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इस धरती के वास्तविक भगवान मजदूर-किसान और कामगार ही हैं

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-निर्मल कुमार शर्मा

‘आरती लिए तू किसे ढूँढ़ता है मूरख, मन्दिरों, राजप्रासादों में, तहखानों में ?
देवता कहीं सड़कों पर गिट्टी तोड़ रहे, देवता मिलेंगे खेतों में, खलिहानों में ! ‘

           मनुष्य जीवन की यह यथार्थवादी कविता राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर 'की लिखी हुई है। यह कटुसच्चाई,वास्तविकता और बिल्कुल सत्य है यह है कि वास्तविक ईश्वर इस दुनिया के किसान,मजदूर,कामगार और वे  सभी तकनीशियन,इंजीनियर,डॉक्टर,वैज्ञानिक आदि ही हैं,जो अपने श्रम से,मेहनत से,बुद्धि और विवेक से इस दुनिया में समस्त मानव,पशु-पक्षी इसके जैवमण्डल की अनवरत सेवा करते हैं,उनकी भूख मिटाने को अन्न उगाते हैं,उनको स्वस्थ्य रखने के लिए दवाइयों का अविष्कार करते है,उनके शरीर ढकने के लिए वस्त्र तैयार करते हैं,आम जनता को शिक्षा के लिए,व्यापार करने के लिए,नौकरी करने के लिए,दूरस्थ स्थानों को जाने के लिए विभिन्न यातायात के साधन यथा टैक्सी,बसें,रेलगाड़ियां, विशालकाय पानी की जहाज व द्रुतगामी हवाई जहाज बनाए हैं,जिसके फलस्वरूप पत्थरयुगीन असभ्य मानव आज सुख-साधनों से भरपूर अत्यंत सुखमय जीवन जीने की हसरत पूरी कर पा रहा है,उक्तवर्णित सभी सेवा क्षेत्र में लगे लोगों के परिश्रम से ही समस्त मानवीय सभ्यताओं के लोगों के जीवन में सुख,समृद्धि शुकून की आशातीत अभिवृद्धि हुई है । दूसरे शब्दों में इस धरती के वास्तविक भगवान उक्तवर्णित श्रमजीवी,बुद्धिजीवी लोग ही हैं। कथित ईश्वर की परिकल्पना और अविष्कार कुछ धूर्त परजीवियों,धर्म के ठेकेदारों ने अपने स्वार्थ व शासन करने के लिए आम जनता को धर्म के पाखंडों,अंधविश्वास के मकडज़ाल में फँसाकर आम जनता के अनवरत व अकथनीय शोषण के लिए किया है। यह भी कटुसच्चाई है कि इन कथित धर्मों ने इस दुनिया को जितना कष्ट, दुःख और मानवीय त्रासदी दिया है,उतना वास्तविक युद्धों ने भी नहीं दिया है !
           इस देश के कथित प्रधानजनसेवक जी पिछले दिनों उसी केदारनाथ मंदिर गये थे,जहाँ 16 जून 2013 को मनुष्यकृत पहाड़ों से छेड़छाड़ के प्रतिशोध में प्रकृति ने भीषणतम् तांडव मचाकर 6000 से ज्यादे केदारनाथ गये तीर्थयात्रियों की अचानक प्राण हर लिए थे,वैसे वास्तविक कालकलवित तीर्थयात्रियों की संख्या इससे कहीं बहुत ज्यादे होने की संभावना है ! प्रधानजनसेवक जी ने वहाँ जाकर फर्माया कि 'केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर विश्वास का साकार होना ही मेरे लिए सबसे बड़ा संतोष है। पुनर्निर्माण का श्रेय किसी और को नहीं बल्कि ईश्वर की कृपा को है। मजदूर भाई-बहनों ने बर्फबारी व विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भी निर्माण कार्यों को जारी रखा,जो अपने आप में विषेश बात है। '
            प्रधानजनसेवक जी ! इस लेख की शुरूआत में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर ' की लिखी पक्तियों पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ,जिसमें उन्होंने स्पष्टता और दृढ़ता से लिखा है कि - 
  'आरती लिए तू किसे ढूँढ़ता है मूरख, मन्दिरों, राजप्रासादों में, तहखानों में ?

देवता कहीं सड़कों पर गिट्टी तोड़ रहे, देवता मिलेंगे खेतों में, खलिहानों में ! ‘
इस धरती के भगवान इस धरती के अन्नदाता और मजदूर तथा कामगार ही हैं,जो दिल्ली की सीमा पर पिछले 1 वर्ष से आपकी देहरी पर बैठें हैं। आप केदारनाथ के मंदिर के पुनर्निमाण में कथित भगवान की कृपा का व्यर्थ में और अपने स्वार्थ के लिए यशोगान कर रहे हैं,आप इस बात को खूब ठीक से जानते है कि वहाँ के मंदिर के पुनर्निर्माण में,वहाँ के भीषणतम् मौसम में लगातार अपने श्रम से निर्माण कर रहे मजदूरों और इंजीनीयरों कि वास्तविक योगदान का है ! इसलिए श्रीमान् प्रधानजनसेवक जी केवल अपने सत्ता की अक्ष्क्षुणता और विलासिता के लिए इस देश की अधिकांश आबादी की धार्मिक अंधश्रद्धा का दोहन न करें। इस देश में अनाचार,भ्रष्टाचार, व्यभिचार,ब्लात्कार,रिश्वतखोरी,बेरोजगारी, अशिक्षा,गरीबी,भूखमरी आदि मानवीय त्रासदी अपने चरम पर है,जिसका सीधा संबध आपकी राजनैतिक कुव्यवस्था से है ! इसी देश के विद्वानों और दार्शनिकों के अनुसार ‘नर सेवा ही नारायण यानी ईश्वर सेवा है ‘ इसलिए मनुष्य द्वारा काल्पनिक रूप से बनाए गए भगवान की आरती उतारकर इस देश की आवाम को मूर्ख मत बनाइए,इस देश के वास्तविक भगवानों यथा इस देश की संपूर्ण आवाम,मजदूर और किसान तथा कामगार हैं,जो आपके अडानी,अंबानी जैसे कुछ पूँजीपतियारों की बेशर्म पक्षपाती रवैये और नीतियों से अत्यंत निराश,परेशान और दुःखी हैं।
अब्राहम लिंकन ने कहा है कि ‘दुनिया और देश को लम्बे समय तक मूर्ख नहीं बनाया जा सकता,लेकिन धर्म एक ऐसा क्षेत्र है,जहाँ लोग पीढ़ी दर पीढ़ी मूर्ख बने रहते हैं ‘ उदाहरणार्थ हम इसे ऐसे समझ सकते हैं मान लीजिए एक बेरोजगार से त्रस्त भूखा आदमी अपनी भूख से व्याकुल है,उसे समझा दिया जाय कि तुम्हारी बदहाली का कारण तुम्हारे देश के कर्णधारों की कुनीतियों का नतीजा है,क्योंकि वे अपने कुछ चंद पूँजीपतियारों के लाभ के लिए ऐसी नीतियों को क्रिर्यान्वित कर रहे है,जिससे तुम गरीबी के दलदल में और गहरे धसते जा रहे हो और वह अपने मित्र पूँजीपतियों की पूँजी पिछले 7 साल में ही दोगुनी बढ़ाने में मददगार रहा है,इस पर वह और उसके जैसे करोड़ों युवा मरने मारने को उद्यत हो जाएंगे,पूरे देश में बवाल हो जाएगा,आंदोलन उठ खड़े हो जाएगें,जिससे किसी भी सत्ताधारी दल की सरकार का तख्ता पलट जाने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा,इसलिए पूरे देश के धर्म के ठेकेदार मंदिरों-मस्जिदों और चर्चों के पंडे,मौलवी और पादरी किसी भी भूख से मरते भूखे बेरोजगार युवा को बचपन से ही उसके दिमाग में ये घुट्टी पिलाते रहें हों कि तुम्हारी वर्तमान समय की बदहाली का कारण केवल तुम्हारे पिछले जन्म में किए कर्मों का फल है,यही तुम्हारे भाग्य में है ! तो वह इस तथाकथित धार्मिक आख्यान से भूखों मरते हुए युवा भी संतुष्ट होकर चुप हो जाएगा !
तथाकथित धर्म हमेशा सत्ता या राजा के पक्ष में बोलते हैं ! यूरोप में वहाँ के ईसाई धर्म के ठेकेदार पोप सदियों से लोगों को यह कहकर भ्रमित करते रहे हैं कि राजा को जनता पर शासन करने के लिए ही गॉड ने उसे भेजा है ! इस बात का पहली बार पुरजोर विरोध यूरोप और इस दुनिया के सुप्रसिद्ध दार्शनिक और लेखक ज्यां जाक रूसो ने किया था,उन्होंने बहुत स्पष्टता से कहा कि गरीबी कर्मों का फल कतई नहीं है,न किसी राजा को कोई गॉड या भगवान ने जनता पर जुल्म और शासन करने के लिए भेजा है,ऐसा कुछ भी नहीं है,यह एक धार्मिक दुष्प्रचार मात्र है । वहाँ के लोगों को रूसो की यह बात समझ में आ गई,उसके बाद यूरोप में पुनर्जागरण काल आया।इसी परिष्कृत और मानवीय विचारधारा के फलस्वरूप फ्रांस में जनक्रांति हुई,वहाँ के व्यभिचारी व क्रूर तथा जनता के शोषक राजा को मृत्यु दंड देकर उसकी सत्ता छीन ली गई। फ्रांस की इस क्रांति से प्रेरणा लेकर महान सोवियत अक्टूबर क्रांति हुई।
भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे घोर मनुष्यताविरोधी कलुषित विचारधारा के वंशज बीजेपी जैसे दलों के घोर दक्षिण पंथी भारतीय कर्णधार इसीलिए समानता,समदर्शी, वैज्ञानिक आधुनिक भारतीय संविधान की जगह कुटिल व धूर्त मनु द्वारा रचित हिन्दू धर्म आधारित भाग्यवाद,जातिवादी रूढ़िताग्रस्त, भारतीय समाज पर जातिवाद थोपनेवाले जातिवादी वैमनस्यता,ऊंच-नीच व अश्यपृश्यता जैसे अमानवीय अवधारणा को समेटे मनुस्मृति को इस देश में लागू करके इस देश को पुनः 10 हजार साल पीछे पत्थरयुगीन काल में ले जाना चाहते हैं,इसी बात के लिए वे इस देश को अशिक्षित रखने के लिए साजिश के तहत शिक्षा के बजट में आश्चर्यजनक रूप से कटौती करके, सरकारी स्कूलों की घोर उपेक्षा करके,फीस की बेतहाशा वृद्धि करके,इस देश की अधिकांश गरीब जनता की संतानों को अशिक्षित, धर्मभीरु,पाखंडी,भाग्यवादी,स्वर्ग-नरक,पुनर्जन्म, मोक्ष,दान-पुण्य आदि में विश्वास करनेवाला बनाकर अपने दुःख और तकलीफ को कथित पिछले जन्म के कर्मों का फल समझकर चुप बैठे रहने की कुटिल नीतियों को इस पूरे राष्ट्र राज्य पर जबरन थोपना चाहते हैं,ताकि मोदी और शाह जैसे फॉसिस्ट,क्रूर,अमानवीय,अशिष्ट धूर्त, जुमलेबाज,झूठे,हत्यारे,दंगाई,चरित्रहीन,अशिक्षित कथित धर्म के नाम पर इस संपूर्ण देश की कथित धर्मिक जनता पर अपने अकथनीय अत्याचार और आसानी से भीषण शोषण करते रहें ! इसलिए इस देश के लोगों को यह बात ठीक से समझनी चाहिए कि वर्तमानसमय के मोदी एंड कंपनी सरकार हो या पिछली काँग्रेसी सरकारें हों,ये सभी धर्म के नाम पर भारत की जनता को मूर्ख बनातीं आ रहीं हैं। मनुष्य का असली धर्म सिर्फ मनुष्यता है और उसकी जाति केवल और केवल मनुष्य है।
इसलिए इस देश की जनता को समवेत और संगठित तथा सशक्त आवाज उठानी ही चाहिए कि कथित प्रधानजनसेवक जी अब ये ढोंग और मूर्ख बनाना छोड़िए और जिस प्रधानजनसेवक के पद के लिए आपने इस देश के लोगों से सार्वजनिक मंच पर अपनी झोली फैलाकर सेवा करने के लिए केवल 60 महीने का वक्त मांगा था,इस देश की जनता ने उससे दोगुना 120 महीने का भरपूर समय आपको दे दिया है। अभी भी वक्त है आप इस देश के वास्तविक भगवानों के जीवनस्तर में सुधार का ईमानदारी से करने का प्रयत्न करें,कृपा करके अब ढोंग,प्रपंच, धोखाधड़ी और जुमलेबाजी बन्द करिए ।

-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र,

Ramswaroop Mantri

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