~ दिव्यांशी मिश्रा, भोपाल
तंबाकू पर ज्ञान देने वाले सारे एनजीओ और बाकी लोग जेनेटिक्स पढ़ लें ढंग से। तंबाकू से कैंसर नहीं होता तंबाकू सिर्फ ओंकॉजेनिक cells को एक्टिवेट कर सकता है।
Oncogenic cells heridity से किसी के शरीर में हो सकते हैं। अगर किसी के शरीर में ओंकॉजैनिक cells हों तो तंबाकू से ज्यादा एक्टिवेटर तो आपको टमाटो सॉस में मिला हुआ सोडियम बेंजोएट है जिसको प्रिजर्वेटिव की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
इस प्रकार से तो तंबाकू से ज्यादा खतरनाक तो टमाटो सॉस और मैगी में और मोमो सूप में इस्तेमाल किए जाने वाला अजीनोमोटो है।
हां लंग्स में और छोटी मोटी समस्या तो तंबाकू पैदा कर सकता है। लेकिन oncogenic cells को एक्टिवेट करने में फूड प्रिजर्वेटिव और अजीनोमोटो तंबाकू से ज्यादा खतरनाक है।
ये एनजीओ और दूसरे संगठन अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए उल्टा सीधा प्रचार करने में माहिर है । मैगी तो बच्चे भी खाएं तो खाएं इनको तो बिजनेस करना है। अगर कोई डॉक्टर मेरी इस पोस्ट को पढ़ रहा है।
तो मेरा हमारे आराध्य डॉ. विकास मानवश्री के सौजन्य चैलेंज है प्रूव करे कि तंबाकू क्या कैंसर पैदा करता है कि oncogenic cells को एक्टिवेट।
तब तो ऐसी मुहिम फूड प्रिजर्वेटिव और अजीनोमोटो के खिलाफ भी चलनी चाहिए। आपको आईएमए और डॉक्टर्स से इस बात का जवाब माँगना चाहिए।
तंबाकू से ज्यादा कैंसर मरीज तो फ्लोराइड युक्त झाग वाला आईएमए द्वारा प्रमाणित कोलगेट पेस्ट कर चुका है।
coke pepsi में आईएमए द्वारा प्रमाणित brominated वेजिटेबल ऑयल की याद है या भूल गए। बाकी एल्यूमीनियम पर तो आप वीडियोज देख ही चुके हैं।
मैंने 1999 से आजतक ऐसी स्थति नहीं पाई की स्मोकर हो और उसकी मृत्यु कैंसर से हुई हो। अगर किसी के पास ऐसी कोई जानकारी हो तो बताए। सुनी सुनाई बातों के आधार पर ना लिखें , अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं या थे तभी लिखें।
इस विषय पर मुझे अपनी रिसर्च करने में मेरी मदद कीजिए। क्योंकि मैने देखा है कि अंतर राष्ट्रीय संगठन किसी ना किसी एजेंडा के तहत किसी चीज का प्रचार प्रसार अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रख कर करते आए हैं। हां इन बातों के कुछ नुकसान जरूर देखें हैं परन्तु उन नुकसानों को मत गिनाए।
हमारे पूर्वज तम्बाकू खाते थे. कैंसर आज की बीमारी है. मैने अपने बचपन में ऐसे बहुत लोग देखे है जिनकी आयु 90-95 साल होती थी लेकिन बिल्कुल स्वस्थ और उनका हुक्का कभी बुझता नहीं था। ऐसी बड़ी आयु 80-90 साल की औरतें देखी थी जो हर 5 मिनट बाद अपने नाक में नसवार सूंघती रहती थी बिल्कुल स्लिम ट्रिम और स्वस्थ।
नस्वार भी तमाखु का पाउडर होता है। और मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूं जिन्होने किसी गुरु या पत्नी या डॉक्टर के कहने से बड़ी आयु 50 प्लस में तमाखू छोड़ा उनको सभी को स्टंट पड़ गए या उनकी हार्ट सर्जरी हुई।
यह सारा आधुनिक सिस्टम भय का व्यापार करता है और हमें दवाइयों पर निर्भर कर रहा है। जब से सरकार ने हार्ट स्टंट के रेट लाखों से 10-20 हजार के बीच कर दिए, हमारे शहर में अब इक्कादुक्का केस में ही हार्ट स्टंट के सुनाई देते है. पहले हर दूसरे दिन सुनते थे कि उसको इसको हार्ट स्टंट पड़ गए।
हमारा वैदिक ज्ञान भी यही कहता है कि अधिकतर बीमारियां हमारी सोच के कारण ज्यादा प्रभाव करती है। इसलिए जितना भय करोगे उतनी समस्या बढ़ेगी। मिलावटखोरी के जहर, दुराचार, फ़ास्टफूड और केमिकल से बचें. क़ुछ नहीं होगा. (चेतना विकास मिशन).





