अग्नि आलोक
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आहार और आपकी सेहत का संसार

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 डॉ. प्रिया

    आधुनिक चिकित्सा  मे चिकित्सक हमे जीवन भर दवाई खाने को देते है.  हम जीवन भर दवाई खाते रहते है. कुछ समय बाद बहुत सी  खतरनाक बीमारियों से ग्रसित हो जाते है.

      खाना खाने के बाद पेट मे खाना पचेगा या सड़ेगा ये जानना बहुत जरुरी है। हमने रोटी खाई,हमने दाल खाई,हमने सब्जी खाई, हमने दही खाया लस्सी पी , दूध,दही छाझ लस्सी फल आदि सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया. ये सब कुछ हमको उर्जा देता है और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है।

पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है “अमाशय”.  उसी स्थान का संस्कृत नाम है “जठर”। अंग्रेजी मे कहते है “epigastrium.”

       ये एक थेली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है। ये बहुत छोटा सा स्थान हैं इसमें अधिक से अधिक 350GMS खाना आ सकता है। हम जो कुछ भी खाते है सब ये अमाशय मे आ जाता है।

आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है उसी को कहते है “जठराग्नि”। ये जठराग्नि अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है. आपने खाना खाया की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी. ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना पचता है।

अब अपने खाते ही गटागट पानी पी लिया, ठंडा पानी पी लिया।अब जो आग (जठराग्नि) जल रही थी वो बुझ गयी। आग अगर बुझ गयी तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो रुक गयी।

अब हमेशा याद रखें : खाना जाने पर हमारे पेट में दो ही क्रिया होती है. एक क्रिया है जिसको हम कहते है “Digestion” और दूसरी है “fermentation.” फर्मेंटेशन का मतलब है सडना और डायजेशन का मतलब हे पचना। आग जलेगी तो खाना पचेगा,खाना पचेगा तो उससे रस बनेगा। जो रस बनेगा उसी रस से मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा। ये तभी होगा जब खाना पचेगा। 

अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा..? खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड (uric acid ) कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है, मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है.

  तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है. आप ये दवा खाओ.  दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो।

  जब खाना सड़ता है, तो यूरिक एसिड सा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते है LDL (Low Density lipoprotive)

माने खराब कोलेस्ट्रोल (cholesterol ).

   जब आप ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP )

     हाई-बीपी है. आप पूछोगे कारण बताओ? तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है। आप ज्यादा पूछोगे की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ? तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है |

इससे भी ज्यादा खतरनाक एक विष है 

वो है VLDL (Very Low Density lipoprotive). ये भी कोलेस्ट्रॉल सा ही विष है। अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता. खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमे एक और विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides. जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका “triglycerides” बढ़ा हुआ है तो समझ लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है।

तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे,कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे, कोई LDL VLDL के नाम से कहे समझ लीजिए की ये विष है और ऐसे विष 103 है। ये सभी विष तब बनते है जब खाना सड़ता है।

    किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है , कोई कहता हे मेरा triglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप ! की आपका खाना पच नहीं रहा है। कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे की खाना पच नहीं रहा है।

क्योंकि खाना पचने पर इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता।

खाना पचने पर जो बनता है वो है मांस,मज्जा,रक्त ,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र,अस्थि. और खाना नहीं पचने पर बनता है यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल

,LDL-VLDL. यही सब आपके शरीर को रोगों का घर बनाते है !

पेट मे बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून मे आते है ! तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून मे आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है जिसे आप heart attack कहते हैं !

तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है की जो हम खा रहे हे वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए और खाना ठीक से पचना चाहिए इसके लिए पेट मे ठीक से आग (जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए| क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं हे और खाना पकता भी नहीं है. महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है।

खाना अच्छे से पचे इसके लिए वाग्भट्ट  ने सूत्र दिया : “भोजनान्ते विषं वारी”. मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है. कम से कम 30 मिनट तक नहीं पीना !

जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता हैं है !पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है ! उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है. बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है.

पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की परिक्रिया शुरू होती है ! तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती है. तब आप जितनी इच्छा हो उतना पानी पिये !!

 खाना खाने के 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं !  जब हम पानी पीते हैं तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है ! अगर बच जाये तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है ! तो पानी – पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है.

Ramswaroop Mantri

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