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बेहोश होने से पहले नंगे बदन लगाई जाने वाली हर बेंत पर इंकलाबी उद्घोष करते रहे किशोर क्रांतिकारी ओंकार नाथ

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 आजादी आंदोलन के अमर योद्‍धा ओंकार नाथ खरे की याद में संगोष्ठी संपन्न

रीवा । स्वतंत्रता संग्राम के अमर योद्धा , विंध्य क्षेत्र के समाजवादी आंदोलन के आधार स्तंभ , सन 1947 में दरबार कॉलेज रीवा छात्रसंघ के अध्यक्ष , ताम्रपत्रधारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओंकार नाथ खरे की 31 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर समाजवादी जन परिषद , नारी चेतना मंच एवं विंध्यांचल जन आंदोलन के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय स्वयंवर बारातघर नरेंद्रनगर रीवा मध्यप्रदेश में दोपहर 12 :00 बजे से एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें स्वर्गीय श्री खरे के व्यक्तित्व कृतित्व पर चर्चा के साथ देश की वर्तमान दशा और दिशा पर विचार रखे गए । 
कार्यक्रम की अध्यक्षता नारी चेतना मंच की अध्यक्ष सुशीला मिश्रा एवं संचालन श्वेता पांडे ने किया ।                 
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विंध्य क्षेत्र क्रांतिकारियों की भूमि है, जिसमें अनेक वीर सपूतों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की परवाह न करते हुए त्याग बलिदान की महान परंपरा को कायम रखा । इन बहादुर सपूतों में एक क्रांतिकारी व्यक्तित्व ओंकारनाथ खरे का हैं, जिन्होंने किशोरावस्था में ही देश की आजादी के लिए ब्रिटिश हुकूमत के अन्यायी हस्तक्षेप के विरुद्ध चल रहे आंदोलन में युवा वर्ग का नेतृत्व करते हुए कठोर से कठोर सजा को वरण करके देश की आजादी के आंदोलन को गतिशील बनाने में ऐतिहासिक योगदान दिया। 
वक्ताओं ने कहा कि सन 1942 में महात्मा गांधी एवं सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजों के अत्याचारी हुकूमत के खिलाफ अपने अपने तरीके से देश की आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे। विंध्य क्षेत्र में तो 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों से लोहा लेने में ठाकुर रणमत सिंह, श्याम शाह एवं उनके साथियों की शहादत काफी महत्वपूर्ण रही है । रीवा एक रियासत थी, जिस पर निगरानी के लिए अंग्रेजों ने एक पोलिटिकल एजेंट की नियुक्ति कर रखी थी। सन 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के पहले अंग्रेजो के खिलाफ रीवा में विद्रोह का स्वर मुखर होने लगे थे। तत्कालीन महाराजा गुलाब सिंह का अंग्रेजों से टकराव चल रहा था। अंग्रेजों के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर जन आक्रोश भी बढ़ता जा रहा था । इस दौरान रीवा में अंग्रेजों की मनमानी के खिलाफ जन आंदोलन चल पड़ा जिसमें कांग्रेस के नेताओं कार्यकर्ताओं ने भी बढ़कर चढ़कर हिस्सा लिया । स्थानीय स्तर पर पंडित शंभूनाथ शुक्ला, कप्तान अवधेश प्रताप सिंह, लाल यादवेंद्र सिंह आदि कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे थे । 
वक्ताओं ने बताया कि करीब 17 वर्ष के ओंकार नाथ खरे अपने जोशीले व्यक्तित्व के चलते युवा वर्ग में अलग पहचान रखते थे। एक सत्याग्रही के रूप में ओंकारनाथ खरे ने अंग्रेजो के खिलाफ चल रहे आजादी के आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई , उन्हें 38 डी.आई.आर के अंतर्गत नजरबंद बनाकर रीवा केंद्रीय कारागार में रखा गया। उन पर पांच माह मुकदमा चला । देश की आजादी के लिए ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह के आरोप में उन्हें छः माह का कठोर कारावास एवं ₹150 का अर्थदंड दिया गया। अर्थदंड अदा न करने पर उनकी कठोर सजा की अवधि को 2 माह और बढ़ा दिया गया। श्री खरे ने जेल यातनाओं से कभी हार नहीं मानी। इस दौरान उन्हें 31बेतों की बर्बर सजा भी सुनाई गई । 
नंगे बदन लगाई जाने वाली हर बेंत पर ओंकार नाथ खरे इंकलाब जिंदाबाद, भारत माता की जय और महात्मा गांधी जिंदाबाद का क्रांतिकारी उद्घोष करते थे। किशोरावस्था में 21 बेंत लगने पर भी ओंकार नाथ खरे के इंकलाबी नारों के जोश में कमी नहीं थी लेकिन लहूलुहान शरीर ने साथ नहीं दिया और वह बेहोश हो गए। शेष दस बेंतों की सजा स्वास्थ्य कारणों के चलते रोक दी गई ।
आजादी के आंदोलन के दौरान रीवा जेल में क्रांतिकारी जीवन व्यतीत कर ओंकार नाथ खरे जब बाहर आए तो उन्होंने अपनी अवरुद्‍ध पढ़ाई को फिर से शुरू किया। उनकी हिंदी संस्कृत, उर्दू और अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ थी । छात्रों युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता अद्भुत थी। उनकी एक आवाज पर विंध्य क्षेत्र का नौजवान आंदोलित होता था। सन 1947 में वह सुखद पावन क्षण आया, जब 15 अगस्त को देश आजाद हुआ। 
ओंकार नाथ खरे विंध्य क्षेत्र के इकलौते महाविद्यालय दरबार कॉलेज के छात्र संघ के अध्यक्ष पद पर भारी बहुमत से विजयी हुए, उन्होंने प्रतिद्वंदी अर्जुन सिंह को शिकस्त दी थी । उनकी अध्यक्षता वाले छात्र संघ में श्रीनिवास तिवारी महासचिव चुने गए थे।
ओंकार नाथ खरे विंध्य क्षेत्र के समाजवादी आंदोलन के आधार स्तंभ थे। उनके प्रमुख साथियों में कृष्ण पाल सिंह, जगदीश जोशी, श्रीनिवास तिवारी, राम किशोर शुक्ला, श्रवण कुमार भट्ट, सिद्धिविनायक द्विवेदी, राणा शमशेर सिंह, यमुना प्रसाद शास्त्री, जगदंबा प्रसाद निगम, श्याम कार्तिक आदि अनेक महत्वपूर्ण लोग थे ।
सन 1953 में वे विंध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा के लिए चुने गए। सेवा काल के दौरान अपनी स्वतंत्र निर्भीक न्यायप्रिय कार्यशैली के चलते वे बड़े नौकरशाहों के प्रकोप का शिकार बने। करीब 30 वर्ष के शासकीय सेवा काल में उन्हें एक भी पदोन्नति नहीं मिली । उनकी दक्षता के विपरीत उनके आगे बढ़ने के अवसरों का जिस तरह हनन हुआ उससे वह काफी आक्रोशित थे । देश के आजादी के आंदोलन के इस महान योद्धा के साथ मरणोपरांत न्याय भी नहीं हो सका।
वक्ताओं ने कहा कि देश में स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है लेकिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं उनके परिवारों के साथ पूरी उपेक्षा का माहौल है। उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि पर शासन प्रशासन में बैठे लोगों के द्वारा कभी दो फूल भी अर्पित नहीं किए गए। ताम्रपत्रधारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय ओंकार नाथ खरे का नाम रीवा जिला कार्यालय की सूची क्रमांक 7 पर दर्ज है । 
उनके जीवन काल का अंतिम समय नरेंद्रनगर रीवा स्थित 2 एच 3 शासकीय आवास में व्यतीत हुआ । उनका स्वर्गवास 20 अक्टूबर 1990 को हुआ। गत वर्ष 2 अक्टूबर 2020 को उनकी धर्मपत्नी श्रीमती उमा खरे  का नेहरू नगर रीवा में 87 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हुआ। 
वर्तमान में उनकी ज्येष्ठ पुत्री ऊषा सक्सेना, ज्येष्ठ पुत्र अजय खरे (मीसाबंदी), पुत्रवधू डॉ गायत्री खरे, पुत्री माधुरी लाल, आभा श्रीवास्तव, शोभा सक्सेना, कनिष्ठ पुत्र अभय खरे, पौत्र अभिषेक खरे, अभिजीत खरे आदि उनकी पावन स्मृति के प्रतीक के रूप में मौजूद हैं । 
संपन्न संगोष्ठी में आजादी के आंदोलन के अमर योद्‍धा ओंकार नाथ खरे के ज्येष्ठ पुत्र मीसाबंदी अजय खरे ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आजादी के आंदोलन के मूल्यों के बिना देश को सही तरीके से नहीं चलाया जा सकता है । उन्होंने कहा कि आज जीवन मूल्यों का संकट बढ़ता जा रहा है जिसके चलते हैं चौतरफा खतरा है । मुकाबला करने के लिए जन जागरण बेहद जरूरी है ।
कार्यक्रम में नारी चेतना मंच की वरिष्ठ नेत्री नजमुननिशा , उषा सोनी , शांति सिंह , शारदा श्रीवास्तव , फूलमनी केवट , मेहरून्निसा , हसीना बेगम , खुशी मिश्रा की सक्रिय भागीदारी रही । इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी श्रवण प्रसाद नामदेव , विनोद सिंह , सुरेश उरमलिया , नत्थूलाल सेन , शेषमणि शुक्ला , लालमणि त्रिपाठी, दीपक सिंह , सुभाष शर्मा , पप्पू कनौजिया , शिक्षक देवराज चतुर्वेदी वरिष्ठ अधिवक्ता बालकृष्ण तिवारी , विजय मिश्रा , मानवेंद्र द्विवेदी , दीपक गुप्ता , दीपक तिवारी , समाजवादी जन परिषद के रामाधार पटेल , गफूर खान , मनसंतोष क्रांतिवेश , अंकुर विश्वकर्मा , दिनेश जायसवाल , दिनेश पटेल , पत्रकार नरेंद्र तिवारी , प्रमोद मिश्रा , युवा नेता परिवर्तन पटेल , कपिल शर्मा , इरशाद हुसैन , विवेक पटेल आदि ने कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई .

Ramswaroop Mantri

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