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डिप्रेशन, एंजाइटी और हाइपरटेंशन में अनिद्रा की भूमिका

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डॉ. प्रिया 

    घर के बड़े बुजुर्ग से लेकर डॉक्टर तक कम से कम 7 से 8 घंटे की उचित नींद लेने की सलाह देते हैं। इस बात को नज़रअंदाज़ करना आपकी संपूर्ण सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

      ऐप्स साइट, ओटीटी, वेब सीरीज, मूवी नाइट, क्लबिंग, लेट नाइट वर्क, आदि ने लोगों की नींद को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। इसके साथ ही रात भर भ्रम के बाद लोग खुद को नाइटऑवल के नाम से सोशल मीडिया पर प्रेजेंट करते हैं।

      रात को जागना आपको काफी कूल लग सकता है, लेकिन यह आपकी सेहत के लिए कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा आपको नहीं लग सकता।

 क्या होता है, जब आप लगातार अपनी नींद (नींद के दुष्प्रभाव की कमी) को नजरअंदाज करते हैं?

      नींद की कमी का असर आपके शरीर पर तुरंत दिखने लगता है। परंतु फिर भी लोग इसे अनदेखे कर देते हैं। 

      सात घंटे से कम सोने से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अवसाद और एंजाइटी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

     मानसिक और शारीरिक संबंध होने को संतुलित रखने के लिए सभी को हर रात 7 घंटे या इससे अधिक नींद की आवश्यकता होती है।

      नींद की कमी आपके शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। रात को उचित नींद न लेने के बाद अगले दिन आपकी रोज़मर्रा की गतिविधियाँ और काम करने या ड्राइविंग जैसे कार्यों को करने की क्षमता कम हो जाती है।

     नींद की कमी ओबेसिटी, एंग्जाइटी, मूड स्विंग्स, चक्कर आना, बेचैनी, ही कमजोर निर्मेय सिस्टम का कारण बन सकता है।

     इसलिए ही नींद की कमी आपके चेहरे एवं शरीर की त्वचा पर नकारात्मक प्रभाव नहीं छोड़ती है। यह त्वचा पर फाइन लाइन्स, डार्क सर्कल, झुर्रियां और काले धब्बे पैदा कर सकता है। साथ ही यह आपको स्वस्थ रखता है और आपके कार्यालय के कार्य पर भी कोई नकारात्मक कर्मचारी है।

*1. रोगप्रतिरोधक क्षमता का ह्रास :*

    वैज्ञानिकों के अनुसार नींद की कमी प्रतिरक्षा प्रणाली को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। हमारे शरीर के सभी अंग सोते हुए अधिक प्रभावी रूप से काम करते हैं। ठीक उसी प्रकार से निष्क्रिय सिस्टम भी नींद में अधिक सक्रिय रहता है।

      लंबे समय तक उचित नींद न मिलने के कारण शरीर तनाव में जाने लगता है और एंटीबॉडीज कम हो जाते हैं। ऐसे में वायरस और अन्य हानिकारक जर्म्स के प्रभाव को बॉडी वेट नहीं मिलता है और छोटी-छोटी बातों पर तबियत खराब होने लगती है। विशेष कर सामान्य सर्दी और फ्लू की स्थिति बनी रहती है।

      आधी रात में नींद खुल जाना मेंटल और फिजिकल हेल्थ के लिए परेशानियां भरा हो सकता है. इस समस्या में स्लीप स्टेटमेंट पर ध्यान देना सबसे ज्यादा जरूरी है।

*2. हाइपरटेंशन का जोखिम :*

      5 से 6 घंटे से कम नींद लेने से हाइपरटेंशन यानी की हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति पैदा हो सकती है। नींद शरीर को हॉर्मोन्स रेगुलेट करने और स्ट्रेस रिलीज करने में मदद करता है। ऐसे में नींद की कमी के कारण शरीर को पर्याप्त समय नहीं मिलता और बॉडी हॉर्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं।

   इसकी वजह से हाई ब्लड प्रेशर, तेज हार्टबीट और इन्फ्लेमेशन जैसी स्थिति देखने को मिलती है। यह सभी स्थिति दिल की सेहत को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।

*3. वजन में वृद्धि :*

समय पर न सोना वेट गेन का कारण बन सकता है। एक्सपर्ट की मानें तो नींद पूरी न होने से या नींद की कमी शरीर में कॉर्टिसोल को बढ़ा देती है। कॉर्टिसोल स्ट्रेस हार्मोन है, जो एंग्जाइटी, स्ट्रेस, फ्रस्ट्रेशन का कारण बनता है।

     यह सभी चीजें इमोशनल ईटिंग को प्रमोट करती हैं। जिसकी वजह से शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है।

     साथ ही नींद की कमी से पेट में घ्रेलिन नामक अन्य हार्मोन प्रोड्यूस होता है वहीं इसकी अधिकता व्यक्ति को खाने के बाद संतुष्ट नहीं रहने देती और उन्हें बार-बार भूख महसूस होता है। समय के साथ नींद की कमी बॉडी मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकती है। साथ ही साथ यह थकान को बढ़ा देती है, जिसके कारण शारीरिक गतिविधियों को करते वक्त लोग जल्दी थक जाते हैं।

*4. त्वचा में उम्र से पहले बुढ़ापा :*

     नींद में त्वचा सेल्फ हीलिंग का काम करती है साथ ही नए कोलेजन को प्रोड्यूस करती है। कोलेजन एक प्रकार का प्रोटीन है जो एजिंग से लेकर पिगमेंटेशन तक त्वचा से जुड़ी विभिन्न प्रकार की समस्याओं में कारगर होता है। वहीं त्वचा की सेहत को लंबे समय तक बनाए रखता है।

     इसके साथ ही नींद ब्लड फ्लो को भी बूस्ट करती है, ऐसे में त्वचा तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचता है और स्किन मुलायम और ग्लोइंग नजर आती है।

      नींद की कमी के कारण आंखों के नीचे सूजन और काले घेरे नजर आने लगते हैं। ऐसे में आंखें बंद करके 7 से 8 घंटे की उचित नींद लेने से यह समस्याएं नहीं होती। क्योंकि आंख पूरे दिन एक्टिव रहता है ऐसे में इसे उचित आराम मिलना बहुत जरूरी है।

*5. डायबिटीज का खतरा :*

     डायबिटीज की स्थिति में खून में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है, जिसके कारण ब्लड वेसल्स के डैमेज होने का खतरा बना रहता है।

     नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन द्वारा प्रकाशित अध्ययन के अनुसार पर्याप्त नींद न लेने से व्यक्ति के शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है और डायबिटीज होने का खतरा बना रहता है। डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने के लिए उचित नींद लेने की सलाह दी जाती है।

*इस तरह बढ़ सकती हैं नींद की गुणवत्ता :*

 (tips to improve quality of sleep)

*1. खानपान का रखें विशेष ध्यान :*

     भूखे पेट सोने से नींद नहीं आती साथ ही नींद की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इसके साथ ही बेड पर जाने के तुरंत पहले हैवी आहार-विचार लेने से बचें। साथ ही सोने से पहले कैफीन, निकोटीन, अल्कोहल जैसी चीजों से दुरी बनाये रखें।

*2. स्लीप पैटर्न को फॉलो करना है जरुरी :*

    अनियमित स्लीप पैटर्न नींद को लेकर ब्रेन को सिग्नल देने वाले सर्कैडियन रिदम और मेलाटोनिन लेवल को प्रभावित कर देती है। इसलिए डॉक्टर्स 8 घंटे से ज्यादा लंबी नींद और 7 घंटे से कम नींद लेने से मना करते हैं। क्योंकि जिस तरह नींद की कमी आपकी सेहत के लिए खराब है ठीक इसी प्रकार नींद की अधिकता भी सेहत पर नकारात्मक असर डालती है।

*3. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें :*

शारीरिक गतिविधियों में भाग लेते रहने से शरीर सक्रिय रहता है जिससे नींद की गुणवत्ता बढ़ती है। परंतु सोने के कुछ देर पहले किसी तरह की कठिन शारीरिक गतिविधियों में भाग न लें। ऐसा करना नींद में बाधा बन सकता है।

*4. अनियमित झपकी लेने से बचें :*

    दिन के समय छोटी झपकी लेना ठीक है, परंतु अनियमित रूप से दिन में किसी भी वक़्त झपकी लेने की आदत नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में कई सवास्थ्य संबंधी समस्यायों का खतरा बढ़ जाता है।

Ramswaroop Mantri

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