ! इसी तरह अमेरिका में आत्महत्या के कुल 45,979 मामलों में से 53 प्रतीशत यानी 24,292 मामलों के लिए बंदूक जिम्मेदार है ! 1968 से 2017 के बीच बंदूक करीब 15 लाख लोगों की मौत का कारण बनीं हैं !
दुनिया भर के लोगों के लिए अमेरिका एक स्वप्न सरीखा देश है,लेकिन उस कथित स्वप्निल देश की यह वास्तविकता चतुराई से छिपा दी जाती है कि वह स्वप्निल देश अपराध, हत्या और गोलीबारी का भी केन्द्र है ! वहां बंदूक संस्कृति इस कदर हावी है,इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां हर साल करीब 55 लाख निजी हथियारों का उत्पादन होता है,जिनमें से 95 प्रतिशत तक हथियार अमेरिकी बाजार में ही खपत हो जाती है !
मिडिया रिपोर्ट के अनुसार लगभग दो-तिहाई अमेरिकी अपनी रक्षा के लिए बंदूक खरीदते हैं,यानी अमेरिका में बंदूक रखना उतना ही आसान है,जिस प्रकार भारत में लाठी-डंडा रखना होता है ! अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन का कहना था कि ‘अमेरिकी नागरिक के लिए खुद और देश की रक्षा के लिए बंदूक रखना जरूरी है ! ‘ लेकिन घरों में बंदूक रखने का शौक एक दिन अमेरिकी समाज के लिए इतना बड़ा खतरा बन जाएगा, यह किसी ने कभी नहीं सोचा था ! बंदूक संस्कृति को उसके पुराने इतिहास से जोड़कर देखा जा सकता है !
कितने अमेरिकियों को शस्त्र आबंटित !
कभी ब्रिटेन का उपनिवेश रहे इस देश में आजादी की लड़ाई के लिए लोगों ने बंदूकें उठाई थी। देश को आजाद कराने में बंदूक की इसी भूमिका ने बाद में वहां हथियार रखने को गौरव का विषय बना दिया गया ! एफबीआई की वेबसाइट से पता चलता है कि अमेरिका में पिछले 10 वर्षों में लगभग 10 करोड़ लोगों ने शस्त्र खरीदने के लिए आवेदन किया,जिनमें से केवल सात लाख फॉर्म ही अलग-अलग कारणों से निरस्त हुए !मतलब पिछले 10वर्षों में 9 करोड़ 93 लाख लोगों को उपहार के रूप में मौत परोसने वाले घातक हथियारों को आसानी से सौंप दिया गया !
अमेरिकी गन कंट्रोल ऐक्ट 1968 के अनुसार कानूनी तौर पर संघीय स्तर पर यहां रहनेवाले 18 साल से ऊपर के उम्र के सभी लोगों को शॉटगन,राइफल और गोला-बारूद रखने का संवैधानिक अधिकार है। अन्य बंदूकों यथा फायर आर्म्स मसलन हैंडगन आदि 21 वर्ष या इससे अधिक उम्र वालों को ही बेची जा सकती है ! राज्य या स्थानीय अधिकारी उच्च आयु प्रतिबंधों को तो लागू कर सकते हैं,पर संघीय कानूनों में शामिल न्यूनतम उम्र को कम करने की अनुमति उनको नहीं है ! जाहिर है अमेरिका बंदूक संस्कृति को जीने को बाध्य है।
कितनी हास्यास्पद बात है कि दुनिया भर में अमेरिकी राष्ट्रपतियों को दुनिया के सबसे ज्यादा ताकतवर इंसानों के रूप में माना जाता है,लेकिन वे अमेरिका की ताकतवर बंदूक लाबी,जो एक अपना संगठन बनाए हैं,जिसे नेशनल राइफल एसोसिएशन या एनआरए कहते हैं,वे अमेरिका के राजनेताओं से भी शक्तिशाली हैं ! एनआरए हर साल 25 करोड़ डॉलर खर्च करता है जो बंदूक पर रोक लगाने की मांग करने वाली सभी संस्थाओं द्वारा खर्च की जाने वाली रकम से भी अधिक है। बंदूक नीति को प्रभावी बनाए रखने के लिए एनआरए हर साल 30 लाख डॉलर खर्च करता है। वर्ष 2014 में अकेले 33 लाख डॉलर की रकम खर्च की थी !
कितने अमेरिकी राष्ट्रपतियों का प्रयास !
अमेरिकी राष्ट्रपतियों क्रमशः जॉर्ज डब्ल्यू बुश -कार्यकाल वर्ष 2001 से 2004 तक,बराक ओबामा -वर्ष 2009 से 2017 तक, डोनाल्ड ट्रंप – 2017 से 2021 तक ने अमेरिका में बंदूकों पर प्रतिबंध लगाने के लिए खूब जोर लगाते रहे और अब वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन भी पूरा जोर लगा रहे हैं, लेकिन अमेरिकी सशक्त और प्रभावशाली बंदूक लाबी के बंदूकों के उत्पादन और अमेरिकी बाजार में अनियंत्रित होकर उनके बिक्री को कंट्रोल करने में अभी तक सफल नहीं हो पाए ! यह आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की दुनिया के लिए और खुद अमेरिकी राष्ट्रराज्य और वहां के समाज के लिए कितनी चिंताजनक और दु :ख की बात है !
-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण तथा पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक, सामाजिक,आर्थिक,पर्यावरण तथा राजनैतिक विषयों पर सशक्त व निष्पृह लेखन ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद, उप्र





