-मुनेश त्यागी
योर ऑनर !आप ने किसानों से सवाल पूछा है कि वे स्टे के बाद भी आंदोलन की राह पर क्यों हैं ?यहीं पर सवाल उठता है कि क्या सरकार ने किसान विरोधी तीनों कानून वापस ले लिए हैं ?क्या सरकार ने एमएसपी की गारंटी दे दी है ? क्या वह एमएसपी खरीद मूल्य के लिए कानून बना दी है ? योर ओनर !आप सरकार से भी सवाल पूछिए कि वह इतने लंबे आंदोलन के बाद भी इन किसान विरोधी तीनों कानूनों को वापस क्यों नहीं ले रही है ? वह एमएसपी की गारंटी क्यों नहीं दे रही है ? वह एमएसपी खरीद मूल्य के लिए कानून क्यों नहीं बना रही है ? किसी कोर्ट के सामने निष्पक्ष होने के ये सबसे वाजिब सवाल हैं। योर ऑनर ! आपको इस जनविरोधी, किसान विरोधी और मजदूर विरोधी सरकार से भी किसान आंदोलन के संबंध में कुछ सवाल पूछने चाहिए जैसे, क्या उसने आंदोलन कर रहे किसानों से कानून बनाने से पहले विचार विमर्श किया था ? यदि किया था तो उसका विवरण क्या-क्या है ? इसी के साथ क्या सरकार ने कभी यह सोचा है की किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम मिल रहा है यानी कि उनकी फसलों की खरीद एमएसपी पर हो रही है ? क्या सरकार ने बिजली बिल लाने से पहले इस भारत की जनता से, भारत के किसानों से, भारत के मजदूरों से, बुद्धिजीवियों से, यह मालूम किया था ? कानून बनाने से पहले कोई वार्ता की थी ?
और मी लॉर्ड !आप ने सवाल किया है कि जब मामला अदालत में है तो फिर किसान आंदोलन क्यों चल रहा है ? इसके जवाब में यही कहा जाएगा कि किसान आंदोलन अदालत की शरण में आने से पहले ही शक्ल ले चुका था और वह अस्तित्व में था क्योंकि किसान आंदोलन की मांगे पूरी नहीं हुई थी और अभी भी पूरी नहीं हुई है, इसलिए वह आंदोलन आज भी वाजिब है और देश हित में है, किसान हित में है, मजदूर हित में है और जनहित में भी है।भारत के 99 प्रतिशत किसान संगठन सरकार द्वारा पारित कानूनों के खिलाफ हैं। यह आंदोलन यूं ही नहीं चलाया जा रहा है, इस आंदोलन से जन भावनाएं भी जुड़ चुकी हैं। यह आंदोलन देश को बचाने का आंदोलन है, देश की कृषि, खेत और खलिहान को बचाने का आंदोलन है, इसलिए आप सरकार से पूछिए कि क्या उसने उपरोक्त पूछे गए सवालों पर कानून बनाने से पहले किसानों और मजदूरों और जनता से सलाह मशविरा किया था यदि नहीं तो यह आंदोलन आज भी वाजिब ही बना हुआ है।
मी लॉर्ड ! आज आपका यह सबसे बड़ा कर्तव्य बनता है कि देश हित में, समाज हित में, और राष्ट्रहित में इस किसान आंदोलन को चलने दें,आप कृपा करके इसमें अनावश्यक हस्तक्षेप ना करें बल्कि न्यायिक दृष्टिकोण से इस वाजिब आंदोलन की मदद करें,क्योंकि सरकार विरोधी नीतियों का प्रतिरोध करना जनता और किसानों और मजदूरों का, कानूनी और संवैधानिक अधिकार है। 2020 में भारत के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने कहा था की आंदोलन करना, सरकार की नीतियों का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना, किसी का भी संवैधानिक अधिकार है। भारत की आजादी के आंदोलन के दौरान भी यहां की जनता अंग्रेजों का विरोध कर रही थी और आजादी की मांग कर रही थी। आजादी की प्राप्ति के बाद भी यहां की जनता विभिन्न अधिकारों के लिए सरकार का विरोध प्रतिरोध करती रही है और सड़कों पर आकर करती रही है।
मी लॉर्ड ! यहां हम यह भी कहेंगे कि भारत का संविधान देश की जनता, देश के किसानों, देश के मजदूरों, की हित रक्षा के लिए बनाया गया है, चंद देशी विदेशी पूंजीपतियों की हित रक्षा के लिए नहीं और सरकार असल में यही काम कर रही है उसे जनता की समस्याओं,उसकी रोटी,उसके कपड़े,उसके मकान,उसके शिक्षा,उसके स्वास्थ्य,उसकी सुरक्षा,उसके रोजगार,उसकी दवा आदि से इस कार्पोरेट हितैषी सरकार को कुछ लेना – देना नहीं है, वह केवल चंद देशी विदेशी कारपोरेट घरानों और पूंजीपतियों की तिजोरियां भरने का ही काम कर रही है और उनकी रक्षा के लिए इस देश के संविधान और कानून से भी खिलवाड़ कर रही है और जनता को धोखा दे रही है और यही कुत्सित खेल वह इस देश के अन्नदाताओं के साथ भी वह यही खेल खेल रही है ! अब गेंद आप के पाले में है। सारा देश, सारी दुनिया आपकी तरफ देख रही है। आप किसानों द्वारा उठाई गई वाजिब मांगों की सुरक्षा करते हैं या सरकार या कुछ पक्षपाती लोगों द्वारा उठाए गए खोखले दावों के साथ बह जाते हैं और उन्हें सही मान लेते हैं, अब यह आप पर निर्भर करता है। यह लड़ाई 99 प्रतिशत बनाम 1% की है। अब देखना है कि आप 99% के कल्याण का रुख अपनाते हैं या 1% देशी विदेशी शोषकों के साथ खड़े हो जाते हैं !
..और अन्त में मी लॉर्ड ! लखीमपुर खीरी वाली घटना आपने भी अवश्य देखी होगी, कि किस प्रकार लखीमपुर खीरी में वहाँ का गुँडा सांसद,जो इस राष्ट्र राज्य की संसद में वर्तमान समय की सरकार में गृहराज्य मंत्री के जिम्मेदार पद पर भी आसीन है,वह किस प्रकार अपनी एक सार्वजनिक सभा में खुलेआम किसानों को दो मिनट में देख लेने की धमकी दे रहा है ! इसी प्रकार हरियाणा का पदासीन मुख्यमंत्री अपनी एक सभा में अपनी फसलों की स्वामीनाथन आयोग की संस्तुति के अनुसार न्यायोचित मूल्य की मांग के लिए पिछले पिछले 10 महीनों से आंदोलनरत भारतीय अन्नदाताओं के खिलाफ, जिसमें वह 500-700-1000 तक लाठियों से लैश एक गैंग तैयार करने के लिए,अपनी सभा में उपस्थित कार्यकर्ताओं को सरेआम उकसा रहा है ! दुःखद रूप से इन देश विरोधी व किसान विरोधी इन्हीं उकसाने वाले भाषणों के तुरंत बाद लखीमपुर खीरी में भारत सरकार के गृहराज्यमंत्री के कुपुत्र द्वारा सरेआम शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर लौटते हुए किसानों को रौंदकर, कुचलकर मार देने वाली दुःखद घटना को अंजाम दिया गया है !
मी लॉर्ड ! यह लोमहर्षक दृश्य देखकर इस देश की अरबों की संख्या में यहाँ की जनता इस राष्ट्र राज्य, इस लोकतंत्र, इसके संविधान, इसके संसदीय व्यवस्था को परोक्षरूप से कुछ गुँडों,दंगाइयों, हत्यारों, राष्ट्रद्रोहियों द्वारा रौंदने जैसी महसूस कर रही है, विवश होकर देख रही है,क्या आपने इस घटना पर गौर नहीं किया ! आपका इस प्रकार इस देश संसद मे पदासीन गृहराज्यमंत्री और उसके कुपुत्र द्वारा यहाँ के लोकतंत्र, संविधान व संसदीय व्यवस्था का रौंदना अच्छा लगा ! अगर नहीं तो क्या आपका परम् , पुनीत और अभीष्ट कर्तव्य नहीं है कि आप अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर अपने स्वतः संज्ञान से इस इस भ्रष्ट, असंवेदनशील, आमजनविरोधी, अमानवीय, असहिष्णु, क्रूर मोदी सरकार को जनहित में तुरंत बर्खास्त करें। क्या पड़ोसी पाकिस्तान की सुप्रीमकोर्ट आपसे ज्यादे संवेदनशील, ताकतवर व कर्तव्यनिष्ठ है जो अपने पदासीन प्रधानमंत्री को उसके किए घोटाले की सजा के तौर पर तुरंत बर्खास्त कर उसे जेल में डाल दी ! आप जरा स्वयं के बारे में आत्मनिरीक्षण जरूर करिएगा। इस देश की अरबों जनता आपकी तरफ बड़ी आशाभरी नजरों से निहार रही है।
मी लॉर्ड ! कृपा करके भारत की अरबों जनता,किसानों,मजदूरों आदि की आशाओं पर पानी मर फेरिए,निष्पृहतापूर्वक समीक्षा करके अपना निर्भीक व न्यायोचित निर्णय करिए ।
-मुनेश त्यागी, मेरठ कोर्ट,मेरठ





