इंदौर
“मैं रविवार शाम को गेहूं की ट्रॉली लेकर लक्ष्मी बाई नगर कृषि उपज मंडी आया था, ताकि सोमवार सुबह नीलामी में जल्दी नंबर आ जाए और दोपहर तक माल बेचकर पैसे लूं और वापस घर पहुंच जाऊं। सुबह जब नीलामी शुरू हुई तो मेरे से पहले जिस किसान की ट्रॉली लगी थी, उसका गेहूं 1910 रुपए प्रति क्विंटल में व्यापारियों ने खरीदा। मेरा नंबर आया तो 1888 रुपए क्विंटल का भाव दिया।
किसानों को समर्थन मूल्य के आसपास भी मंडी में भाव नहीं मिल रहा है। मैंने कम भाव मिलने पर नीलामी का विरोध कर दिया। अन्य किसानों ने भी साथ दिया और नीलामी बंद हो गई। बाद में जब दोबारा नीलामी शुरू हुई तो मुझे 1800 रुपए प्रति क्विंटल का ही भाव दिया। इतने कम में कैसे माल बेच सकता हूं। अब मंडी में ही रात गुजारना पड़ेगी। मंगलवार सुबह फिर से नीलामी में गेहूं की ट्राली लगाऊंगा, तीसरी बार में जो भी भाव मिलेगा उसी पर बेचना पड़ेगा।”
ये दर्द है देपालपुर तहसील के ग्राम बेगंदा निवासी किसान लाखन परमार का। सोमवार को लक्ष्मी बाई कृषि उपज मंडी में गेहूं की बिक्री कम दाम में होने पर उन्होंने विरोध दर्ज कराया तो अन्य किसान भी उनके समर्थन में खड़े हो गए और नीलामी बंद हो गई। किसानों ने दोपहर में लक्ष्मीबाई अनाज मंडी से कुछ दूरी पर एमआर-5 रिंग रोड पर दो घंटे तक जाम लगा दिया।

देपालपुर तहसील के ग्राम बेगंदा निवासी किसान लाखन परमार।
अन्नदाता मंडी में उपज के कम दाम मिलने से नाराज हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 12 दिन में तीसरी बार किसान अपने हक के पैसे के लिए सड़कों पर उतरे। इससे पहले 28 मार्च और फिर 4 अप्रैल को भी किसान सड़कों पर आ चुके हैं।
तीनों बार अधिकारी किसानों को मनाने में कामयाब रहे। अधिकारियों की समझाइश के बाद सोमवार को फिर से दोपहर 2 बजे दोबारा नीलामी शुरू हुई। विरोध-प्रदर्शन का असर हुआ और कुछ किसानों को समर्थन मूल्य से अधिक भाव मिला लेकिन किसान लाखन को विरोध जताना और भी महंगा पड़ गया। पहले उसका गेहूं नीलामी में व्यापारियों ने 1888 रुपए प्रति क्विंटल के भाव लगाए।
लेकिन दूसरी बार में 88 रुपए और कम करते हए 1800 रुपए प्रति क्विंटल का ही भाव लगाया। करीब 50 बोरी गेहूं वो बेचने आया था। लाखन का कहना है कि “मैंने तो सभी के लिए आवाज उठाई थी। व्यापारी और अधिकारी सभी की मिलीभगत है। दाम और कम कर दिए। मजबूरी है इसलिए मंडी में आना पड़ता है। रुपयों की भी जरुरत है। बैंक का लोन जमा करना है।”

लक्ष्मीबाई नगर कृषि उपज मंडी।
अब ये जान लीजिए सरकारी खरीद में किसानों को क्या समस्या
सरकार इस साल 2125 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद रही है। उसका पेमेंट 8 से 10 दिन में भी नहीं हो पा रहा है, इतना ही नहीं पेमेंट कब तक आएगा ये भी किसानों को नहीं पता है। जबकि 3 से 7 दिन में किसानों को पेमेंट मिल जाना चाहिए। कई ऐसे किसान हैं जिन्होंने कर्ज ले रखा है या अस्पताल, शादी जैसे जरूरी काम के लिए तत्काल में नकद पेमेंट की जरूरत है।
व्यापारी उपज खरीदकर नकद पेमेंट दे रहे हैं। इसी कारण से किसान समर्थन मूल्य की बजाय खुले बाजार में व्यापारियों को माल बेच रहे हैं, लेकिन यहां गेहूं का भाव 1700 से 1800 रुपए क्विंटल ही मिल रहा है, यह समर्थन मूल्य से 300 रुपए कम है। इसी कारण नाराज किसान बार-बार प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ किसानों को जरूर मंडी में भी अच्छे भाव मिले हैं, लेकिन ज्यादातर खरीदी समर्थन मूल्य से नीचे ही हो रही है।
ये बोले किसान….

बोरिया गांव के निवासी किसान सतीश मकवाना।
पैसों की जरुरत थी इसलिए मंडी में गेहूं बेचने आया
मंडी में गेहूं बेचने आए बोरिया गांव के निवासी किसान सतीश मकवाना ने बताया कि अलग-अलग दाम में मंडी में गेहूं खरीदा गया लेकिन 1900 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव में गेहूं की खरीदी सोमवार सुबह हुई। हमारी मांग यही है कि समर्थन मूल्य में खरीदी की जाए। विरोध-प्रदर्शन के बाद दोबारा शुरू हुई नीलामी में ठीक भाव मिला। 2131 रुपए प्रति क्विंटल पर मैंने गेहूं बेचा। सरकारी खरीदी में सबसे बड़ी समस्या ये है कि समय पर पैसा नहीं मिल रहा है।
31 मार्च को जिस किसान का गेहूं बिक्री का बिल बनाया हुआ है, उसे अभी तक पेमेंट नहीं मिला है, जबकि बिल खरीदी के दो-तीन दिन बाद बना है। किसानों को पैसों की जरुरत रहती है, किसी को उधारी चुकानी है या अन्य काम है इसलिए 100-50 रुपए कम रेट पर किसान मंडी में अपना माल बेचता है। मुझे भी पैसों की जरुरत थी इसलिए माले बेचने मंडी आया।

किसान राहुल चौहान।
कभी गेहूं की क्वालिटी खराब बता देते हैं या कह देते हैं गीला है
किसान राहुल चौहान ने बताया कि “पैसों की दिक्कत की वजह से सरकारी खरीद में गेहूं नहीं बेचा। मंडी लेकर आया था। 1850 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से गेहूं की खरीदी की गई। व्यापारी किसान की उपज में ही कमी निकाल देते हैं। माल अच्छी क्वालिटी का नहीं है या कह देते हैं कि गीला है। व्यापारियों की नजर में अच्छा गेहूं भी 2 हजार रुपए प्रति क्विंटल ही किसानों से खरीदा गया। पैसों की जरुरत रहती है तो हम माल बेच देते हैं। कम से कम सरकारी खरीद का भाव तो मिलना ही चाहिए।”

किसान अनिल परमार।
मंडी में 1800 रुपए क्विंटल में बेचा गेहूं
किसान अनिल परमार ने बताया कि सरकारी खरीद में भीड़ बहुत ज्यादा रहती है। पेमेंट लेट मिलता है। पैसों की जरुरत होने की वजह से मंडी में गेहूं बेचने के लिए लेकर आए। 1800 रुपए प्रति क्विंटल के भाव में मंडी में गेहूं बिका है। हमारी मांग है कि समर्थन मूल्य के आसपास मंडी में भी गेहूं की खरीदी होनी चाहिए।
ये बोले अफसर

लक्ष्मीबाई अनाज मंडी के सचिव नरेश परमार।
क्वालिटी के हिसाब से गेहूं की खरीदी
लक्ष्मीबाई अनाज मंडी के सचिव नरेश परमार ने बताया कि मंडी में क्वालिटी के हिसाब से गेहूं की खरीदी हो रही है। मेरे सामने 2651, 2350 रुपए क्विंटल में भी गेहूं की खरीदी की गई। कुछ गेहूं में नमी या अन्य इश्यू हो सकता है। मंडी में समर्थन मूल्य से कम और अधिक दोनों में खरीदी हो रही है। अच्छी क्वालिटी का गेहूं किसान अगर सोसायटी में बेचने जाता है तो उसे कम दाम मिलते हैं। हमारे यहां 2900 रुपए प्रति क्विंटल में भी गेहूं खरीदा गया है। जिन किसानों का सोसायटी लायक माल नहीं है, उनका माल नियमानुसार मंडी में बिक रहा है। समर्थन मूल्य से नीचे नीलामी होने पर किसानों की सहमति के बिना हम अनुबंध जारी नहीं करते हैं। किसान मंडी में रूकना चाहते हैं तो यहां रेस्ट हाउस भी है।





