–सुसंस्कृति परिहार
देश वासियों हम सभी यह भली-भांति जानते और पढ़ते रहे हैं कि हमारे देश का नामकरण दुष्यंत कुमार के पुत्र भरत के नाम पर पड़ा। इसलिए वह माता तो कभी भी नहीं हो सकता।
यह बात तब याद आई जब इज़राइल दौरे पर गए साहिब जी ने इज़राइल दौरे पर उसे फादर लैंड कहा और भारत को मदर लैंड।जो वास्तव में गलत है हमारे देश का नाम भी भारत है वह भी पूर्वजों के नाम यानि फोर फादर के नाम पर फादर लैंड ही हुआ।

इसका सबसे बड़ा सबूत तो संघ के वीर सावरकर की पुस्तक में भी मिलता है वे उसे पितृ भूमि लिखते हैं।उसे ही मान लेना चाहिए वर्तमान सरकार को। देश कै अमूनन सभी राष्ट्र उसे पुरुष संज्ञा से ही संबोधित करते हैं।
साथियों यदि भारत को मदर लैंड में परिवर्तित किया गया होता था तो उसके पीछे कोई दास्तान तो होती यह देश कब से और कैसे पुल्लिंग से स्त्रीलिंग में आ गया इसकी पड़ताल ज़रुरी है।लगता है इसे धरती मां या जन्मभूमि से जोड़कर भारत मां को स्वरुप प्रदान किया गया जो सरासर शकुंतला पुत्र भरत का अपमान है।
हमारा देश संभवत: इसलिए इसे लंबे मुस्लिम शासन काल में हिंदुस्तान यानि जिसे हम हिंदुओं का देश कहते
रहे। हिंदुस्तान नाम की कहानी भी विचित्र है कहा जाता है जब मुग़ल भारत आए तो उन्हें सिंधु दरिया रास्ते में पड़ा जिसे उन्होंने हिंदू दरिया कहा क्योंकि उनके शब्द कोष में स को ह कहते थे। इसलिए उसको पार करने पर आगे की तमाम भूमि को उन्होंने हिंदुस्तान कहा। यहां तक कि जब उनकी सल्तनत कायम हुई तब से ही देश हिंदुस्तान कहा जाता रहा।इससे पहले तो रजवाड़े थे ।
अंग्रेजी शासन काल में यह उसी इंडस या सिंध के कारण इंडिया बन गया इन दोनों नामों में भी पुरुष वाली ध्वनि मिलती है। लेकिन आज़ादी के संग्राम में देश में चहुं ओर जयहिंद की गूंज रही क्योंकि हिंदू मुस्लिम एक थे।
आज़ादी मिलने के बाद तकरीबन 70सालों तक जयहिंद का नारा गूंजता रहा। विदित हो जय हिंद’ का नारा सबसे पहले क्रांतिकारी चेम्पकरमन पिल्लई द्वारा गढ़ा गया था। हालांकि, इस लोकप्रिय देशभक्तिपूर्ण नारे को आज़ाद हिंद फौज के युद्ध घोष के रूप में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने प्रसिद्ध किया था, और यह नारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एकता और राष्ट्रीयता का प्रतीक बन गया।
लेकिन जबसे वंदेमातरम गीत ने ज़ोर पकड़ा है तब से जयहिंद की जगह भारत माता ने ले ली है। वास्तव में शरदचंद्र चट्टोपाध्याय ने आनंद मठ में जब वन्दे मातरम् लिखा तो उन्होंने देश शस्य श्यामलाम देश की पावन भूमि की वंदना की है।जो अलौकिक है। महत्वपूर्ण है। भारत की विशेषताओं को दर्शाती है। जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी की भावना इस गीत ने जगाई तथा लोग इसके दीवाने होकर वन्दे मातरम् के अनुयायी हो गए आज़ादी के दौरान कांग्रेस ने इसका खूब उपयोग किया इसीलिए इसे आज़ाद भारत में राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया।
लेकिन आज संकुचित विचार धारा के लोगों ने वन्देमातरम् से भारत माता की जो पृष्ठभूमि तैयार की है उसके शोर में जिससे देश के एक वर्ग विशेष को आपत्ति है और यह बात वर्तमान सरकार भली-भांति जानती है। फिर भी उसे यह पसंद है जिससे देश में तनाव बनाया जाता है।इसे समझने का प्रयास करें।
आईए, हम सब मिलकर जय हिन्द यदि नहीं कहना चाहते हैं तो जय भारत का उद्घोष करें।जो हमारे पूर्वजों की याद को बनाए रखेगा तथा देश में इस कारण पनपते तनाव को कम करेगा तथा सदियों पुरानी गंगा जमुनी तहज़ीब को भी कायम रखेगा।जय भारत साथियों।






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