अशोक मधुप
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद लगा था कि वहां लगाए भारत के विकास के पौधे सूख जाएंगे। कट्टरवाद उन्हें निगल लेगा।
पर ऐसा नहीं हुआ, वहां के तालिबानी आज भी भारत के प्रशंसक हैं। वह भारत द्वारा भेजी गई सहायता पर आभार जता चुके हैं।वह जंग के समय से ही कहते रहे हैं कि भारत उनके मुल्क में चल रहे अपने प्रोजेक्ट जारी रखे। पाकिस्तान जो जंग के समय तालिबान का सबसे बड़ा खैरख्वाह और सलाहकार था , आज तालिबानी नाराजगी का शिकार है।
हाल में भारत ने चिकित्सकीय सामग्री को अफगानिस्तान भेजा ।सहायता सामग्री के साथ भारत में फंसे करीब 90 अफगान नागरिकों को भी विमान के जरिए वापस भेजा गया। अफगान राजदूत फरीद ममुंदजे ने बताया कि भारत ने 1.6 मीट्रिक टन जीवनरक्षक दवाएं भेजी हैं। कहा गया, ”ये दवाइयां काबुल में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रतिनिधियों को सौंपी जाएंगी और काबुल स्थित इंदिरा गांधी बाल चिकित्सालय में दी जाएंगी।” ममुंदजे ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा −इसे देखकर भावुक महसूस कर रहा हूं। धन्यवाद भारत।”
तालिबान वायदा करता रहा है कि वह अपनी जमीन को आंतकवाद के लिए इस्तमाल नही होने देगा। भारत पहले से ही अफगानिस्तान में मानवीय सहायता मुहैया करने की वकालत करता रहा है।नई दिल्ली अफगानिस्तान के लिए पाकिस्तान के जरिए 50,000 टन गेहूं रहा है। अमेरिका भी कह चुका है कि अफगानिस्तान को मानवीय सहायता दी जाएगी। यह सहायता सीधे तालिबान को न देकर अंतरराष्ट्रीय मदद बांटने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों के जरिये दी जाएगी।
पाकिस्तान चाहता है कि दुनिया के सभी देश अफगानिस्तान की नई सरकार को मान्यता दें। पर अभी तक ऐसा नहीं हुआ। पाकिस्तान ने युद्ध में तालिबान की खुली मदद की। वह अफगानिस्तान की नई सरकार का सबसे बड़ा खैरख्वाह बनने में लगा था, हुआ उल्टा।
अपने देश में पाकिस्तानी दख्लअंदाजी से तालिबान पहले ही नाराज था। हाल में तालिबान ने नांगरहार प्रांत में सीमा पर कांटेदार तार से फेंसिंग कर रहे पाकिस्तानी सैनिकों को रोक दिया। इसके बाद तार और बाकी सामान जब्त कर लिया। पाकिस्तानी सैनिक वहां से भाग खड़े हुए। तालिबान ने इस इलाके में हेलिकॉप्टर से निगरानी शुरू कर दी है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कुल 2600 किलोमीटर लंबी सीमा है। अफगानिस्तान कई दशकों से दावा करता आया है कि पाकिस्तान ने उसके कई इलाकों पर कब्जा कर रखा है। पाकिस्तान इस सीमा पर कंटीले तार लगाकर अफगान लोगों की आवाजाही बंद करना चाहता है।अफगानिस्तान की डिफेंस मिनिस्ट्री के प्रवक्ता इनायतउल्लाह खावर आजमी ने इस घटना की पुष्टि की है। आजमी ने कहा- पाकिस्तान नांगरहार इलाके में गैरकानूनी फेंसिंग लगाना चाहता है, हमने उसे रोक दिया है। हम हालात पर नजर रख रहे हैं।
एक और ये हालात है, उधर पाकिस्तान के विपक्षी सांसदों ने इमरान खान सरकार से अफगानिस्तान की तालिबान हुकूमत का समर्थन बंद करने की मांग की है। सांसदों का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान हुकूमत बॉर्डर पर फैंसिंग नहीं होने दे रही, वो दोनों देशों के बीच की सीमा रेखा को मानने भी तैयार नहीं है। इन सांसदों ने कहा- जब तालिबान हुकूमत पाकिस्तान की फौज को ही आंखें दिखा रही है तो इमरान खान सरकार उसका समर्थन क्यों कर रही है।
अफगानिस्तान के हालात से स्पष्ट होता जा रहा है कि भारत सरकार की अफगानिस्तान पर नीति कामयाब रही है और पाकिस्तान इतना सब कुछ करने के बाद अफगानिस्तान पर वहां काबिज तालिबान का बड़ा विरोध झेल रहा है। सीमापर तार−बाड़ लगा रही उसकी सेना को भागकर जान बचानी पड़ी है।
अशोक मधुप
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)





