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विरोध और विद्वेष किसी और के भक्त के भीतर हो सकता है, रामभक्त में नहीं!

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केशव क्रृपाल श्री केशव, वाराणसी 

अयोध्या काशी जैसी 2–4 मस्जिदों के प्रति मुसलमानों के हठ ने उनका अपना और देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है। इसने आजादी की लडाई के पहले, लड़ाई के दौरान और स्वतंत्रभारत में मुसलमानों के प्रत्येक क्षेत्र में दिए गए शानदार योगदान को नगण्य बनाकर ‌रख दिया। 
साथ ही ऐसी ताकतों को फलने-फूलने का मौका दे दिया जो न हिंदू के हैं, न मुसलमान के, न भगवान के। जिस नई पीढ़ी पर देश को आगे ले जाने की जिम्मेदारी थी वह धर्म के नाम पर पागल बनी घूम रही है। सरकार अदालतों के कंधे पर बंदूक रखकर अपना एजेंडा पूरा करना चाहती है जिससे सांप तो मरे, मगर लाठी न टूटे। न्यायाधीश भी डरे हुए हैं फिर भी अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। क्या सरकार बहुमत में होकर भी यह फैसले खुद से नहीं कर सकती? 
आज देश में जितने भी भारतीय मुसलमान हैं न उन्होंने, न ही उनके पूर्वजों ने मंदिर तोड़े हैं और मस्जिदें तमीर की हैं। यह काम आक्रमणकारियों का और हुकूमत के अय्याशों का है, जिनके लिए मजहब का मरहला तब भी उतना ही फायदेमंद था, जितना आज है। 
अपने वतन के लिए मुसलमानों ने जैसे हर मोर्चे पर कुर्बानियां दी हैं एक और कुर्बानी की जरूरत है कि इन धर्मस्थलों को स्वेच्छा से मूल रूप में वापस दे दें। यह बात मैं आज नहीं 40 वर्षों से अपने लेखों और वक्तव्यों में कहता रहा हूं। अगर हमारे शरीर में  गंदा खून फोड़ा बन कर लटक रहा है तो उसका इलाज अदालतों में नहीं, अस्पताल में होगा। समझदार के लिए इशारा काफी है। 
जहां तक मेरा सवाल है, विशुद्ध सनातनधर्मी हूं लेकिन मुसलमानों से क्या, किसी के भी प्रति मेरे में जरा भी द्वेष नहीं है। हालांकि हैसियत के पैमाने से इतना छोटा हूं कि बड़ी बातें करने का मेरा हक नहीं बनता। बस हिम्मत करके अनुरोध कर रहा हूं। 
भारत के मुसलमान‌ मुहम्मद गोरी, गजनवी, नादिर शाह, खिलजी, लोदी, बाबर या औरंगजेब के वंशज नहीं हैं। इनसे आपका मजहब मिलता है, आपका खून नहीं मिलता। खून तो हमारा आपका एक है। आप चाहें तो विवादों का दरवाजा हमेशा के लिए बंद कर दें ऐसा होते ही धर्म के नाम पर सियासत का दरवाजा खुद-ब-खुद बंद हो जाएगा।
राष्ट्र जीवन के सूक्ष्म तरंगों का अध्ययन करने पर ऐसा लगता है हमारा संविधान खतरे में आ गया है। अपने प्रारंभिक जीवन में मुझे भी संविधान के भीतर बहुत खामियां नजर आती थीं जो कमोबेश अभी‌ भी हैं। लेकिन अब लगने लगा है कि संविधान टूटा तो देश टूट जाएगा। अखंडभारत की कौन कहे, वर्तमान भारत के खंडित होने की नौबत आती हुई नजर ‌आ रही है। जो सच्चा धार्मिक और रामभक्त होगा, वह मेरे जैसा ही सोचेगा।
रामचरितमानस में भगवान शिव ने पार्वती जी को संबोधित करते‌ हुए ‌ रामभक्त‌ के‌‌ लिए गाइड लाइन तय कर दिया है, 
उमा जे राम चरन रत विगत मान मद क्रोध।निज प्रभुमय देखहिं जगत केहिं सन कवन बिरोध।।

Ramswaroop Mantri

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