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खुद बैंगन खाकर दूसरों को न खाने की सीख देने वाली कहावत राजस्थान के स्कूली शिक्षा विभाग पर चरितार्थ हो रही है

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एस पी मित्तल, अजमेर
गुरुजी खुद तो बैंगन खाए लेकिन दूसरों को न खाने की सीख दें यह कहावत राजस्थान के स्कूली शिक्षा विभाग पर चरितार्थ हो रही है। शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर में पांचवीं और आठवीं बोर्ड की परीक्षा करवाने के लिए आवेदन मांगे हैं। आवेदन की अंतिम तिथि पांच मार्च रखी गई है। इस तिथि को अब तक दो बार बढ़ाया जा चुका है। असल में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी कक्षाओं में जाकर परीक्षा देने के इच्छुक नहीं है, लेकिन शिक्षा विभाग चाहता है कि बच्चे कक्षाओं में आकर ही लिखित परीक्षा दें।  शिक्षा विभाग यह कार्य तब कर रहा है,जब पिछले दिनों ही प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने निजी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वार्षिक परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों की व्यवस्था की जाए। सवाल उठता है कि जब शिक्षा मंत्री निजी स्कूलों से ऑनलाइन परीक्षा की उम्मीद करते हैं तब सरकारी स्कूलों में पांचवीं और आठवीं बोर्ड की परीक्षाएं ऑफलाइन की क्यों करवाई जा रही है? जाहिर है कि शिक्षा विभाग की कथनी और करनी में अंतर है। शिक्षा विभाग द्वारा पांचवीं और आठवीं बोर्ड की परीक्षा ऑफलाइन करवाने के निर्णय से अब निजी स्कूलों पर भी ऑनलाइन परीक्षा करवाने का कोई दबाव नहीं रहेगा। निजी स्कूल संचालक कह सकते हैं कि जब सरकारी स्कूलों में ऑफ लाइन परीक्षा हो रही है तो फिर उन्हें ऑनलाइन परीक्षा के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। गंभीर बात तो यह है कि कोरोना की वजह से वर्ष भर में मात्र साठ दिन कक्षाएं लगी है। यानी स्कूलों में मात्र साठ दिन ऑफलाइन पढ़ाई हुई है। सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई किस प्रकार से हुई है, इसकी हकीकत सब जानते हैं। निजी स्कूलों के बच्चे तो जैसे तैसे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन सरकारी स्कूलों के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई करने में भी असमर्थ थे। लेकिन इसके बावजूद भी शिक्षा विभाग चाहता है कि पांचवीं और आठवीं के विद्यार्थी स्कूल में आकर वार्षिक परीक्षा दें। यहां यह उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग ने इन दोनों बोर्ड की परीक्षाएं मार्च और अप्रैल माह में करवाने का प्रस्ताव कर रखा है। हालांकि इन दिनों राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा दसवीं और बारहवीं की वार्षिक परीक्षाएं भी ली जाएंगी, लेकिन इन परीक्षाओं के बीच में जो गैप होगा, उसमें पांचवीं और आठवीं बोर्ड की परीक्षाएं प्रस्तावित है। एक अनुमान के अनुसार प्रदेश भर में करीब 15 लाख विद्यार्थी पांचवीं और आठवीं कक्षा के हैं। यानी ऑफलाइन परीक्षा होती है तो प्रदेश के 15 लाख परिवार प्रभावित होंगे। राजस्थान शिक्षक संघ (राधाकृष्णन) के प्रदेश अध्यक्ष विजय सोनी ने भी सरकार द्वारा ऑफलाइन परीक्षा के निर्णय का विरोध किया है। सोनी ने कहा है कि विद्यार्थियों को ऑनलाइन का भी विकल्प मिलना चाहिए।

Ramswaroop Mantri

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