-सुसंस्कृति परिहार
सन् 2014 में आई वर्तमान भाजपा सरकार ने एक काम बहुत मुस्तैदी से किया है वह है पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई और बेहतरीन तरीके से काम कर रही योजनाओं के नाम बदलकर उन पर अपनी छाप अंकित करने वाली ऐसी बीस पच्चीस योजनाओं को पिछले दिनों कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया ने प्रेस कांफ्रेंस में उल्लेखित किया।तब जाके यह महसूस हुआ कि वास्तव में सरकार ने कोई नई देश हितैषी योजना बनाई ही नहीं। पुरानी योजनाओं को नवीन नाम देकर ऐसा ढोल पीटा कि सब देखते ही रह गए। इनके खूब विज्ञापन मीडिया संस्थानों को मिले जिनने बिना पड़ताल किए सारा श्रेय सरकार के मत्थे मढ़ दिया। इनमें कई योजनाओं जिनमें नेहरू, इंदिरा गांधी के नाम थे उन्हें हटा कर जग जीत लिया।
इसकी शिकार लंबे अर्से ने मनरेगा रही है जिससे ग्रामीणों को कम से कम सौ दिनों का रोजगार मिलने की गारंटी थी। इससे पहले महात्मा गांधी का नाम हटाकर सिर्फ नरेगा किया गया। इससे भी चैन नहीं पड़ता तो कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी एक नया नाम लेकर उपस्थित हुए हैं जिसमें महात्मा गांधी के नाम को पूरी तरह हटाकर अंग्रेज़ी शब्दों में वीसी जी राम जी नाम देने का प्रस्ताव सदन में लाया गया है।इसे पूज्य बापू नाम से बनाने वाले पबरेगा का शोर हुआ। लोगों ने हल्ला बोला पूज्य बापू से गांधी नहीं सिद्ध होता इससे तो आसाराम बापू,मोरारी बापू की ध्वनि सुनाई देती है।अब शिवराज ने इसे राम नाम में समेटने की कोशिश की है ताकि जनसमर्थन भी मिले ।संभावना है,इसे सहमति उनके सांसद दे ही देंगे। लेकिन इस बार विपक्ष तगड़ा विरोध जताने के मूड में है। जो बेहद जरूरी है। नेहरू परिवार से पहले ही अनेकों योजनाओं के नाम बदल दिए गए।अब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी नहीं बख्शा गया है।ये देश का अपमान है। लोकसभा में विपक्ष द्वारा जारी हंगामे के बीच आज लोकसभा से ‘विकसित भारत जी राम जी’ और पुराने कानूनों को निरस्त करने वाला बिल मंजूर हो ही जाएगा इसमें कोई शकोसुबह की गुंजाइश नही है।
लेकिन मनरेगा का नया नाम ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ में महात्मा गांधी का नाम हटाकर राष्ट्रपिता का ना केवल उपहास किया जा रहा है बल्कि उनके विचारों की हत्या की जा रही है।बहुमत का यह दुरुपयोग जनमत की घोर अवज्ञा है।इसे देश दुनिया याद रखेगी।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह द्वारा कहा जा रहा है कि नए वी बी जी राम जी कानून के तहत 125 दिनों के रोजगार की गारंटी होगी।एम आई तकनीक से इस व्यवस्था की मानीटरिंग होगी तथा राज्यों को अब योजना के तहत 40 फीसदी राशि देनी होगी।जिसका विरोध राज्य करेंगे क्योंकि समूचे राज्य खासतौर पर भाजपा शासित राज्य क़र्ज़ ले लेकर राज्यों की व्यवस्था चला रहे हैं। भारत सरकार भी आकंठ क़र्ज़ में डूबीं हुई है तब पेमेंट को समय पर करने और मानीटरिंग की बात बेमानी लगती है।लगता है, राम भरोसे इस योजना का हश्र अच्छा नहीं होगा कभी भी यह बंद हो जाएगी इसकी गारंटी जरूर है।
सोचिए,अगर इतनी ही शुभेच्छा सरकार की होती तो गांधी का नाम हटाए बिना इसमें सुधार कर सकती थी। किंतु यह तो गांधी के हत्यारों की एक कुचाल है जो आगे बहुत भारी पड़ेगी। कुल मिलाकर यह ग्रामीण बेरोजगारों को खुश करने का एक शिगूफा ही साबित होगा।
इस नाम बदलो अभियान के तहत पिछले दिनों पीएम आफिस को सेवा तीर्थ घोषित करने पर एक शंकराचार्य महोदय ने भी आपत्ति दर्ज़ कराई है।जिस पर आम लोगों की सहमति नज़र आ रही है।ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कहना है कि सेवा तीर्थ हमारा धार्मिक शब्द है, उससे खिलवाड़ का अधिकार देश के किसी भी नेता को नहीं है। प्रधानमंत्री कार्यालय में षड्यंत्र होता है। उसे कैसे सेवातीर्थ जैसा पवित्र तीर्थ कह सकते हैं। जरूरत पड़ी तो हम कोर्ट भी जाएंगे। जब उनसे पूछा गया कि प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवातीर्थ नाम देने से आखिर इतनी नाराजगी क्यों है?. तो इस स्वाल के जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ये नोटिफिकेशन निकाले, ये गजट निकाले कि उनमें ये शक्ति आ गई है कि पीएम ऑफिस में जो आकर यहां नहाएगा उसके पाप धुल जाएंगे. पापमोचनी शक्ति नहीं है तो तीर्थ कैसे हो जाओगे? प्रधानमंत्री कार्यालय के बदले नाम से तीर्थ शब्द हटना चाहिए।
शास्त्रों में तीर्थ का मतलब ये बताया गया है कि जहां के पानी में नहाने से पाप धुल जाते हैं, बताइए प्रधानमंत्री कार्यालय में आखिर कौन सा पानी है जिसमें नहाने से पाप धुल जाएंगे. सेवा तीर्थ पवित्र शब्द है. कार्यालय में हिंदू भी जाएगा, मुस्लिम भी जाएगा। वहां जूता पहनकर भी लोग जाएंगे। उनमें से बहुत से मांसाहारी भी होंगे, जो घर से टिफिन पैक कराकर नॉनवेज भी लेकर जाएंगे ये तीर्थ शब्द का मजाक है।उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री को इस बारे में पत्र लिख दिया है। अगर आवश्यकता पड़ी तो न्यायालय भी जाएंगे। जनता के बीच भी जाएंगे। चुप रह जाने से फिर और भी बात बढ़ेगी। जिस तरह की ये चेष्टा की गई है ये धर्म को क्षति पहुंचाने वाली है।
बहरहाल ,यह सब पिछली सरकारों के काम पर पर्दा डालने के साथ देश के महापुरुषों को भुलाने की कवायद है।ये सच कभी ख़त्म नहीं हो सकता।वैसे ही जैसे कई ऐतिहासिक नगरों के नाम बदले जाने के बावजूद वे आज भी लोगों की जुबान पर हैं उनका ऐतिहासिक नाम कभी मिट नहीं सकता। अच्छा है,पहली बार समवेत स्वर इसके विरोध में उभर कर सामने आया है।





