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उग्र दक्षिणपंथी विचारधारा का स्याह सच

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परमजीत बाॅबी सलूजा 

महान स्वतंत्रता सेनानी तथा आधुनिक भारत के शिल्पकार पंडित जवाहर लाल नेहरू के चरित्र पर आधारहीन आरोप लगाने वालों,  पूर्व प्रधानमंत्री, लौह महिला इंदिरा गांधी पर घृणित मानसिकता से चारित्रिक आरोप लगाने वालों,  पूर्व प्रधानमंत्री, संचार क्रांति के जनक राजीव गांधी पर बेबुनियाद भ्रष्टाचार के आरोप मढ़ने वालों, विदेशी धरती पर तथा अलग धर्म में जन्म लेकर भी भारत देश तथा हिंदू धर्म को गहराई से मानने और अपनाने वाली सोनिया गांधी पर हद दर्जे की गिरी हुई चारित्रिक टिप्पणियां करने वालों, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के पावन रिश्ते पर घटिया सवाल उठाने वालों, राहुल गांधी और भांजी मिराया के आत्मिक रिश्ते पर दोयम दर्जे की सोच रखने वालों के अपने सांगठनिक पूर्वजों के काले इतिहास की भी चर्चा होनी आवश्यक है जो पूर्णतः सत्य पर आधारित तथ्य हैं। 

 भक्तों, शुरुआत बुलबुल की सवारी करने वाले विनायक दामोदर  सावरकर से करते हैं, यह पतित आदमी लंदन में ब्रिटिश महिला मार्गरेट लॉरेंज से बलात्कार के कुत्सित प्रयास में गिरफ्तार हुआ था, इसने अपना जुर्म कबूल किया था और इसे चार महीने की जेल हुई थी। इसी सावरकर तथा स्वतंत्र भारत का प्रथम क्रूर आतंकवादी नत्थू राम गोड़से के दरम्यान अनैतिक शारीरिक संबंध के किस्से किसी से छिपे नहीं हैं, कई देशी, विदेशी पुस्तकों में इसका उल्लेख है।

इसके बाद आते हैं तुम्हारे दो और बड़े नेताओं पर जिनके कुकर्मों को तुम्हारे लोगों ने ही सार्वजनिक किया है। अटल बिहारी वाजपेई और चंडिकादास अमृतराव देशमुख उर्फ नानाजी देशमुख का तुम्हारे ही एक और बड़े नेता दीनदयाल उपाध्याय के साथ क्रूर व्यवहार का खुलासा स्वयं जनसंघी बलराज मधोक ने अपनी पुस्तक  *दीनदयाल उपाध्याय की हत्या से इंदिरा गांधी की हत्या तक  भाग तीन में उल्लेख किया है* यह पुस्तक तीन खंडों में प्रकाशित हुई थी और ऐसा कहा जाता है कि जिसे बाजार से उन्हीं  धतकर्मियों ने उठवा दिया था। दीनदयाल उपाध्याय तुम्हारे उन दोनों तथाकथित *प्ले बॉय* की हरकतों से तंग आ गए थे और उन पर कड़ी कार्रवाई चाहते थे पर संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृत्यु मुगलसराय रेलवे स्टेशन के पास हो जाती है जो दरअसल में वर्चस्व की लड़ाई तथा अपने कुकर्मों को ढकने हेतु सुपारी किलिंग थी। मोदी शाह में इतना साहस क्यों नहीं है कि वह अपने पूर्वज दीनदयाल उपाध्याय के संदिग्ध मौत की जांच करा देश के समक्ष उसकी सच्चाई को रखते। कुंठित मानसिकता से सिर्फ नेताजी की मृत्यु पर सवाल करेंगे ? सरदार पटेल जी की मृत्यु पर नेहरू जी के न जाने का ही झूठा नेरिटीव गढ़ेंगे ? शास्त्री जी की मृत्यु पर विधवा विलाप करते हुए इंदिरा जी पर ही दोषारोपण करेंगे ? पूर्व केंद्रीय मंत्री ललित नारायण मिश्रा की मौत पर झूठ ही फैलाएंगे ? गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री बलदेवभाई मेहता की मौत पर ही भ्रम फैलाएंगे ?  पूर्व केंद्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया की मौत पर ही बकवास करेंगे ? पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट जी की मृत्यु पर झूठी सनसनी ही फैलाएंगे ? हमारी सीधी चुनौती मोदी शाह को है कि अगर साहस है तो अपने पितृपुरुषों श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा दीनदयाल उपाध्याय की मौतों की गहन जांच करा देश के सामने सच को लाएं, पर पता है इतना साहस इनमें नहीं है।

खैर, हम विषय पर ही रहते हैं वाजपेई की जब रंगीनियां हद से गुजरने लगीं तो भाजपा के ही बड़े नेता जगदीश प्रसाद माथुर ने इस विषय पर बलराज मधोक से बात की, मधोक ने गोलवलकर से बात की पर वाजपेई की हरकतों पर कोई लगाम नहीं लगी नतीजा यह कि वाजपेई राजकुमारी कौल नामक ब्याहता और दो बच्चों की मां को सरेआम अपने साथ रखने लगे। कौल ग्वालियर में इनके साथ ही पढ़ती थीं, वाजपेई उन्हें चाहते थे पर विवाह नहीं हो पाया तो उन्हें इस तरह से अनैतिक रूप से अपने साथ रख लिया। किसी भी सभ्य समाज में ऐसे पतितों का कोई भी स्थान नहीं होता पर नारंगियों की कुमति देखिए, दोनों वाजपेई तथा नानाजी को भारत रत्न से नवाज दिया। 

अब बात तुम्हारे एक और धतकर्मी की, लाल किशनचंद आडवाणी उर्फ लालकृष्ण आडवाणी ने तो अपनी स्वयं की बहू को नहीं छोड़ा। विवाह से पूर्व गौरी, लालकृष्ण की निजी सचिव थी जिसे उसने अपने पुत्र जयंत से ब्याह दिया। यहां से उसका कुत्सित खेल शुरू होता है और यह कामान्ध, कामुक व्यक्ति अपनी ही बहू के साथ रंगरलियां मनाता। जब पानी सर से ऊपर जाने लगा तो गौरी आडवाणी ने 19 नवंबर 2004 को आरएसएस के तत्कालीन सरसंघचालक दत्तात्रेय मधुकर देवरस और अटल बिहारी को पत्र लिखकर अपनी वेदना व्यक्त की पर उसे न्याय नहीं मिला। क्या बेटी रूपी बहू के साथ दरिंदगी करने वाला सभ्य समाज में आदर्श हो सकता है ? कदापि नहीं पर आडवाणी को भी भारत रत्न दे दिया गया। 

इनके बाद नंबर आता है एक और भाजपाई दिग्गज प्रमोद महाजन का, इनके कुकर्म भी इनके लोगों ने ही सामने लाए हैं। इनकी हत्या छोटे भाई प्रवीण महाजन ने की थी। कई लोगों का मानना था कि प्रमोद महाजन का छोटे भाई प्रवीण की पत्नी के साथ नाजायज संबंध थे पर प्रवीण की मृत्यु होने पर इसका सच सामने नहीं आ सका। बहुचर्चित पत्रकार शिवानी भटनागर की संदेहास्पद मृत्यु में भी प्रमोद महाजन का नाम आया था। शिवानी के बच्चे के असल पिता की पहचान के नाम पर प्रमोद महाजन के डीएनए की मांग भी उठी थी जिसे वह मान गए थे पर जांच नहीं हुई थी। जेल में प्रवीण ने लिखी अपनी किताब में भी प्रमोद का अवैध संबंध पत्रकार शिवानी भटनागर से होने की बात लिखी है। 

अब बात तुम्हारे सबसे बड़े गुरु की, जिसके झूठे कसीदे पढ़कर तुम लोगों ने आम जनता को भ्रमित कर देश का बहुत अहित किया है। विष गुरु के चारित्रिक आचरण पर पहली वार वर्तमान में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमति आनंदी बेन पटेल के पति श्री मफतलाल भाई पटेल ने किया था जब उन्होंने 26.08.1985 में तब के भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी को मार्मिक पत्र लिखकर नरेन्द्र मोदी के कब्जे से अपनी पत्नी आनंदी बेन को छुड़ाने की गुहार लगाई थी, पत्नी न वापस मिलने पर आत्महत्या करने की बात भी लिखी गई थी। मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी का मानसी सोनी नामक युवती साथ संबंध, संपर्क भी  खूब चर्चा में रहा। बतौर गुजरात के गृह मंत्री अमित शाह पर मानसी की जासूसी का आरोप भी है, जिसका दिल्ली विधानसभा में तब के आम आदमी पार्टी के विधायक कपिल मिश्रा ने सारी अंतरंगताओं का विस्तार से जिक्र किया है आज वही कपिल मिश्रा दिल्ली भाजपा सरकार में कानून मंत्री है। 

जिस बेशर्मी से झूठे तथ्यों के आधार पर लोकसभा में निशिकांत दुबे गांधी परिवार की चरित्र हत्या कर रहा था वह स्वयं हिंदू धर्म की मान्यताओं को तार तार कर अपनी ही ममेरी बहन से विवाह कर हिंदुत्व का झंडाबरदार बना हुआ है। भ्रष्टाचार में भी इसका कोई सानी नहीं, इसकी भी डिग्री संदेह के घेरे में है, ऐसे संदिग्ध व्यक्ति की स्वयं की कोई विश्वसनीयता नहीं है। इनके अलावा अनेक भाजपाइयों के चारित्रिक दाग सार्वजनिक रूप से जनता के समक्ष है इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद, मध्यप्रदेश में वित्त मंत्री रहे राघव जी, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर प्रमुख हैं अभी उत्तराखंड की बिटिया अंकिता भंडारी को नोचने की सोच रखने वाले तथाकथित भाजपाई वीआईपी का भी नाम सामने आना है। यह तो वे बड़े नाम हैं जो सुर्खियां पा चुके हैं, इनके कई और लोग ऐसे घृणित कुकृत्यों में लिप्त रहे हैं, फेहरिस्त अंतहीन है।

दूसरी तरफ जिस पंडित नेहरू से इनकी नफरत छिपाए नहीं छिपती, उन्होंने उस आधुनिक भारत की नींव तब रखी थी जब देश लुट पिट कर विभाजित आज़ाद हुआ था, दंगाग्रस्त था, अभावग्रस्त था। उस भारत को नेहरू जी ने अपनी आधुनिक प्रगतिशील सोच से अपने साथियों के साथ वह स्वरूप दिया जिसने अल्प अवधि में ही विश्व पटल पर मजबूत पैठ बना ली थी।  संकीर्ण सोच वाली विचारधारा भले ही नेहरू को उनके परलोक गमन के 62 वर्षों बाद भी कोसती रहे पर दरअसल में वे क्या थे यह सारी दुनिया काफी बेहतर जानती है। देश, विदेश में नेहरू बहुआयामी व्यक्तित्व हैं, जहां राष्ट्रपिता के लिए वह *हिंद का जवाहर* थे, कविगुरु टैगोर के लिए *ऋतुराज* थे, मुंशी प्रेमचन्द के लिए  *ईश्वर का  रूप* थे, रामधारी दिनकर के लिए *लोकदेव* थे, वहीं आइंस्टीन के लिए वह *आधुनिक बुद्ध* थे, नेल्सन मंडेला के लिए उपनिवेशवाद से आज़ाद होते देशों के *हीरो* थे, मोहम्मद अली जिन्ना के लिए *सबसे बड़ा हिंदू* थे, सऊदी अरब के शासक सऊद बिन अब्दुल अज़ीज़ के लिए वो *रसूल अल सलाम*  अर्थात शांति का दूत थे।

 जिस इंदिरा गांधी के दामन पर इस विचारधारा ने मैला फेंकने की कुचेष्टा की, उनके  बहुआयामी व्यक्तित्व से भी सारी दुनिया वाकिफ है, इनके विराट और जीवट रूप को सबसे पहले कांग्रेस के अंदर के उन नेताओं ने जाना जो नेहरू जी तथा शास्त्री जी की कांग्रेस पर अपना प्रभुत्व जमाना चाहते थे फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महाशक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन केनेडी और राजनयिक हेनरी क्लिंजर को इंदिरा जी के विराट रूप का भान हुआ, उनके अदम्य साहस को सलाम करते हुए स्वयं संघी अटल बिहारी ने *दुर्गा* कहा था।  इस देश की जनता ने ही उन्हें *लौह महिला* का खिताब दिया है। पाकिस्तान में जहां आज भी इंदिरा जी के नाम का खौफ है वहीं बांग्लादेश में आज भी वो बेहद सम्मानित हस्ती हैं। 

जिस निश्छल राजीव जी की उदारता का बेजा फायदा उठाकर उन्हें बदनाम करने का षड्यंत्र किया वो राजीव जी युवाओं के प्रेरणास्रोत रहे, संचार क्रांति से उन्होंने देश को अग्रिम पंक्ति में पहुंचा दिया, भले ही सत्ता की अपनी भूख मिटाने हेतु संघीयों ने उनकी *मिस्टर क्लीन* की छवि को तार तार करने की जुर्रत की पर करोड़ों लोगों के दिलों से उनकी निश्छल छवि को नहीं मिटा सके। आज भी उनका सौम्य व्यक्तित्व करोड़ों भारतीयों की प्रेरणा है।

जिस सोनिया जी के विदेशी मूल को निशाना बना इस संगठन ने उनके साफ़ श्वेत व्यक्तित्व पर सार्वजनिक कीचड़ उछाला उस सोनिया जी ने इस देश की निस्वार्थ सेवा में अपना सबकुछ अर्पित कर दिया। सच तो यह है कि भारतीय राजनीति तथा भारतीय समाज में उनकी मजबूत और प्रभावी छवि है।

 जिस राहुल जी की पाक छवि को धूमिल करने इस विचारधारा ने बेहिसाब जनता के पैसों का दुरूपयोग किया, उनके चरित्र पर भी झूठे इल्जाम लगाए पर राहुल जी ने सच्चाई, अथक परिश्रम, जनता से सीधे जुड़ाव, आधुनिक सोच के जरिए चहुंमुखी विरोध के हर स्वर को भोथरा कर दिया। आज वह भारतीय राजनीति के सबसे धवल चेहरे हैं जो अपने मिशन पर अडिग हैं। 

इसी तरह से प्रियंका जी पर भी इनकी ओछी सोच जगजाहिर है पर प्रियंका जी का डर भी इन्हें भीतर खाने बहुत डराता है। प्रियंका जी बेहिचक इनके राजनैतिक पिच में इन पर ही भारी पड़ती हैं। 

आशय यह है कि ये नासमझ, नफरती गैंग जितना भी इस परिवार के प्रति जहर फैलाए, देश के आम लोगों और कार्यकर्ताओं के अटूट सहयोग और स्नेह के चलते परिवार को इस नफरती गैंग को परास्त करने, काफी मजबूती मिलती है। विदेशों में  इनकी साख आज भीं गौरवशाली पहचान के साथ है। कई सड़कें, मार्ग, संस्थान, पुरस्कार इनके नाम से हैं। 

चाल, चरित्र और चेहरा की ढपोरशंख बात करने वाली भाजपा की असली चाल देश के सभी संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर एकछत्र सत्ता हांकने की है जहां भारतीय संविधान की कोई अहमियत नहीं है, जहां सरकार की तथ्यात्मक आलोचना निषेध है, जहां सरकार का विरोध का आशय राष्ट्रविरोध माना जाता है, जहां विविधताओं का कोई स्थान नहीं, जहां सरकार और संगठन की झूठी तारीफ को राष्ट्रसेवा माना जाता है। इनके असली चरित्र को न केवल देशवासी अपितु सारी दुनिया जान चुकी है। ये कितने महिला विरोधी, उत्पीड़क हैं। अब ऐसी बेढ़ंगी चाल और ऐसे स्याह चरित्र वालों के चेहरों की कल्पना सहज ही की जा सकती है कि वह कितना भयावह है और देश तथा समाज के लिए कितना अभिशप्त है।

 वैचारिक दरिद्रता, चारित्रिक गिरावट, नफ़रती सोच, राजनैतिक दोगलापन, सत्ता का दुरुपयोग, दलगत विरोधियों के प्रति घोर विद्वेष भारत के किस राजनीतिक दल में है यह इस आलेख से साफ स्पष्ट है। सनद रहे, इस उग्र दक्षिणपंथी पार्टी को अब उसी की भाषा में या उससे भी बढ़कर जवाब  देने का समय है क्योंकि दुष्ट कभी भी शिष्ट भाषा को नहीं समझता उसे अपनी ही भाषा समझ आती है। इसलिए बेहिचक इनके काले सच को जनमानस में रखें क्योंकि देश सेवा की समृद्ध विरासत को सामने लाना, अपनी नई पीढ़ी को उससे अवगत कराना भी राष्ट्र सेवा तथा समाज सेवा का रूप है।

        (नयारायपुर,छत्तीसगढ़)

Ramswaroop Mantri

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