पहले तेज प्रताप और अब रोहिणी आचार्य की बगावत
महागठबंधन के स्वयंभू सीएम फेस बने तेजस्वी यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं. स्वयंभू कहने की मजबूरी यही है कि महागठबंधन की प्रमुख साझीदार कांग्रेस इसके लिए राजी नहीं हो रही है. भाई के बाद अब बहन के तेवर भी बदलने लगे हैं. आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप पहले ही बागी हो चुके हैं. अब बहन रोहिणी आचार्य ने भी परिवार से ‘नाता तोड़ लिया’ है. यह भी रोचक है कि पिता लालू प्रसाद यादव को अपनी किडनी डोनेट कर चर्चा में आईं रोहिणी आचार्य और पिता द्वारा बहिष्कृत बेटे तेज प्रताप के परिवार से ‘जुदाई’ का कारण जो रहा हो, पर सार्वजनिक तौर पर यह खबर प्रचारित होने का मंच सोशल मीडिया प्लेटफार्म ही रहा है. दोनों ने परिवार से अपनी नाराजगी के इजहार के लिए अपने-अपने X हैंडल को चुना. अलबत्ता दोनों का अंदाज अलहदा रहा. एक ने पोस्ट डाल कर मिटाया, पर दूसरे ने पोस्ट के बाद नरमी तो बरती, पर डिलीट नहीं किया. अब तो रोहिणी ने एक और धमाका कर दिया है. अपने सोशल मीडिया अकाइंट X को उन्होंने प्राइवेट तो किया ही, ‘फैमिली फ्रेंड’ को अनफालो कर दिया है. तेजस्वी यादव के लिए इसे अच्छी स्थिति कोई भी समझदार नहीं मानेगा. महागठबंधन में कांग्रेस और दूसरे सहयोगी दलों की सीटों के लिए खड़े हो रहे बखेड़े अलग मुसीबत हैं. तनातनी तो ऐसी दिख रही है कि महागठबंधन के अक्षुण्ण रहने पर भी संदेह होने लगा है.

आरजेडी के सीएम फेस तेजस्वी यादव की राजनीतिक चुनौतियां कम होने के बजाय बजाय बढ़ती जा रही हैं. बड़े भाई तेज प्रताप के ‘रिलेशनशिप’ को लेकर जब आरजेडी की किरकिरी होने लगी तो पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने उन्हें पार्टी और पद से बाहर कर लीपापोती की कोशिश की. तब लगा कि अब तेजस्वी की राह में कोई बाधा नहीं बचेगी. पर, कांग्रेस के नखरों ने उनकी मुसीबत बढ़ा दी है. पारिवारिक कलह की गूंज भी सुनाई देने लगी है. इधर एनडीए के सर्वमान्य नेता और बिहार के सीएम नीतीश कुमार अलग चुनौती बने हुए हैं. तेजस्वी ने आनन-फानन में जनहित की जितनी घोषणाएं कीं, उन पर नीतीश कुमार ने अपने अंदाज में अमल कर उनका सारा खेल बिगाड़ दिया है.
लालू फैमिली का कलह सतह पर आया
बिहार की राजनीति में लालू यादव के परिवार का वर्चस्व लंबे समय से कायम रहा है. पर, 2025 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह पारिवारिक गढ़ दरकने की कगार पर खड़ा दिख रहा है, तेजस्वी यादव अपनी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के घोषित और महागठबंधन के संभावित मुख्यमंत्री चेहरा हैं. उन्हें न केवल बाहरी मोर्चों पर जंग लड़नी पड़ रही है, बल्कि घर के अंदर भी आग सुलगने लगी है. तेज प्रताप यादव के पार्टी और परिवार से निष्कासन के बाद अब बहन रोहिणी आचार्य ने भी तेजस्वी के करीबी सांसद संजय यादव पर निशाना साधा है. हालांकि बाद में उन्होंने थोड़ी नरमी तो दिखाई, लेकिन पार्टी की एकता पर गहरा असर डालने वाले अपने सोशल मीडिया पोस्ट को हटाया नहीं. अब तो उन्होंने अपने X हैंडल को प्राइवेट भी कर दिया है और परिवार के लोगों को अनफॉलो कर दिया है. कांग्रेस के साथ सीएम पद और सीट बंटवारे पर खटपट बढ़ती ही जा रही है. पहले कांग्रेस 2020 के पैटर्न पर 70 सीटों की मांग कर रही थी. अब उसकी डिमांड इससे अधिक सीटों की होने लगी है. इतना ही नहीं, कांग्रेस अब अपने लिए डेप्युटी सीएम का पद भी मांग रही है. जहां तक पारिवारिक परेशानी का मामला है, लालू प्रसाद यादव के जीवित रहते पार्टी में उत्तराधिकार की जंग से आरजेडी के कमजोर पड़ने का खतरा बढ़ गया है. लालू को अपनी एक किडनी देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य के ताजा रुख से तेजस्वी की परेशानी निश्चित ही बढ़ेगी. उनके मुख्यमंत्री बनने के रास्ते में रोहिणी नया बाधा बन कर उभरी हैं.

पहले तेज प्रताप, अब रहिणी का मोर्चा
वैसे तो पहले से ही इस बात की चर्चा रही है कि लालू यादव के परिवार में विरासत की जंग छिड़ गई है. अब तो आंतरिक कलह चरम की ओर अग्रसर है. मई 2025 में लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार से निष्कासित कर दिया था. तेज प्रताप का फेसबुक पोस्ट, जिसमें उन्होंने अपनी शादी के पहले से ही अनुष्का नाम की लड़की से 12 साल पुराने रिलेशनशिप का भंडाभोड़ किया, उससे परिवार हिल गया था. लालू ने इसे ‘अनैतिक व्यवहार’ करार देते हुए 6 साल के लिए उनको आरजेडी से निष्कासन की घोषणा की. लालू के बेटे तेजस्वी और बेटी रोहिणी आचार्य ने पिता के फैसले का समर्थन किया था. पर, यह निष्कासन केवल पारिवारिक विवाद ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना गया. तेज प्रताप की अस्थिर छवि आरजेडी को नुकसान पहुंचा रही थी. उनके निष्कासन के बाद तेजस्वी की उत्तराधिकारी की दावेदारी और मजबूत हो गई. हालांकि जून 2025 में तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिख कर तेजस्वी के प्रति वफादारी जताई. वे अपने को ‘अर्जुन’ और तेजस्वी को ‘कृष्ण’ बताने लगे. उन्होंने कहा- ‘आप कृष्ण की सेना ले सकते हैं, लेकिन कृष्ण को नहीं.’ यह पोस्ट उनकी सतर्क चाल का संकेत था. पर, जल्द ही परिवारिक दरार फिर सतह पर आ गई. तेजस्वी के निर्वाचन क्षेत्र राघोपुर में बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा करते हुए तेज प्रताप ने तेजस्वी पर सीधा हमला बोला. उन्होंने स्थानीय लोगों से कहा, ‘आपका विधायक (तेजस्वी) डांस कर रहा है, मदद नहीं कर रहा.’ यह हमला पारिवारिक दुश्मनी को चुनावी मंच पर ले आया, क्योंकि राघोपुर लालू यादव के परिवार का गढ़ रहा है.
अब रोहिणी आचार्य के पोस्ट से तहलका
अब रोहिणी आचार्य ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है. तेजस्वी की ‘बिहार अधिकार यात्रा’ के दौरान एक वायरल फोटो में आरजेडी के टिकट पर राज्यसभा सदस्य बने संजय यादव को रथ के आगे की सीट पर बैठे देख रोहिणी ने ट्वीट किया, ‘आगे की सीट तो बड़े नेता की होती है.’ यह टिप्पणी पारिवारिक रिफ्ट को उजागर करती है, जहां रोहिणी अपने पिता लालू की राजनीतिक विरासत को संरक्षित रखना चाहती है. दूसरी ओर संजय यादव जैसे लोगों को तेजस्वी बढ़ावा दे रहे हैं. विश्लेषकों का मानना है कि रोहिणी का यह कदम तेज प्रताप के निष्कासन के बाद परिवार में असंतोष का ताजा उदाहरण है. पारिवारिक कलह न केवल आरजेडी की एकजुटता को कमजोर कर रहा है, बल्कि भाजपा-जेडीयू को हमलावर बनाने का मौका भी दे रह है.

उम्र में बड़े होने के बावजूद तेजप्रताप को राजद की कमान नहीं मिली.
सीट और CM पद पर कांग्रेस से खटपट
महागठबंधन में आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीएम पद और सीट बंटवारे पर दरार साफ दिख रही है. सितंबर 2025 में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के बाद कांग्रेस ने बिहार में कम से कम 76 सीटें और डेप्युटी सीएम पद की मांग कर दी है. आरजेडी खुद के लिए 2020 की तरह 144 सीटों पर अड़ा हुआ है. तेजस्वी ने तो यहां तक कह दिया है कि हम 243 सीटों पर लड़ेंगे. यह बात कांग्रेस को चुभ गई है. उसके बाद ही कांग्रेस ने पिछली बार की 70 सीटों की जगह अब 76 सीटों की मांग कर दी है. कांग्रेस का कहना है कि 243 सीटों पर लड़ने का बयान तेजस्वी का अपना स्टैंड है, लेकिन वास्तव में इससे गठबंधन की एकता पर सवाल उठाता है. खटपट की एक वजह यह भी है कि कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव क्षेत्र में सम्मेलन किया तो आरजेडी के साथ महागठबंधन के दूसरे दलों को भी शामिल होने का न्योता भेजा. आरजेडी ने सम्मेलन में शामिल होने की जहमत नहीं उठाई. उल्टे तेजस्वी यादव ने अकेले बिहार अधिकार यात्रा की शुरुआत कर दी. राजेश राम की पारंपरिक कुटुंबा सीट पर आरजेडी ने अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी भी शुरू कर दी है.
सीएम फेस पर विवाद भी गहराया
सीएम पद पर विवाद तो और गहरा है. रोहिणी आचार्य ने अगस्त 2025 में कहा था कि बिहार की जनता तेजस्वी को सीएम के रूप में देखना चाहती है. तेजस्वी खुद अपने को भावी सीएम के रूप में पेश करते रहे हैं. लेकिन कांग्रेस ने तेजस्वी को आधिकारिक चेहरा घोषित करने से मना कर दिया है. इस पर रोहिणी आचार्य ने कहा है, ‘शादी तय नहीं हुई, हनीमून की बात कौन करे?’ उनकी यह टिप्पणी गठबंधन की अनिश्चितता को दर्शाती है. कांग्रेस को डर है कि तेजस्वी का चेहरा घोषित करने से उसकी सीटें घटेंगी, जबकि आरजेडी तेजस्वी को ‘ओरिजिनल सीएम’ के रूप में पोजिशनिंग कर रही है. महागठबंधन की यह खटपट नीतीश कुमार को मजबूती प्रदान कर रही है. एनडीए विपक्ष की फूट का फायदा उठा रहा है.
तेजस्वी के सामने और भी कई मोर्चे खुले
तेजस्वी को केवल परिवार और कांग्रेस से ही नहीं, अन्य मोर्चों पर भी लड़ना पड़ रहा है. जेडीयू और भाजपा ने ‘जंगल राज’ का नैरेटिव चला रखा है, जबकि पप्पू यादव जैसे नेता आरजेडी पर शुरू से ही हमलावर रहे हैं. सितंबर 2025 में जेएमएम और आरएलजेएपी (पारस गुट) ने महागठबंधन ज्वाइन किया. इससे सीट बंटवारा जटिल हो गया है. पीएम मोदी ने पूर्णिया में आरजेडी-कांग्रेस पर घुसपैठिओं के संरक्षण का आरोप लगाया, जो बिहार की सीमावर्ती राजनीति को भुनाने का प्रयास है. आरजेडी की ‘बिहार अधिकार यात्रा’ तेजस्वी की अगुवाई में चल रही है, लेकिन यह सोलो कैंपेन महागठबंधन की एकता को चुनौती दे रहा है.
लालू के रहते घर में सुलगती आग
लालू प्रसाद यादव के जीवित रहते आरजेडी में उत्तराधिकार की जंग सुलग रही है. जनवरी 2025 में लालू ने तेजस्वी को पार्टी की कमान सौंपी, लेकिन परिवारिक कलह ने इसे कमजोर कर दिया है. तेज प्रताप का विद्रोह और रोहिणी की टिप्पणियां दर्शाती हैं कि लालू की छाया में भी गुटबाजी जारी है. पार्टी कार्यकर्ता तेजस्वी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं, खासकर संजय यादव जैसे ‘बाहरी’ को बढ़ावा देने पर. विश्लेषकों का कहना है कि लालू का स्वास्थ्य खराब होने से तेजस्वी को जल्दी फैसले लेने पड़ रहे हैं, लेकिन यह आंतरिक विद्रोह को जन्म दे रहा है. तेजस्वी को एक साथ परिवार से, सहयोगियों से और विपक्ष से लड़ना पड़ रहा है. लालू के ‘चमन’ में सुलगती आग अगर बेकाबू हुई, तो 2025 का चुनाव आरजेडी के लिए विनाशकारी साबित होगा. तेजस्वी की परिपक्वता ही उन्हें बचा सकती है. बिहार की जनता अब बदलाव चाहती है. तेजस्वी सीएम के रूप में लोगों की पसंद बने हुए हैं. पर, उनके सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा है.





