रीवा । समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि किसी भी चुनावी संकल्प पत्र में विकास की अवधारणा स्पष्ट नहीं है। पूंजीवादी विकास में जनसाधारण का भला नहीं हो सकता है । यह भारी विडंबना है कि आगामी 13 जुलाई को होने जा रहे नगरीय निकाय चुनाव में शहर की मूलभूत जन आवश्यकताओं को दरकिनार करने वाले कथित पूंजीवादी विकास के विरोध में कोई भी स्थापित दल मुखर नहीं हुआ , न ही इसे चुनावी मुद्दा बनाया । इधर बरसात नहीं हुई लेकिन यह कटु अनुभव है कि बमुश्किल आधे घंटे की बारिश में शहर कृत्रिम बाढ़ का शिकार हो जाता है जबकि इस दौरान नदी में बाढ़ नहींं आती है । मनमाने तरीके से बनाए गए फ्लाई ओवरों के चलते पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग सकरा हो गया है वहीं बड़े पैमाने हरे भरे वृक्षों की कटाई एवं बढ़ती माल अपसंस्कृति के चलते पूरे शहर का पर्यावरण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है । ऐतिहासिक जय स्तंभ चौक को सुरक्षित करने की बात किसी भी संकल्प पत्र में नहीं है । ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट किया जा रहा है वहीं सरकारी जमीनों को पूंजी पतियों के हवाले किया जा रहा है । यह भी देखने को मिल रहा है कि होने जा रहे चुनाव में जाति , धर्म , पैसा , दारु , मुर्गा गंदा खेल शुरू है जिसे रोक पाने में चुनाव आयोग पूरी तरह असमर्थ नजर आ रहा है । रीवा के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पर बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण को नहीं हटाया जा सका है , वहीं धर्म के नाम पर अनेक पार्को का मूल स्वरूप बिगाड़ दिया गया है । श्री खरे ने कहा कि धर्म नितांत निजी उपासना का विषय है । अस्पताल, स्कूल , पार्क , शासकीय कार्यालयों , न्यायालय आदि क्षेत्र में किसी भी धर्म का उपासना स्थल बनाया जाना गलत परंपरा को बढ़ावा देना है जिसके दूरगामी परिणाम किसी भी रुप में अच्छे नहीं होंगे । देश के सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देश के बावजूद शासन प्रशासन की चुप्पी ऐसे गलत कामों को बढ़ावा है , जिसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।
किसी भी चुनावी संकल्प पत्र में विकास की अवधारणा स्पष्ट नहीं : अजय खरे





