नफरत किससे करो?? जहां मुसलमान हैं वहां मुसलमान से करो। जहां मुसलमान नहीं हैं सरदार हैं, वहां सरदार से कर लो। ईसाईयों से कर लो, पर नफरत करो।
नफरत करने के लिए अगर आसपास पराया धर्म नहीं है,कोई बात नहीं, अपने भीतर से किसी एक को अलग कर के उससे नफरत कर लो !
हरियाणा में हो तो जाटों से नफरत कर लो। जगह विशेष पर दलितों से कर लो। बिहार में यादवों से कर लो। पर नफरत करो।
अगर सवर्ण हैं और हमारे झांसे में नहीं हैं तो उन्हें जयचंद बता के उनसे नफरत कर लो। अपने देवता के फेल होने के पीछे वजह अपने देवता में नहीं, उनमें ढूंढो जिनसे नफरत है। नोटंबदी में बैंक कर्मचारियों से नफरत करो और उन्हें निकम्मा बोल कर नोटबंदी फेल होने का जिम्मेदार बना दो।
रेलवे में काम करते हैं और उसे बेचे जाने का विरोध करते हैं तो उन्हें निठल्ला और मु्फ्तखोर बोल के उनसे नफरत कर लो। कभी बॉलीवुड,कभी जेएनयू, कभी जामिया, कभी पढ़ती लिखती लड़कियां, कभी रोजगार मांगते युवा, हक मांगते किसान जब जहां जिससे जरूरत हो नफरत कर लो।
नफरत के अलावा दूसरा काम क्या करना है – गर्व करना है!
किसी चीज पर गर्व करना है?
जो है उसी पर गर्व कर लो। हिंदू होने पर गर्व कर लो। भारतीय होने पर गर्व कर लो। ब्राह्मण, राजपूत, कुर्मी, कानी, विश्वकर्मा कुछ भी हो गर्व कर लोसैनिक मर रहे हैं, उनके मरने पर गर्व कर लो। कोविड से डॉक्टर भी मर रहे हैं उनके सेवा और बलिदान पर गर्व कर लो।
दूर मामा के साला का बेटा बैंक में लग गया, गर्व कर लो। कोई दोस्त जज लग गया। एक बिहारी आईएएस टॉप कर गयाकोई यूएन में भाषण दे रही है।तुम्हें क्या करना है?? गर्व करना है।
तुम्हारे आस पास किसी ने कुछ भी कर लिया, भले ही आप उसके ना तीन में, न तेरह में पर उसपे गर्व कर लो। अपनी लगी पड़ी है। छोड़ो ना उसे।
नफरत करो और गर्व करो!!
इलाज के अभाव में मर रहे हो तो गर्व करो कि फलाने जी के शासनकाल में मर रहे हो, सीधे स्वर्ग जाओगे! तुम्हारे ही पैसे से तुम्हें ही सामान बांट के अगले ने फोटो लगवा ली ! उसपर गर्व कर लो
और क्या सब नहीं करना है? सवाल नहीं करना है। तर्क नहीं करना है। हिसाब नहीं लेना है।
गर्व में इतना चूर रहना है कि ऐन अपने मरने वाली हालत आने तक उसका पता न लगे।
आप जिस समाज में हैं उसमें अभूतपूर्व तबाही आई हुई है। श्मशान, घर, बाहर, नदी, नाले सब लाशों से पटे हैं। नौकरियां जा रही है, सरकारी संस्थान बेचे जा रहे हैं, अर्थव्यस्था की लगी पड़ी है ! तब आप क्या करेंगे?? सवाल तो करना नहीं है।
गर्व करने की हालत भी नहीं है। नफरत भी जोर नहीं मार रही है। तो नफरत को एक किक दो और इजरायल पर गर्व कर लो।
साभार अंशु राज
भारत में फैलाये गये बहुसंख्यक राष्ट्रवाद के दो कोर सिद्धांत हैं –पहला नफरत करो और दूसरा गर्व करो





