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मोसाद के जाल में डोनाल्ड ट्रम्प, मोदी सहित कई राजनैतिज्ञ और पूंजीपतियों का हाल बेहाल

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 -सुसंस्कृति परिहार 

आजकल ऐप्सटीन फाइल में जिस तरह के धड़ाधड़ खुलासे हो रहे हैं उसके पीछे इज़राइल की जासूसी संस्था मोसाद का हाथ है वह एपस्टीन जैसे व्यक्तियों का सहारा लेकर जो खेल खेलती रही है उनके राजनैतिक कैरियर और सामाजिक जीवन को तबाह करने का गुनाह करती रही है इसके बदले इज़राइल ने ना केवल फिलीस्तीन को बर्बाद किया बल्कि अरब देश और यूरोपीय देशों के साथ भारत को अपनी चपेट में लिया और उन्हें नाबालिग बच्चियों को पेश कर जो वीभत्स काम किए गए इसमें तमाम लोगों के वीडियो,ईमेल और बातचीत सब रिकार्ड में ली गई है।ताकि उनसे मनमुताबिक काम लिए जा सकें।

डोनाल्ड ट्रम्प और कई राजनैतिज्ञ इज़राइल के इस कदर दीवाने रहे कि उसने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी को भी इस जाल में प्रधानमंत्री बनने से पूर्व ही फांस लिया था। मोदी को सहजता से फांस लिया गया क्योंकि ऐसा माना जाता है,वे संघ के कार्यकर्ता होने के कारण कुंठाग्रस्त पहले ही से थे। बहरहाल मोसाद खुफिया तंत्र यहूदियों का संगठन है। ऐप्सटीन भी एक एजेंट बतौर काम कर रहा था। उसे पकड़ा गया बताते हैं वहां उसकी मौत हो गई। लेकिन यह संदिग्ध है क्योंकि मोसाद का एजेंट अमरीका में मर जाए ऐसा संभव नहीं। इसलिए इज़राइल से यदा-कदा उसके जीवित होने की ख़बर भी आ जाती है।

बहरहाल, मोसाद अपने अत्यंत गोपनीय और अक्सर विवादास्पद तरीकों के लिए जानी जाती है, जिसमें लक्षित हत्याएं शामिल हैं। इसकी आधारशिला इज़राइल के पूर्व प्रधानमंत्री ईहुद बराक और एपस्टीन के व्यक्तिगत सम्बंध के कारण मज़बूत हुई। बराक एपस्टीन से कई बार मिले थे और उसके घर भी गए थे। इसीलिए उसने अगस्त 2019 में मरने से पहले ईहुद बराक को पैरागॉन सॉल्यूशंस नामक एक साइबर-निगरानी (spyware) कंपनी की स्थापना करने के लिए वित्तीय मदद की। बराक इसके सह-संस्थापक और बोर्ड सदस्य रहे हैं। यह कंपनी ‘ग्रेफाइट’ नाम का जासूसी सॉफ्टवेयर बनाती है, जिसका उपयोग मुख्यतः सरकारें मोबाइल फोन की निगरानी के लिए करती हैं।

पैरागॉन सॉल्यूशंस को इस्राएल की खुफिया एजेंसी यूनिट 8200 के कमांडर ईहुद श्नेओर्सन तथा अन्य पूर्व इंटेलिजेंस अधिकारियों और पूर्व प्रधानमंत्री ईहुद बराक ने मिलकर शुरू किया। इसका मुख्य उत्पाद स्पाइवेयर ‘ग्रेफाइट’ मोबाइल फोन में घुसकर ह्वट्सऐप, सिग्नल और टेलीग्राम जैसी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं और क्लाउड बैकअप से जानकारी चुराता है।बराक का यह जासूसी सॉफ्टवेयर एपसटीन के हर ईमेल के साथ उस व्यक्ति के मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या कंप्यूटर में खुद ही अपलोड हो जाता, जो वह ईमेल या फाइल को खोलकर देखता। यानी यह फोन में बिना क्लिक किए भी घुस कर मैसेज, कॉल, फोटो, क्लाउड डेटा तक पहुँच सकता है। 

बराक का यह सॉफ्टवेयर मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या कम्प्यूटर के कैमरे, मैसेजिंग और रिकॉर्डर का पूरा कंट्रोल एप्सटीन के हाथ में दे देता था। 

इस कांड में अमेरिकी के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और उनकी पत्नी हिलेरी के भी  शामिल होने पर अमेरिकी न्याय विभाग में पेशी चल रही है।

 ‘इसके अलावा पेगासस’ के जरिए दुनियाभर के पत्रकारों, राजनेताओं, बड़े-बड़े कॉरपोरेट व्यवसायियों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की जासूसी की गई। 

इस्राएल के पास इस समय दुनियाभर के नेताओं, पत्रकारों, कॉर्पोरेट्स और तमाम रसूखदार हस्तियों की गोपनीय करतूतों की जानकारियाँ हैं। भारत में ‘एब्सोल्यूट पॉवर’ हासिल करने के लिए नरेंद्र मोदी को इस कुख्यात जासूसी साधन पेगासस की जरूरत महसूस हुई तो ले आए और अपने विरोधी नेताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, उच्चाधिकारियों, न्यायाधीशों आदि की जासूसी करवाई।

इज़राइल जिससे पूर्ववर्ती सरकारों ने दूरी बनाके रखी वहां मोदीजी के जाने को उपलब्धि माना गया।आज वे भी मोसाद के एजेंट की तरह उसके सामने सरेंडर हैं। ट्रम्प का भी यही हाल है। कई देशों के राजनायिकों ने एप्स्टीन फाईल में नाम आने पर या तो स्वेच्छा से हट गए या हटा दिए गए हैं। लेकिन अमरीका और भारत की बेशुमार यारी का क्या कहना बदनामियों से कोई फ़र्क नहीं पड़ा है।

ऐसे परिदृश्य में इज़राइल को नेस्तनाबूद करने का जो जलवा ईरान जैसा छोटा देश दिखा रहा है उससे नेतान्याहू और ट्म्प दोनों की सिट्टी-पिट्टी गुम है। मोदी निडरता पूर्वक अभी भी इन दोनों के पक्ष में ना केवल खड़े हैं बल्कि बराबर आदेश पालन किए जा रहे हैं।जब तक ट्म्प है मोदी का बालबांका नहीं हो सकता।ट्म्प के जाने के बाद या ऐप्सटीन की हकीकत खुलने के बाद शायद भारत के भक्तों पर असर पड़े। फिलहाल एक आज़ाद देश आज गुलाम की तरह के हालात में पहुंच गया है। ईरान ऐसे दुष्ट राष्ट्रों से फिलीस्तीन की ज़मीन छीनकर उसे राष्ट्र का दर्जा दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है। अमेरिका दबाव में रहे सुन्नी मुस्लिम देश भी ईरान के साथ आ रहे हैं। फिलीस्तीन में शरणागत की तरह आए यहूदियों के बर्चस्व और घृणास्पद राजनीति सूत्रधार इज़राइल के ऐसे लोगों का नाश होना बेहद ज़रूरी है।सब राष्ट्र मिलकर इज़राइल को सबक सिखाएं ताकि एक कलुषित राजनीति का अंत हो। भारत यदि अब भी नहीं चेतेगा तो भविष्य बहुत दुखद होगा।जिसकी सीधी मार आम जनता पर पड़ेगी।

Ramswaroop Mantri

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