इंदौर इंदौर में दिगंबर जैन संत आचार्य विमद सागर महाराज अपने आखिरी वक्त में ‘मौत का मुहूर्त नहीं होता’ किताब पढ़ रहे थे। पुलिस को ये किताब उनके बेडरूम से मिली है। 26 पन्नों की किताब विमद सागर ने खुद लिखी है। इसमें उन्होंने ‘छोटी मौत-बड़ी मौत’, ‘मुर्दा जिंदा का दर्पण है’, ‘मौत को मत भूलो’, ‘मौत का समय नहीं होता’, ‘मृत्यु महोत्सव भारी’, ‘मौत सबको चाहती’, ‘मौत की पीड़ा’ जैसे शीर्षकों से मौत की अलग-अलग व्याख्या की है।
पुलिस ने बेडरूम में बक्से में भरी किताबों और एक झोले में भरे कागजों को खंगाला। इस दौरान एक डायरी भी मिली। डायरी में अधूरी कविता की कुछ पंक्तियां लिखी मिलीं। आखिरी मुक्तक में उन्होंने जीवन सूखा रह जाने और जीवन नर्क हो जाने जैसी बातें लिखी हैं। लिखा- मेरा जीवन सूखा सा था, सूखा ही रह गया। स्वर्ग जैसी जिंदगी मैं नरक कर गया। अंतिम पंक्ति में आत्मा से आत्मा का धर्म न किया, पाप को करता रहा, मैं पाप में जिया, अपनी गलती का मुझे एहसास हो गया… लिखा है। उधर, सेवादारों ने बताया कि संत को लिखने-पढ़ने का शौक था।
शनिवार को फंदे से लटका मिला था शव
शनिवार को संत का शव धर्मशाला के कमरे में पंखे से फंदे पर लटका मिला था। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में फांसी लगने से मौत की वजह सामने आई है। वहीं, परिवार इसे षड्यंत्र बताकर जांच की मांग कर रहा है। परिवार का कहना है कि संत का एक हाथ टूटा था, वो 12 फीट ऊपर फंदा लगाकर फांसी लगा ही नहीं सकते।
विमद सागर महाराज का रविवार को अंतिम संस्कार हो गया। परदेशीपुरा थाना TI पंकज द्विवेदी घटनास्थल (संत सदन) नंदानगर पहुंचे और घटना का नाट्य रूपांतरण कराया। पुलिस जवान प्लास्टिक की कुर्सी लगाकर लोहे की टेबल पर चढ़ा और पंखे से नायलोन की रस्सी बांधी। फंदा बनाया और पैरों से टेबल हटा दी। जिस रस्सी से फंदा बनाया, वो हॉल में बने कुएं से पानी खींचने के लिए रखी थी।
परिवार कलेक्टर से मिल सकता है
आचार्यश्री की आत्महत्या के मामले में परिवार और सेवादारों के बयान पुलिस ने प्राथमिक तौर पर लिए हैं। वहीं, परिवार मामले में कलेक्टर मनीष सिंह और IG हरिनारायण चारी मिश्र से मिलकर एक अलग टीम बनाकर जांच की मांग कर सकता है। परिवार और महाराज के अनुयायियों का कहना है कि अगर वे तनाव में थे, तो इसकी वजह सामने आनी चाहिए।





