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*अमीरी का असली अर्थ:ये पांच पूंजियां*

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सुंदरचंद ठाकुर

हमारे समय का सबसे बड़ा भ्रम यह है कि अमीरी का अर्थ केवल पैसों से है। जिनके पास करोड़ों हैं, वही लोग अमीर कहे जाते हैं। पर सच यह है कि दुनिया में अनगिनत लोग हैं जिनके बैंक खाते भरे हैं, मगर वे भीतर से खाली हैं। वे धन के ढेर पर बैठे हैं, लेकिन जीवन की सबसे कीमती संपत्ति उनसे छिन चुकी है। सबसे पहली और सबसे अनमोल संपत्ति है – शरीर। अगर शरीर थका हुआ है, अस्वस्थ है, तो सोने की थाली में परोसा भोजन भी विष जैसा लगता है। असली अमीरी यह है कि आपका शरीर हर उम्र में चुस्त और फुर्तीला रहे। यह कोई कल्पना नहीं है। अगर जीवन भर सही आहार, नियमित व्यायाम और अनुशासन बना रहे, तो सौ साल की उम्र में भी आदमी दौड़ सकता है, सीढ़ियां चढ़ सकता है और ताजगी के साथ हंस सकता है। बूढ़ा होना स्वाभाविक है, पर कमजोर होना नियति नहीं – यह हमारी जीवनशैली का परिणाम है। फॉजा सिंह को याद करें, जो सौ की उम्र में भी मैराथन दौड़ रहे थे।

दूसरी संपत्ति है – ज्ञान। धन अगर खो जाए तो फिर से कमाया जा सकता है, पर ज्ञान अगर भीतर है, तो कोई भी परिस्थिति आपको गरीब नहीं बना सकती। ज्ञान ही है जो हर अंधेरे में रास्ता दिखाता है। जिसने पढ़ने, सीखने और समझने की आदत को बनाए रखा, वही असल में अमीर है। किताबें, अनुभव और विचार – ये सब मिलकर मनुष्य को भीतर से समृद्ध बनाते हैं। तीसरी अमीरी है – जीवन का उद्देश्य। बिना उद्देश्य के पैसा बोझ बन जाता है। आदमी लाखों कमाकर भी बेचैन रहता है, क्योंकि उसे पता ही नहीं कि जी क्यों रहा है। उद्देश्य से जुड़ा इंसान हर सुबह एक नई ऊर्जा के साथ उठता है। चाहे उसका बैंक खाता कितना भी छोटा हो, वह भीतर से समृद्ध रहता है।

रिश्ते भी अमीरी का एक स्तंभ हैं। जो व्यक्ति अपने परिवार, मित्रों और समाज से कटकर केवल पैसे बटोरता है, वह अंत में अकेला पड़ जाता है। असली धन यह है कि आपके पास ऐसे लोग हों जिनके साथ आप अपनी खुशी और दुख बांट सकें। जिनकी आँखों में आपको देखकर चमक आ जाए। जिनकी मौजूदगी आपको यह अहसास दिलाए कि जीवन केवल लेने का नहीं, देने का भी नाम है।

और अंत में ईश्वर या परम सत्ता से जुड़ाव। यह जुड़ाव किसी विशेष धर्म या पूजा-पाठ तक सीमित नहीं। यह वह अनुभव है जब मनुष्य यह महसूस करता है कि वह अकेला नहीं, बल्कि एक विराट चेतना का हिस्सा है। जो यह जुड़ाव पा लेता है, वह परिस्थितियों के तूफानों में भी स्थिर रहता है। उसके लिए जीवन शिकायत नहीं, उत्सव बन जाता है।

तो अमीरी का सच्चा अर्थ यह नहीं कि आपके पास कितने घर, कितनी गाड़ियां और कितनी संपत्ति है। अमीरी का असली अर्थ है – एक स्वस्थ और फुर्तीला शरीर, एक जागृत और उत्सुक मन, एक स्पष्ट उद्देश्य, सच्चे रिश्ते, और आत्मा का ईश्वर से संवाद। जिसने यह पा लिया, वही सबसे अमीर है।

यानी धन का मोल सोने-चाँदी से नहीं, उस सुकून से है जो भीतर गूंजता है। असली अमीरी वह है, जब सौ बरस की देह भी फुर्तीली हो, मन ज्ञान से भरा हो, रिश्ते प्रेम से खिले हों और आत्मा परम सत्ता से जुड़ी हो।

Ramswaroop Mantri

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