राजगीर
दुनिया की सबसे पुरानी नालंदा यूनिवर्सिटी एक बार फिर से अपने पुराने वैभव के साथ तैयार हो चुकी है। बिहार के राजगीर में 456 एकड़ में फैला यूनिवर्सिटी का कैंपस इतिहास व आधुनिक निर्माण कला का अनूठा संगम है। सीढ़ियों और भवन की बनावट अतीत की यादें ताजा करती हैं। दुनिया की इस पहली यूनिवर्सिटी की स्थापना गुप्त काल के दौरान पांचवीं सदी में हुई थी। बख्तियार खिलजी ने 1199 में इस यूनिवर्सिटी में आग लगवा दी।


बिहार के नालंदा जिला में स्थित नालंदा यूनिवर्सिटी अपनी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर तक रखता है। नये भवन का ये प्रवेश द्वार है।

कुलपति प्रो. सुनैना सिंह ने बताया कि निर्माण कार्य 90% पूरा हो गया है। कैंपस में 200 भवन बनकर तैयार हैं। नया कैंपस प्राचीन विवि से 12 किमी दूर है। छोटे सरोवरों से घिरे इस एम्फीथिएटर को देखना सुकून देता है।

प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी के आसपास गुप्तकालीन 52 तालाब हैं। उन तालाबों को यूनिवर्सिटी के समकालीन माना जाता है

यूनिवर्सिटी को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि यह शैक्षणिक संस्थान के साथ विश्वस्तरीय शोध केंद्र भी बने।
सितंबर 2014 में यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की शुरुआत हुई
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने 2007 की ईस्ट एशिया समिट में नालंदा यूनिवर्सिटी के रिवाइवल का विचार 16 देशों के साथ साझा किया था। इसके बाद इसे अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से विकसित करने पर सहमति बनी। 800 साल तक ज्ञान के प्रमुख केंद्र रहे नालंदा विश्वविद्यालय का नया स्वरूप वास्तव में 2014 में आया। सितंबर 2014 में यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की शुरुआत हुई।
यहां होंगे सात स्कूल
- स्कूल ऑफ इंटरनेशनल रिलेशन एण्ड पीस
- स्कूल ऑफ लैंग्वेज एंड लिटरेचर
- स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज
- स्कूल ऑफ हिस्टॉरिकल स्टडीज
- स्कूल ऑफ इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी
- स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेंजमेंट
- स्कूल ऑफ इंवायरमेंटल स्टडीज






