हम कलोता समाज हमेशा से इस मनोज पटेल के साथ खड़ा रहा मगर यह हमेशा से हम समाज वालों को नीचा दिखाता है पूरे देपालपुर तहसील में एक मात्र हमारे कलोता समाज का बेटमा में पार्षद था शेखर मकवाना आख़िर में ऊसका भी टिकिट काट दिया क्या हमारे समाज में अब कोई पार्षद लड़ने के लयक भी नहीं है पूरी तहसील (गोतमपुरा,देपालपुर,बेटमा) में एक भी समाज बंधु को टिकट नहीं दिया । शेखर मकवाना को कलोता समाज का होने की क़ीमत चुकानी पड़ी । अगर शेखर कोई दूसरे समाज का होता तो शायद इसकी पार्षद की टिकिट नहीं कटती। शेखर की जगह मनोज पटेल ने अपने ख़ास बेटमा के कुख्यात दारू व भू माफिया को टिकिट दिया । हमारे समाज के एक दर्जन बड़े नेताओ ने शेखर के पार्षद के टिकिट की पेरवी की थी इन सब की भी इस मनोज ने इज्जत नहीं रखी । सभी ने एक सुर में शेखर को टिकिट देने का बोला था । क्या हमारे समाज वाले की छवि ऊस दारू माफिया के आगे कम थी ? इस मनोज पटेल ने चुन चुन कर समाज जनो को निपटाया है । अगर यह पोस्ट झूठी लगती हो तो इतिहास उठा कर देख लो फिर भी हमारे समाज के कुछ जय चंद बॉस बॉस बोलकर इस मनोज के आगे पीछे घूमते है । अभी भी वक्त है इस कलोता विरोधी मनोज पटेल को पीपलियापाला भेजो नहीं तो अब गाँव के पंच भी नहीं बन पाओगे ।
फिर सिद्ध हो गया की मनोज पटेल को कलोता विरोधी क्यू बोलते है





