किसानों की मांग जल्द मंडीया चालू की जाए,लॉकडाउन के कारण किसानों को हुए नुकसान की भरवाई की जाए
*देपालपुर (भूरा धाकड़)
लंबे लॉकडाउन के कारण मंडियां बंद होने से किसानों की घर पर रखी आलू, प्याज की फसल सडने लगी है । इसके कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है गांव रतन खेड़ी के किसान श्रीराम पिता कल्याण सिंह सोनगरा के घर पर रखे आलू प्याज सडने लगी हैं उन्होंने बताया कि आलू खेत से निकालते समय मंडी में भाव कम था इस कारण हमने घर पर आलू स्टोर कर रखा था उस समय मंडी में भाव 6 ,8रु किलो बिक रहा था समय इससे लागत भी नहीं निकल पा रही थी हमने बीज का आलु 30रु किलो के हिसाब से खरीदा था खाद, दवाइयां उड़ाई जिससे खर्च काफी ज्यादा आया
हमें ऐसा मालूम भी नही था की इतने समय लाक डाउन लगा दिया जाएगा साथ मे मंडियां बंद कर दी जाएगी है श्रीराम ने बताया कि घर पर रखे आलू प्याज सड़ने लगे हैं। आलू खेत से निकालते समय मंडी में भाव कम था। इस कारण हमने घर पर आलू स्टोर कर रखा था। उस समय मंडी में भाव 6 से 8 रु. किलो बिक रहा था। ऐसे में लागत भी नहीं निकल पा रही थी। हमने बीज का आलू 30 रु. किलो के हिसाब से खरीदा था। खाद, दवाइयां उड़ाई, जिसमें काफी खर्च हुआ था। ऐसा मालूम भी नहीं था कि इतने समय लाॅकडाउन लगा दिया जाएगा और मंडी बंद हो जाएगी। बारिश होने से घर पर रखे प्याज भी खराब हो रहे हैं। ऐसे में मैंने आलू के 45 से 50 कट्टे गोबर के गड्ढे में डाले दिए।बारिश होने से घर पर रखे उनके प्याज भी खराब हो रहे हैं ऐसे में किसान मांग कर रहे हैं कि मंडी चालू की जाए जिससे हम फसल बेच सके क्योंकि सिर पर खरीफ सीजन की फसल की तैयारी भी करना है साथ ही पैसों की भी जरूरत है फसल बिकेगी जब हमारे पास पैसे आएंगे और अगली फसल की तैयारी कर सकेंगे।
किसान नेता बबलू जाधव ने बताया कि पहले ही सब्जी उत्पादक किसान बुरी तरह से बेहाल है मंडिया बंद होने के कारण अपनी फसल नहीं बेंच पा रहे हैं किसानों द्वारा लागत लगाने के बाद भी आज उनके हाथ खाली है और अब आलू, प्याज उत्पादक किसान जिन्होंने अपने घर पर स्टोर कर रखी वह फसल भी अब खराब होने लगी है मंडीया बंद होने के कारण हमारी मांग है कि जल्द से जल्द मंडियां चालू की जाए साथ ही सब्जी उत्पादक किसानों को जो नुकसान हुआ है उसकी क्षतिपूर्ति शासन द्वारा की जाएश्रीराम ने बताया कि घर पर रखे आलू प्याज सड़ने लगे हैं। आलू खेत से निकालते समय मंडी में भाव कम था। इस कारण हमने घर पर आलू स्टोर कर रखा था। उस समय मंडी में भाव 6 से 8 रु. किलो बिक रहा था। ऐसे में लागत भी नहीं निकल पा रही थी। हमने बीज का आलू 30 रु. किलो के हिसाब से खरीदा था। खाद, दवाइयां उड़ाई, जिसमें काफी खर्च हुआ था। ऐसा मालूम भी नहीं था कि इतने समय लाॅकडाउन लगा दिया जाएगा और मंडी बंद हो जाएगी। बारिश होने से घर पर रखे प्याज भी खराब हो रहे हैं। ऐसे में मैंने आलू के 45 से 50 कट्टे गोबर के गड्ढे में डाले दिए।
लौकी की फसल पर चलाया ट्रैक्टर
शहर से 60 किलोमीटर गौतमपुरा गांव के रुणजी क्षेत्र के सब्जी की फसल पर ट्रैक्टर चलाते दिख रहे हैं। किसान महेश भुत ने अपने 10 बीघा खेत मे लोकी की फसल लगाई थी। लोकी की फसल 60 दिनों में आना शुरू हो जाती है। परंतु फसल की बोवनी के कुछ दिनों बाद लॉकडाउन लग गया। किसान की फसल तैयार हुई, जब तक क्षेत्र व अन्य जिलों की मंडियों बंद हो गई लोकी खेत मे ही खराब होने लग गई। खेत तैयार करना था इसलिए ट्रैक्टर चला दिया। 4 लाख का नुकसान किसान को हुआ है।





