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*भारतीय शक्ल का भी निर्धारण करें सरकार ताकि चकमा जैसे लोग बचे रह सकें*!

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-सुसंस्कृति परिहार 

त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा के साथ घटी अमानवीय घटना को देखते हुए अब भारत सरकार को एक भारतीय शक्ल का निर्धारण कर देना चाहिए ताकि हमारे सिक्किम , मेघालय ,मिजोरम,असम,त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणाचल और नागालैंड के लोगों को ऐसी घटनाओं से बचाया जा सके। देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखंड जिसे हिंदू राज्य बनाने की पहल जारी है। वे उन्हें भारतीय नहीं  समझते जिनके चेहरे में मंगोलियन, तिब्बती और चीनी, या कोरियन चेहरों से मिलते जुलते हैं। वे तो भारतीय मुस्लिमो को भी पहनावा से अलग समझते हैं।ऐसे में बड़ा मुश्किल है चेहरे को भारतीय रंग देना । इसकी पहचान आधार कार्ड से हो सकती थी लेकिन अंधों को इतनी फुर्सत कहां? वे तो इज़राइल के चितपावनों को,देश के ग़द्दारों को अपना मान बैठे हैं किंतु कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष डब्ल्यू ह्यूम को ,भारत के पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी सोनिया जी को इतने समर्पण और त्याग के बावजूद अपना नहीं मानते।उनके बच्चों से नफ़रत करते हैं।इस रंग भेद, नैन नक्श भेद  के विरोध का हल भला कैसे हो सकता है। यही हालत बने रहे तो देश लघु हो सकता है। अनेकता में एकता के कारण रंग-बिरंगे इस देश को बदरंग किया जा रहा है।

भले ही वे चाऊमीन, मोमोज ,बिरयानी शौक से खाते हों पर चीनी, तिब्बती, मंगोलियन और गोरी चमड़ी उन्हें नहीं भाती। मुसलमान तो उनके पहले शत्रु हैं  जिनको देश से हटाने वे संकल्प  बद्ध हैं ,कैसे पसंद कर सकते हैं जो सनातनी धर्म के नशे पर सवार हैं।जब तक इनके आका डोनाल्ड ट्रम्प के गुलाम थे ईसाई समाज सुरक्षित था अब दुनिया को दिखाने चर्च में प्रार्थना करते हैं लेकिन अंदर खाने जो जो हुआ है वह सबके सामने है।

इन नशेबाजों को ये नहीं पता कि भारत एक विशाल देश है जिसमें विभिन्न प्रजातियों से मिलकर बने लोग बहुतायत से हैं मूल निवासी तो आदिवासी हैं जिन्हें तथाकथित सभ्य जातियों ने जंगलों ओर पहाड़ों की कंदराओं में धकेल दिया।चकमा भारत का मूल निवासी था वह अपने भारत देश में पढ़ने उत्तराखंड के देहरादून आया था। उसके साथ किया व्यवहार संविधान के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। दोषियों को सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए।

अब आइए ये जानने की कोशिश करें कि देश में घृणा का प्रस्फुटन कहां से हो रहा है तो जान लीजिएगा कि संघ से पालित हज़ारों बाबाओं और नेताओं द्वारा संघ को खुश रखने ये सब हो रहा है। लेकिन यह समझ लीजिए यह हिंदुस्तान है जिसकी तासीर में मोहब्बत है, भाईचारा है सब धर्मों और धर्मावलंबियों का सम्मान है। अल्लामा इक़बाल ने इसी तासीर को बखूबी समझा था इस लिए वह कह पाए सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा है। अंतिम पैरा में वे इस तासीर की बात गर्व से करते हैं -यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहाँ से।अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशाँ हमारा॥ सारे…कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी।
सदियों रहा है दौरे दुश्मन जहां हमारा।

यक़ीनन आज भी यह बात भारतीय लहू में मौजूद है।आज देश के अंदर से खंजर अपनों पर चलाएं जा रहे हैं।

यदि यह ज़ुल्म बंद नहीं हुआ तो देश बर्बाद हो जाएगा।देश में एक जैसी शक्ल नहीं हो सकती हमारा देश कई प्रजातियों के संगम से बना विशालकाय देश है।इसे समझना हर भारतीय का दायित्व है।एक चकमा के जाने पूर्वांचल के राज्य दुखित हैं। मणिपुर हादसों को मणिपुर वासी शायद ही भूले हों। पीएम के ठीक पीछे बैठने वाले केंद्रीय मंत्री किरन रिजूजू पहली बार गुस्से में दिखे। यदि इनकी सुरक्षा और पहचान ख़तरे में रहती हैं तो देश के बड़ा हिस्सा कब विलग हो जाए कहना मुश्किल है।

उम्मीद है सरकार उन कथित  हिंदू वादी अपराधियों पर रहम नहीं करेगी। जिन्होंने देश के एक तेजस्वी युवा को अकारण मारा है।सुको को भी इस नाजुक डरावनी मौत का संज्ञान लेने की ज़रुरत है।

Ramswaroop Mantri

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