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लवलेश-अरुण के घर में खाने को नहीं, कहाँ से आई 7 लाख की पिस्टल

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हमीरपुर, बांदा, कासगंज

सनी सिंह, लवलेश तिवारी और अरुण मौर्य, तीन लड़के जिन्होंने 15 अप्रैल, 2023 की रात अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को पुलिस की मौजूदगी में गोलियां मारीं। इसके अलावा भी तीनों में कुछ बातें कॉमन हैं। तीनों गरीब परिवारों से हैं, तीनों का परिवार से ज्यादा नाता नहीं रहा। सनी मां को पीटता था, हाथ भी तोड़ दिया था। लवलेश की पिता से कभी नहीं बनी। और तीनों का नाम कम उम्र में ही थानों में दर्ज हो गया।

अतीक की हत्या को 8 दिन हो गए, तीनों आरोपियों के घर पुलिस का पहरा है। गलियों में बैरिकेडिंग है। शुरुआत में इनके परिवार मीडिया से बात कर रहे थे, अब ये भी बंद है, क्योंकि ऊपर से आदेश आया है।

सनी, लवलेश और अरुण के पास 7 लाख रुपए कीमत वाली विदेशी पिस्टल मिली थीं। अतीक की हत्या से पहले तीनों प्रयागराज के अच्छे होटल में रुके थे, लेकिन इनके परिवारों के सामने खाने के लाले हैं। मैं तीनों का बैकग्राउंड जानने के लिए हमीरपुर, बांदा और कासगंज में उनके घर पहुंचा।

आरोपी: सनी सिंह
पता: हमीरपुर का कुरारा गांव

भाई की दुकान बंद, पुलिस की वजह से कहीं आ-जा नहीं पा रहे​​​​
पुलिस ने सनी को अतीक और अशरफ की हत्या में मुख्य आरोपी बनाया है। उसका परिवार प्रयागराज से ढाई सौ किमी दूर हमीरपुर के कुरारा गांव में रहता है। गांव में घुसते ही पुलिस के हथियारबंद जवान दिखने लगे। सनी के घर के सामने ही 15 से 20 पुलिसवाले खड़े हैं।

घर का दरवाजा बंद है और पुलिस की इजाजत के बिना कोई करीब नहीं जा सकता। मैंने जाने की कोशिश की, तो मुझे भी रोक दिया। कहने लगे, ‘ऊपर से आदेश आया है। हमारे ऊपर इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी है।’

अतीक और अशरफ की हत्या के बाद से ही सनी के घर पुलिस तैनात है। परिवार बाहर नहीं निकल सकता, इसलिए पुलिसवाले ही उनके खाने-पीने का इंतजाम कर रहे हैं।

अतीक और अशरफ की हत्या के बाद से ही सनी के घर पुलिस तैनात है। परिवार बाहर नहीं निकल सकता, इसलिए पुलिसवाले ही उनके खाने-पीने का इंतजाम कर रहे हैं।

मैंने कहा कि ‘परिवार के किसी सदस्य से मिलवा दीजिए, मैं सिर्फ बात करूंगा।’ थोड़ी ना-नुकुर के बाद पुलिसवाले माने, लेकिन कहा, ‘फोटो या वीडियो नहीं लेना है।’ उन्होंने आवाज लगाकर सनी के बड़े भाई पिंटू सिंह को दरवाजे पर बुलाया।

सनी के बारे में पूछते ही पिंटू बोल पड़े, ‘रोज एक ही बात कहते-कहते उकता गया हूं। उससे हमारा कोई नाता नहीं है। बहुत साल पहले रिश्ता खत्म हो गया। वो छोटा था, तभी घर छोड़कर चला गया था।’

मैंने पूछा- आपने सनी को ढूंढा नहीं? पिंटू ने जवाब दिया, ‘हम रोज कमाने-खाने वाले लोग हैं। कुछ दिन ढूंढा, फिर नहीं मिला तो ढूंढना छोड़ दिया। मेरी छोटी सी चाय की दुकान है। रोज तीन-चार सौ कमाता हूं, तब घर का खर्च चलता है। अब वो भी बंद है। पुलिस की वजह से कहीं आ-जा नहीं पा रहे।’

कुरारा बाजार में मेन रोड पर पिंटू सिंह की चाय की दुकान है। शटर बंद है, बाहर भट्‌टी रखी है। एक तख्त भी पड़ा है।

कुरारा बाजार में मेन रोड पर पिंटू सिंह की चाय की दुकान है। शटर बंद है, बाहर भट्‌टी रखी है। एक तख्त भी पड़ा है।

अतीक की हत्या में सनी शामिल है, ये कैसे पता चला? पिंटू कहते हैं, ‘टीवी देखकर। रात में तीन बजे पुलिस आ गई। घर के बगल से निकलने वाली तीन गलियों में बैरिकेडिंग कर दी।’ सनी की कोई खबर आई, इस पर जवाब दिया, ‘अब उसका कुछ भी हो, हमें कोई मतलब नहीं है।’

पिंटू के पीछे ही उनकी बड़ी बहन सरिता खड़ी थीं। सनी के बारे में पता चलते ही वे ससुराल से आ गई हैं। कहती हैं, ‘सनी बचपन से शरारती था। घर के पास ही शिक्षा निकेतन में पढ़ता था। मेरी शादी के बाद पिता की मौत हो गई थी। मां इन लोगों को पाल रही थी। उसी समय सनी गलत लोगों के साथ रहने लगा। कई दिन तक गायब रहता था। आता तो मां से पैसे मांगता था। मां भी परेशान हो गई थी।’

मां का जिक्र हुआ तो पिंटू ने बताया कि ‘कुछ दिन बाद मां अपने मायके चली गई। इसके बाद कभी नहीं लौटी।’

विद्या भारती के स्कूल में पढ़ता था सनी, स्कूल में कोई रिकॉर्ड नहीं
सनी जिस शिशु शिक्षा निकेतन में 5वीं तक पढ़ा है, वह RSS की संस्था विद्या भारती से एफिलिएडेट है। यहां प्रिंसिपल ओमजी पांडेय मिले। वे बताते हैं, ‘कहा जा रहा है कि सनी इसी स्कूल से पढ़ा है, लेकिन यह बहुत पुरानी बात है। उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।’

सनी इसी स्कूल में 5वीं तक पढ़ा है, लेकिन स्कूल में उसका कोई डॉक्यूमेंट नहीं है। कोई टीचर भी ऐसा नहीं, जो बता सके कि सनी ने यहां पढ़ाई की है।

सनी इसी स्कूल में 5वीं तक पढ़ा है, लेकिन स्कूल में उसका कोई डॉक्यूमेंट नहीं है। कोई टीचर भी ऐसा नहीं, जो बता सके कि सनी ने यहां पढ़ाई की है।

मां का हाथ तोड़ा, अब तक ठीक नहीं हुआ
कुरारा से 60 किमी दूर हमीरपुर-बांदा बॉर्डर पर सिकहौला गांव है। सड़क से करीब 300 मीटर दूर सनी की मां किशना का घर है। गांववालों के मुताबिक, अब तक यहां पुलिस नहीं आई।

गांववालों से ही पता चला कि किशना भाइयों के घर में रहती हैं। एक भाई सुभाष सिंह की कुछ महीने पहले मौत हो गई, दूसरे बाबू सिंह गाजियाबाद में रहते हैं। मैं उनके घर पहुंचा, तब दोपहर के ढाई बजे थे, किशना बकरी चराने खेतों में गई थीं।

सनी की मां किशना इसी घर में रहती हैं, वे अकेली हैं और बकरी पालकर खर्च चलाती हैं।

सनी की मां किशना इसी घर में रहती हैं, वे अकेली हैं और बकरी पालकर खर्च चलाती हैं।

पड़ोसी बृजेश सिंह बताते हैं कि ‘किशना बहुत साल से गांव में रह रही है। परिवार ने उन्हें भगा दिया था। सनी को तो उन्होंने कुरारा छोड़ने के बाद से नहीं देखा।’

गांववालों ने बताया कि किशना हर रोज शाम तक घर आती हैं। मैं उनके आने का इंतजार करने लगा। शाम करीब सात बजे 10-12 बकरियों के साथ किशना सिंह घर लौटीं। उम्र करीब 55 साल, दुबला-पतला शरीर। वे सीधे घर में गईं और बकरियों को बाड़े में डालने लगीं।

मैंने सनी के बारे में पूछा, तो कहने लगीं, ‘पति और बड़ा बेटा नहीं रहा, मंझला बेटा चाय की दुकान चलाता था। मैं भी इधर-उधर काम करती थी। थोड़े-बहुत रुपए इकट्‌ठा करती, तो सनी छीन लेता था। मारता-पीटता भी था। एक दिन इतना मारा कि मेरा हाथ टूट गया।’

‘परेशान होकर मैं भाइयों के पास आ गई। बेटे भी कभी लेने नहीं आए। बेटी कभी-कभार आती रही। गांव के लोगों ने बताया कि सनी ने किसी को मार दिया है। मन में तो आया कि ये क्या कर दिया। अब सरकार कुछ करे, मुझे फर्क नहीं पड़ता। बेटा है तो क्या करें, जो किया है, उसे तो भुगतना पड़ेगा।’

सनी की मां किशना सिंह, बेटे की पिटाई से टूटा उनका हाथ अब तक टेढ़ा है। किशना कहती हैं कि मैं इससे काम भी नहीं कर सकती।

सनी की मां किशना सिंह, बेटे की पिटाई से टूटा उनका हाथ अब तक टेढ़ा है। किशना कहती हैं कि मैं इससे काम भी नहीं कर सकती।

सनी सिंह पर 14 केस, हमीरपुर के हिस्ट्रीशीटर्स में नाम
मोहल्ले के लोग बताते हैं कि सनी का नाम सबसे पहले 2016 में लूट के एक मामले में आया था। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए घर पर दबिश दी। पुलिस का घर आना सनी को पसंद नहीं आया। वह गुस्से में थाने गया और बाहर फायरिंग कर फरार हो गया। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। सनी पर कुरारा थाने में 14 केस दर्ज हैं। वो हिस्ट्रीशीटर भी है।

आरोपी: लवलेश तिवारी
पता: बांदा का क्योंटरा मोहल्ला

पिता की नौकरी गई, पड़ोसी उसके बारे में बात नहीं करना चाहते
हमीरपुर से करीब 40 किमी दूर बांदा में लवलेश तिवारी का घर है। अतीक की हत्या के तुरंत बाद पुलिस उसके घर पहुंची थी। पहले दिन लवलेश के परिवार ने मीडिया से बात की थी। इसके बाद उनकी सुरक्षा में 4 पुलिसवाले लगा दिए गए। अगले दिन लवलेश का परिवार घर पर ताला लगाकर कहीं चला गया। पुलिसवाले भी चले गए। लवलेश पर 4 केस दर्ज हैं। बताया जाता है कि अतीक की हत्या से एक हफ्ते पहले वह घर आया था।

लवलेश का परिवार एक संकरी गली में बने इसी मकान में रहता है। बाहर से घर बड़ा दिखता है, लेकिन अंदर दो ही कमरे हैं।

लवलेश का परिवार एक संकरी गली में बने इसी मकान में रहता है। बाहर से घर बड़ा दिखता है, लेकिन अंदर दो ही कमरे हैं।

आसपास के लोगों ने बताया कि यहां लवलेश, उसके मां-बाप और छोटा भाई किराए पर रहते थे। पड़ोसी लवलेश के परिवार के बारे में बात नहीं करना चाहते। परिवार जिस मकान में रहता है, वह एडवोकेट व्योमेश कुमार सिंह के भाई का है। व्योमेश बगल में ही रहते हैं और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं।

व्योमेश कहते हैं, ‘लवलेश 15 साल से हमारा पड़ोसी है। उसके पिता यज्ञ कुमार तिवारी पहले कॉन्ट्रैक्ट पर रोडवेज की गाड़ी चलाते थे। नौकरी चली गई, तो एक स्कूल में बस चलाने लगे। इस कांड के बाद वो नौकरी भी छूट गई। इस समय कहां है, किसी को नहीं पता। लवलेश के बारे में बहुत कुछ नहीं बता पाऊंगा, लेकिन आते-जाते चाचा कहकर प्रणाम करता था।’

दोस्त ने बताया- बजरंग दल से जुड़ा था, हिंदुत्व की बातें करता था
मुझे लवलेश के बचपन के एक दोस्त भी मिले। बात करने के लिए तैयार थे, लेकिन कैमरे पर नहीं। साथ ही नाम न देने की भी शर्त रखी। बताया कि ‘एक ही मोहल्ले में रहते थे, तो दोस्ती हो गई। 2014 के आसपास वो बजरंग दल से जुड़ गया था। उसने वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था। कहीं कोई मामला होता, तो सबको इकट्‌ठा कर लेता था। उसकी गलत संगत की वजह से मैंने दो साल पहले दोस्ती खत्म कर ली। कभी मुलाकात होती, तो हालचाल पूछ लेता था। वो हिंदुत्व की बातें करता था। उसे ऐसे ही काम पसंद आते थे।’

पहला केस छेड़खानी का था, तीन महीने जेल में रहा
दोस्त बताते हैं कि लवलेश का मन पढ़ाई में नहीं लगता था। वह कॉमर्स का स्टूडेंट था, नंबर कम आने पर उसके पिता गुस्सा करते थे। पिता से उसकी नहीं बनती थी। लवलेश नशा भी करने लगा था।

2020 में लवलेश पर एक लड़की से छेड़खानी और मारपीट का केस दर्ज हुआ था। लड़की का केस सरकारी वकील कमल गौतम देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि ‘लड़की नाबालिग है। वह सहेली के साथ स्कूल से लौट रही थी। लवलेश ने उन पर कमेंट किए। लड़की ने विरोध किया तो पहले उसे थप्पड़ मारा, फिर उसके सिर पर ट्रे मार दी।’

गांव में दादी अकेली, बोलीं- लवलेश करनी का फल भुगतेगा
परिवार नहीं मिला तो मैं लवलेश के पुश्तैनी गांव लौमर पहुंच गया। ये बांदा से 40 किमी दूर है। सड़क से 3 किमी अंदर लवलेश का घर है। यहां उसकी 70 साल की दादी विद्यावती रहती हैं। बाहर पुलिस तैनात है।

लवलेश का पुश्तैनी गांव वाला घर, वह यहां बहुत नहीं आता था। गांव के लोगों से भी उसका ज्यादा मिलना नहीं था, इसलिए उसके बारे में कम ही लोग जानते हैं।

लवलेश का पुश्तैनी गांव वाला घर, वह यहां बहुत नहीं आता था। गांव के लोगों से भी उसका ज्यादा मिलना नहीं था, इसलिए उसके बारे में कम ही लोग जानते हैं।

विद्यावती कहती हैं, ‘शहर में मेरा मन नहीं लगता, इसलिए गांव में रहती हूं। लवलेश बांदा में पैदा हुआ था। होली-दिवाली पर आ जाता था। मार्च में होली पर एक दिन के लिए आया था। जिस दिन घटना हुई, गांववाले उसकी बात कर रहे थे। मुझे लगा कि परिवार में कुछ हुआ है। मेरे पास न टीवी है, न फोन। फिर गांव के लोगों ने ही मोबाइल पर फोटो दिखाए, तब पता चला कि ये सब हो गया।’

मैंने पूछा कि आपका परिवार कहीं चला गया है, आपको कुछ पता है? विद्यावती बोलीं, ‘नहीं, मुझे नहीं मालूम वे लोग कहां है। तब से बात भी नहीं हुई है।’

घर में लवलेश के चाचा ओम नारायण भी थे। वे कहते हैं, ‘लवलेश गांव में किसी से ज्यादा मिलता नहीं था। हां, रोज मंदिर जाता था। भजन-कीर्तन करता था। ढोलक बहुत बढ़िया बजाता था।’

आरोपी: अरुण मौर्य
पता: कासगंज का कातरवाड़ी गांव

अधबने घर के बाहर पुलिस तैनात, परिवार का पता नहीं
अरुण का घर बांदा से करीब 400 किमी दूर कासगंज के सोरों थाने के कातरवाड़ी में है। अरुण के माता-पिता नहीं है। घर में 14 साल की बहन और 12 साल का भाई है। वे चाची के साथ रहते हैं और फिलहाल गायब हैं। घर पर ताला लगा है। पड़ोसी बताते हैं कि अतीक के मर्डर के अगले दिन चाची बच्चों को लेकर कहीं चली गई।

कातरवाड़ी गांव में अरुण मौर्य का घर, यहां उसके छोटे भाई-बहन चाची के साथ रहते थे। अरुण के पिता 8 साल पहले पानीपत से गांव में रहने आए थे।

कातरवाड़ी गांव में अरुण मौर्य का घर, यहां उसके छोटे भाई-बहन चाची के साथ रहते थे। अरुण के पिता 8 साल पहले पानीपत से गांव में रहने आए थे।

घर के बाहर तीन पुलिसवाले कुर्सी लगाकर बैठे हैं। बिना प्लास्टर वाला ये घर अधबना सा दिखता है। बाहर के कमरे में तो दरवाजा भी नहीं है। अंदर कपड़े टंगे हैं, एक कोने में आलू का ढेर लगा है, आंगन में रखे चूल्हे में राख पड़ी है, इससे पता चलता है कि परिवार जल्दबाजी में निकला है।

गांव के लोग बताते हैं कि अरुण हरियाणा के पानीपत में पैदा हुआ था। वह दादा के साथ वहीं रहता था। 18 साल का अरुण 10वीं तक पढ़ा है। उस पर पानीपत में भी 2 केस दर्ज हैं।

Ramswaroop Mantri

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