रजनी मुर्मू
औरतें जला कर मार डाली जाती थीं पति की चिता के साथ ! वैसे जला कर मार डाली गईं इन औरतों को भारतीय दकियानूसी लोग सती कह कर महान बताते थे ! बंगाल के एक जागरूक व दयालु व्यक्ति राजा राम मोहन राय को यह गलत लगा, उन्होंने इस पर सवाल उठाया, इसके खिलाफ अभियान चलाया।
राजा राम मोहन राय को उस समय अपने समाज के लोगों का विरोध झेलना पड़ा। उनके ‘कथित अपने ‘लोगों ने उन्हें समझाया कि चुप रहो, आक्रामक नहीं हो, शांत रहो, समाज बदलने में समय लगता है ! लेकिन राम मोहन राय ने कथित महान सतीप्रथा के विरूद्ध आवाज उठाना जारी रखा। उस समय की अंग्रेजों की सत्ता ने सतीप्रथा के खिलाफ कानून बनाया और इस तरह तत्कालीन रूढीग्रस्त भारतीयसमाज से सती करने की बर्बर परंपरा खत्म हुई।
आज सती बनाने की बर्बरता इतिहास में दर्ज है। उस समय राम मोहन राय का विरोध करने वाले और उन्हें चुप और शांत रहने की सलाह देने वाले लोग इतिहास के पन्नों में सामंती बर्बरता के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थक, विलेन-खलनायक, सत्ताधारी सामंती मानसिकता के सहभागी के रूप में दर्ज हैं। अगर मिन लीजिए उस समय राजा राम मोहन राय ने इन लोगों की बात मान ली होती, विरोध से डर गए होते तो आज भी सती बना कर औरतों को जिंदा जलाया जाता रहता। परंपरा और समाज का मामला बता कर उस समय जो लोग सती करने को महान बता रहे थे, अगर उनकी बात मानी गई होती तो औरतें आज भी पति की मौत के बाद जिंदा जला कर मार डाली जाती रहतीं !
उस दौर के दो सौ साल बाद आज भी औरतों के यौन शोषण या उनके खिलाफ यौन हरकतों के खिलाफ आवाज उठाई जाती है तो आवाज उठाने वाली औरत का ‘बिटलाहा ‘ यानी बहिष्कार करने की घोषणा की जाती है, उस औरत का बिटलाहा करने में समाज के ठेकेदार से लेकर पद और पावर वाले सभी लोग शामिल हो जाते हैं, उसे आर्थिक रूप से अन्याय का शिकार बनाने से लेकर उसके बलात्कार और जानलेवा धमकियों के साथ मॉब लिंचिंग तक का माहौल बनाया जाता है ! यह सब होने के बीच उस औरत को चुप और शांत रहने की सलाह दी जाती है। तो
यह है भारतीय समाज और इस देश की सभ्यता के विकास का उदाहरण।
आभार, सुप्रसिद्ध लेखिका,आदिवासी प्रोफेसर और दार्शनिक रजनी मुर्मू,दुमका ,झारखंड, संपर्क - 87975 57956
संकलन - निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र,संपर्क - 9910629632,ईमेल - nirmal kumar sharma 3@gmail.com




