निर्मल कुमार शर्मा,
अभी पिछले दिनों कर्नाटक राज्य के धारवाड़ जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल मतलब एबीकेएम की बैठक हुई थी,इस बैठक के समापन के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठता के पदक्रम के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के बाद दूसरे सबसे ताकतवर पद माने जाने वाले सरकार्यवाह के पद पर पदासीन दत्तात्रेय होसबोले ने धर्मांतरण विरोधी कानून पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रूख पर सवाल का जबाब देते हुए कहा कि ‘धर्मांतरण को रोका जाना चाहिए और जिन लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है, उन्हें घोषणा करनी होगी कि उन्होंने धर्मांतरण किया है। अल्पसंख्यक इसका विरोध क्यों कर रहे हैं,यह एक रहस्य है। किसी भी तरीके से किसी धर्म के लोगों की संख्या बढ़ाना, धोखाधड़ी या ऐसे अन्य तरीकों को स्वीकार नहीं किया जा सकता,न केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,बल्कि महात्मा गांधी और अन्य ने भी इसका विरोध किया है,देश में 10 से भी अधिक राज्य ऐसे हैं,जिन्होंने धर्मांतरण विरोधी विधेयक पारित किया है ‘

अब यक्षप्रश्न यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किस हिंदू धर्म की बात करता है,उदाहरणार्थ उस हिन्दू धर्म की तो नहीं जिसमें इसी कथित हिंदूओं के देश के बिहार के वैशाली के एक गांव में कथित उच्च जाति के गुँडे अपने गाँव की ही एक गरीब मजदूर दलित की अपनी बहन सरीखी 20 वर्षीया लड़की को बंदूक की ताकत के बलपर अपने घर उठा ले जाते हैं,लड़की को छोड़ने के लिए उसके परिवार वालों के लाख घिघियाने और अनुरोध करने के बावजूद उनको अपने दरवाजे से यह कहकर दुत्कारते हुए भगा देते हैं कि ‘दो दिन बाद तुम्हारी लड़की तुम्हें वापस कर दी जाएगी ! ‘ 5 दिन बाद उस दलित की बेटी को घिनौने, पैशाचिक सामूहिक बलात्कार करके उसकी निर्ममतरीकों से हत्या कर उसके मृत शरीर को उसी गांव के एक तालाब में फेंक देते हैं,दूसरी घटना में हाथरस के एक गांव में अपने पशुओं के लिए चारा लेने गई एक दलित की बेटी के साथ उसी गांव के कुछ कथित उच्च जाति के ठाकुरों के तीन दंरिदे लड़के उसके साथ सामूहिक बलात्कार करते हैं,उसकी जीभ काटते हैं और उसकी गर्दन तोड़ देते हैं,उत्तर प्रदेश का कथित योगी मुख्यमंत्री और उसका प्रशासनिक अमला हफ्तों तक उस दलित ,गरीब, अभागी,अबला लड़की से बलात्कार होने की बात से ही सीधा मुकर जाता है,समुचित ईलाज के अभाव में वह लड़की लगभग 15 दिन बाद दिल्ली के एक अस्पताल में दम तोड़ देती है,उस लड़की से कथित हिन्दू धर्म के पैरोकार उच्च जातियों ने उससे हैवानियत उसके मरने के बाद भी करने से नहीं चूके ! हिन्दू धर्म में यह मानवीयता के नाते यह परम् और अभीष्ट कर्तव्य हैता है कि किसी के भी मृत शरीर को अंततः उसके अंतिम संस्कार के लिए उसके माँ -बाप और परिजनों को सौंप दिया जाता है,लेकिन इस मामले में उस मृत लड़की के माँ-बाफ और परिजनों के लाख अनुनय-विनय करने के बावजूद भी इस असभ्य,असामान्य तथा असामाजिक व्यक्ति जो उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना बैठा है उस अभागी दलित लड़की के शव से भी अपने नीच हरकत करने से बाज नहीं आया ! उसे रात के अंधेरे में परिजनों को न देकर अपनी पुलिस फोर्स के पशुवत बल पर उस लड़की के मृत शरीर को जलाकर नष्ट करने का जघन्यतम् अपराध कर दिया ! इसके अतिरिक्त इस देश में 85 प्रतिशत दलित जाति की लड़कियों, लड़कों ,वयस्कों और वृद्धों से कथित उच्च जातियों के गुँडे प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में बलात्कार, बदतमीजी,गाली-गलौज,अपमान और हत्या तक करते रहते हैं ! वास्तविकता यह है कि कथित हिन्दू धर्म अपनी साँस ही जातिवादी वैमनस्यता, छूआ-छूत और जातियों के अवरोही क्रम की अनिवार्यता कायम रखकर जिंदा है,ताकि कथित उच्च जाति के गुँडे अपनी जातीय श्रेष्ठता को जातिगत् आधार पर कायम रखकर कथित 85प्रतिशत शूद्र जातियों से अपनी हेकड़ी दिखाते रहें !
हिन्दू धर्म की जातिवादी मानसिकता का सबसे ज्वलंत व घिनौना रूप हरिद्वार, दिल्ली और विलासपुर में कथित धर्मसंसद में कुछ गुँडे भगवा वस्त्र पहनकर सरेआम मुसलमानों को कत्ल करने का फतवा जारी करते नजर आए,वे नरपशु इस देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तक को यहाँ न लिखनेवाली असभ्य व अमर्यादित गाली देने से नहीं चूके ! वे उस नरपिशाच और सबसे बड़े आतंकवादी बापू के हत्यारे नाथूराम गोडसे का महिमामंडन करने से भी नहीं चूके ! कुछ जातिवादी वैमस्यता को बढ़ाने वाले इन गुँडों द्वारा इस जघन्यतम् अपराध करने पर भी हिन्दू धर्म रक्षा के कथित पैरोकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मोहनभागवत व दत्तात्रेय होसबोले जैसों ने अपना मुँह खोलना तक उचित नहीं समझा ! भारत सरकार की ही एक संस्थान नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2019 की रिपोर्ट यह चीख-चीखकर बोल रही है कि इस कथित हिन्दू धर्म बहुल राष्ट्रराज्य भारत में केवल 1साल में 32033 दलित बच्चियों के साथ कथित उच्च जातियों के गुँडों ने बलात्कार किए मतलब प्रतिदिन 88 बलात्कार यानी हर 20 मिनट में इस देश के किसी भूभाग पर किसी गरीब,कमजोर,दलित की बेटी की अस्मत कथित उच्च जातियों के दरिंदे लूट रहे होते हैं और ज्यादेतर मामलों में सबूत मिटाने के लिए उनकी वैशाली और हाथरस जैसे उन बच्चियों की निर्मम हत्या कर देते हैं !
इसके अतिरिक्त कहीं अपनी शादी में घोड़ी पर बैठने,कहीं मेज पर खाना खा लेने,कहीं फसल न काटने,कहीं गाय की खाल को न उतारने,कहीं कथित उच्च जातियों के श्मशानघाट में दलित के शव को जलाने के अपराध में,कहीं मूँछ रख लेने मात्र के कथित अपराध में दलित नवयुवकों की जातिवादी गुँडें बुरी तरह सरेआम पिटाई करते नजर आ रहे हैं और उनकी निर्मम हत्या तक कर रहे हैं ! कथित हिंदू धर्म में दलित जातियों के साथ उक्तवर्णित इस तरह की अमानवीय व घिनौनी हरकत होने पर कौन दलित इस नारकीय हिंदू धर्म में रहना चाहेगा ! इस स्थिति में तो स्वाभाविक रूप से वह ऐसे धर्म में जाना चाहेगा,जहाँ उसकी,उसकी बीवी,बहन और बेटियों की इज्जत और मानमर्यादा हो ! क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मोहनभागवत व दत्तात्रेय होसबोले जैसों को यह मोटी सी बात समझ में नहीं आ रही है ? क्या उक्त दृष्टांतों की सूचना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सबसे बड़े सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले को नहीं मिलती होगी ! जरूर मिलती होगी,तो क्या इन अमानवीय अत्याचारों पर उन्हें अपने सद् विचार तो प्रकट करने नहीं चाहिए ? लेकिन कटुसच्चाई और वास्तविकता यह है कि मोहनभागवत या होसबोले जैसे जातिवादी कुप्रथा के रखवाले चाहते ही नहीं कि इस देश से जातिवादी वैमनस्यता समाप्त हो ! इन शैतानों की बहन-बेटियों और इनके साथ उक्तवर्णित अमानवीय, वीभत्स व्यवहार होने लगे तो कथित हिंदू धर्म को बचाने की इनकी हेकड़ी मिनटों में निकल जाय ! अब समय आ गया है कि 85 प्रतिशत बहुजन समाज भी संगठित और सशक्त होकर अपनी और अपनी बहन-बेटियों की इज्जत पर डाका डालनेवाले कथित उच्च जाति के दरिंदों के साथ ‘जैसे को तैसा ‘ और ‘ईंट का जबाब पत्थर से दें ‘ तभी इसका सही समाधान होगा,इसके अलावे इसका कुछ भी समाधान नहीं है ! सबसे बड़ा और बढ़िया इसका इलाज यही है कि 85 प्रतिशत बहुजन समाज आपस में वैवाहिक संबंध बनाए और पूरे 84 प्रतिशत भारतीय समाज के लोग गोलबंद होकर इन 3.5 प्रतिशत कुटिल और धूर्तों से मुकाबला करें,तब वे अवश्य विजयी होंगे, तभी इस देश में वास्तविक समता,न्याय और शांतिपूर्ण समाज की स्थापना होगी !
-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में पाखंड,अंधविश्वास,राजनैतिक, सामाजिक,आर्थिक,वैज्ञानिक,पर्यावरण आदि सभी विषयों पर बेखौफ,निष्पृह और स्वतंत्र रूप से लेखन ‘, गाजियाबाद, उप्र,





