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दिल्ली पुलिस के जवानों की नजरें सबसे ज्यादा जॉर्ज की कोठी पर ही लगी रहती थीं

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वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन की पोस्ट

आदरणीय जॉर्ज साहब को विनम्र श्रद्धांजलि. 🙏🙏

यह एक दुर्लभ तस्वीर है जो बहुत कम लोगों ने देखी होगी। यह तस्वीर समाजवादी आंदोलन के योद्धा-नायक #जॉर्जफर्नांडीज और लैला कबीर की शादी के अवसर (1971) की है। इस मौके पर तत्कालीन प्रधानमंत्री #इंदिरागांधी भी उन्हें शुभकामनाएं देने पहुंची थीं। इसके कुछ ही सालों बाद राजनीतिक घटनाचक्र इस तरह घूमा कि इंदिरा जी और जॉर्ज साहब के राजनीतिक रिश्ते तल्ख से तल्ख होते चले गए और उसके बाद जो कुछ हुआ वह एक अलग ही इतिहास है।

बहरहाल आज जॉर्ज साहब का छठां स्मृति दिवस है। इस मौके पर उनसे जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा याद आ रहा है। बात 1992-93 की है। केंद्र में पीवी नरसिंहराव की सरकार में #शंकरराव_चव्हाण गृह मंत्री हुआ करते थे। दिल्ली में कृष्ण मेनन मार्ग पर उनकी और जॉर्ज फर्नांडीज की सरकारी कोठी आमने-सामने हुआ करती थी।

उस मार्ग पर और भी मंत्री व सांसद रहते थे, लेकिन गृह मंत्री की सुरक्षा में तैनात एनएसजी यानी नेशनल सिक्योरिटी गार्ड और दिल्ली पुलिस के जवानों की नजरें सबसे ज्यादा जॉर्ज की कोठी पर ही लगी रहती थीं, क्योंकि उनके यहां कश्मीर, पंजाब, उत्तर-पूर्व और अन्य कई राज्यों के उन आंदोलनकारियों का आना-जाना लगा रहता था, जिन्हें सरकार और मुख्यधारा का मीडिया बड़ी सहजता से आतंकवादी, उग्रवादी या नक्सली करार दे देता है।

जाॅर्ज के घर पर तिब्बत, नेपाल, म्यांमार, भूटान आदि देशों के आंदोलनकारी और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी मदद और मार्गदर्शन लेने के लिए आते रहते थे। इसलिए गृह मंत्री चव्हाण जब भी अपने घर से निकल कर कहीं जाते थे या कहीं से घर लौटते थे तो उनके सुरक्षाकर्मी जॉर्ज की कोठी का मुख्य दरवाजा बंद कर देते थे। इस प्रकार जॉर्ज और उनके घर आने वालों को दिन में कई बार घर में कैद होकर रह जाना पड़ता था।

नागरिक आजादी और लोकतंत्र के लिए जान हथेली पर लेकर सत्ता से टकराने वाले जॉर्ज को यह सब बड़ा नागवार लगता था, लिहाजा एक दिन उन्होंने कुछ आवश्यक औजार मंगवाए और अपने हाथों से अपने घर का वह मुख्य दरवाजा ही उखाड़ फेंका। इसके बाद वे सीधे संसद भवन गए। उन्होंने लोकसभा में अपने घर का दरवाजा उखाड़ने की सूचना देते हुए कहा कि यह गृह मंत्री देश की सुरक्षा कैसे करेगा, जो अपने घर के सामने रहने वाले सांसद से इतना डरता है कि आते-जाते वक्त उसे बाहर से कैद करवा देता है।

जॉर्ज के बारे में एक उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि वे न तो अपने साथ कोई सुरक्षाकर्मी रखते थे और न ही उनके घर पर कोई सुरक्षाकर्मी तैनात रहता था। अपनी गाड़ी भी अमूमन वे खुद ही चलाते थे। उनकी स्मृति को सलाम।

Ramswaroop Mantri

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