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 जो  बेचैन है  उजालों  की  रुखसती  के लिए

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सरल कुमार वर्मा

: जो बेचैन है उजालों की रुखसती के लिए
आओ चिराग जलाए उनकी रोशनी के लिए

जिनकी शोहरत है जमाने में तीरगी के लिए
वो खिड़की भी न खुलने देंगे रोशनी के लिए

हिकारत इतनी भी ठीक नहीं किसी के लिए
कुछ गैर भी जरूरी है दुआ बंदगी के लिए

इंसान ही काम आते हैं हर किसी के लिए
आसमा से कोई न आयेगा जमीं के लिए

बहुत मशहूर हुए जो शहर में रहजनी के लिए
आजकल बेताब है वो लोग रहबरी के लिए

आए यू ही नहीं हम सच को सच कहने “सरल”
हिम्मत जरूरी है झूठ की खुदकुशी के लिए
सरल कुमार वर्मा
उन्नाव,यूपी
9695164945

Ramswaroop Mantri

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