अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

भोपाल, इंदौर और जबलपुर शहर के मास्टर प्लान की अवधि हुई समाप्त

Share

वक्फ संपत्तियों पर मसूद-सारंग आमने-सामने

मध्य प्रदेश में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के बाद वक्फ संपत्तियों को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिन जमीनों को सरकारी बताया जा रहा है, वै वास्तव में दान की गई वक्फ संपत्तियां हैं, जिन पर राजस्व विभाग ने कब्जा कर रखा है।

मसूद ने स्पष्ट कहा कि वक्फ की जमीन सरकारी नहीं होती, बल्कि समाजसेवा और जरूरतमंदों की सहायता के उद्देश्य से दान में दी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संपत्तियों के रिकॉर्ड और प्रबंधन में भारी गड़बडिय़ां हैं। उनके मुताबिक सरकार को पहले पर्याप्त यह स्पष्ट करना चाहिए कि वक्फ संपत्तियों की वास्तविक स्थिति क्या है और राजस्व अभिलेखों में उन्हें किस आधार पर दर्ज किया गया है। वहीं सरकार की ओर से मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा विधानसभ में चर्चा के लिए पर्या समय दिया गया था और कार्य मंत्रणा समिति की बैठकों में नेता प्रतिपक्ष भी मौजूद थे।

उमंग ने की लोकायुक्त, कैग रिपोर्ट पर चर्चा की मांग
मध्यप्रदेश विधानसभा में लोकायुक्त और नियंत्रक महालेखा परीक्षक कैग की रिपोर्टों को लेकर सियासत तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र सौंपकर लोकायुक्त तथा कैग के प्रतिवेदनों पर सदन में चर्चा कराए जाने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि लोकायुक्त और कैग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदनों पर अब तक विधानसभा में विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि ये प्रतिवेदन शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और संभावित अनियमितताओं से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं, जिन पर सदन में विचार-विमर्श आवश्यक है। उमंग सिंघार ने पत्र में आग्रह किया है कि जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही की दृष्टि से इन रिपोर्टों को चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

भोपाल, इंदौर और जबलपुर शहर के मास्टर प्लान की अवधि हुई समाप्त
मप्र में भोपाल, इंदौर और जबलपुर समाप्त हो चुकी है, जबकि ग्वालिय -उज्जैन के मास्टर प्लान की अवधि साल 2035 तक है। सरकार ने ये शहरों के मास्टर प्लान की अवधि भी कहा कि शहरों के मास्टर प्लान बन रहे हैं, वो कब तक बनकर तैयार होंगे, ये समय सीमा बताना संभव नहीं है। सदन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रश्न किया था कि मप्र के भोपाल इंदौर जैसे बड़े शहरों के मास्टर प्लान कब स्वीकृत हुए थे और किन शहरों के मास्टर प्लान समाप्त हो चुके हैं। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने समापन भाषण में होली, रंगपंचमी, गुड़ी पड़वा, ईद उल फितर, राम नवमी और महावीर जयंती की शुभकामनाएं दीं।

गायों की होगी पहचान, जीपीएस से गौशालाओं में लगेगी अटेंडेंस
पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने कहा है कि प्रदेश में पालतू गाय और बेसहारा पायों की अलग-अलग पहचान के लिए अलग-अलग रंग के टैग लगाए जाएंगे। इस संबंध में केंद्र सरकार से मजूरी मिल गई है। अभी गायों की पहचान के लिए उनके कान पर पीले रंग के टैग लगाए जाते हैं। लेकिन अब यह टैग सिर्फ पालतू गायों को लगेंगे। बेसहारा के लिए अलग रंग के टैग लगाने की तैयारी है। इन टैग में एक जीपीएस चिप भी होगी, जिससे गौशालाओं में गायों की अटेंडेंस लग सकेगी। गौशालाओं में फर्जी आंकड़े दिखाकर लाभ नहीं लिया जा सकेगा। विधानसभा में शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधानसभा की समितियां का निर्विरोध निर्वाचन हो गया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने समितियों के अध्यक्ष और सदस्यों के नामों की घोषणा की।

Ramswaroop Mantri

Add comment

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें