अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

सुन ससुराल…!

Share

अमित वधवा
अच्छा लगता हैं तेरा साथ
अब तक जो किया सफर
थामकर तेरा हाथ
पहला पाँव जब धरा था
तेरे नाम से ही मन डरा था
बिन आवाज़ थालियों को उठाया था
साड़ी में एक एक कदम डगमगाया था
रस्मों रिवाजों को तहेदिल से निभाया था
खनकती चुड़ियों से कड़छी को चलाया था
डरते डरते पहली बार खाना बनाया था
बस ऐसे ही मैंने
सबको अपना बनाया था
सुन ससुराल——-
तुम साक्षी हो मेरे एक एक पल के
वो पिया मिलन
वो पहली बार जी मिचलाना
खट्टी चीज़ों पर मन ललचाना
वो पहली बार
अपने अंदर जीवन महसूस करना
कपड़े सुखाने आँगन में डोलना*
पापड़ का कच्चा कच्चा सा सेंकना
गोल रोटी के लिये जद्दोजहद करना
दाल का तड़का, दूध का उफनना
कटी हुई भिंडी को धोना
पहली बार हलवे का बनाना
पहली दिवाली पर दुल्हन सी सजना
तीज व करवा चौथ पर मनुहार करवाना
हाँ ससुराल
तुम्हीं ने दिये ये अनमोल पल
वधु बन आयी थी
तुम्हीं थे जिसने सर आँखों बैठाया
बड़े स्नेह से अपनापन जताया
यही आकर मैंने सब सीखा और जाना
कभी किसे मनाया तो कभी किसे सताया
एक ही समय में
मैंने कितने किरदारों को निभाया
खुद को खो खोकर मैंने खुद को पाया
सुन ससुराल———
मायके के आगे भले ही
हमेशा उपेक्षित रहे तुम
लेकिन
फिर भी मेरे अपने रहे तुम
मायके में भी मेरा सम्मान रहे तुम
मेरे बच्चों की गुंजे जहाँ किलकारियाँ
वो आँगन रहे तुम
मेरे हर सुख दुख के साक्षी रहे तुम
सुन ससुराल——–
पीहर की गलियाँ याद आती हैं
गीत बचपन के गुनगुनाती हैं
लेकिन
मायके में भी तेरी बात सुहाती हैं
तेरा तो ना कोई सानी हैं
तू ही तो मेरे उतार चढ़ाव की कहानी हैं
कितने सबक़ तुने सीखाये h
पाठशाला ये कितनी पुरानी हैं
सुन ससुराल——–
अब तू ससुराल नहीं मेरा घर हैं ।

  🌹सभी महीलाओ को सादर🌹

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें