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ये बेतुके कानून…42 कानूनों के 183 प्रावधानों को खत्म करने का प्रस्ताव…

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नरेंद्र मोदी सरकार अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे तमाम वैसे कानूनों को खत्म करती आ रही है, जो अब प्रचलित नहीं थे या जिनका आज कोई औचित्य नहीं है। कई कानून बदले जा चुके हैं और कई को बदलने की प्रक्रिया चल रही है। इसी कड़ी में सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में ‘जन विश्वास (प्रावधान संशोधन)’ बिल पेश किया जो 42 कानूनों में सजा के प्रावधान को या तो पूरी तरह खत्म या फिर न्यायसंगत बनाता है। चीन पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक पेश हुआ लेकिन सदन के नेता पीयूष गोयल की गुजारिश पर इसे जॉइंट कमिटी को भेज दिया गया। 31 सदस्यों वाली संसदीय समित अब इस बिल के प्रावधानों को समीक्षा करेगी और बजट सेशन 2023 के दूसरे हिस्से में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। ‘जन विश्वास’ बिल के जरिए किस-किस तरह के प्रमुख कानूनों को बदलने की तैयारी है, आइए देखते हैं।

बैरंग चिट्ठी पर 2 साल तक जेल वाला कानून बदलेगा

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वैसे तो चिट्ठी का जमाना चला गया। हर घर और तकरीबन हर हाथ में मोबाइल है। एक जमाना था जब दूर रह रहे रिश्तेदारों, करीबियों का हाल-चाल जानने या कोई सूचना पहुंचाने का जरिया चिट्ठी ही होती थी। तब बिना पेमेंट किए यानी टिकट का खर्च दिए भी कुछ चिट्ठियां लिखी जाती थीं जो बाकायदे अपने पते पर पहुंचती भी थीं। इन चिट्ठियों को बैरंग कहा जाता था। बैरंग चिट्ठी के लिए डाक खर्च का भुगतान उसे पाने वाला करता था। अगर वह भुगतान न करे तो चिट्ठी भेजने वाले के लिए सजा का प्रावधान था। इंडियन पोस्ट ऑफिस ऐक्ट, 1889 के मुताबिक, बैरंग चिट्ठी भेजने पर 2 साल तक की जेल की सजा हो सकती थी। लेकिन अब ‘जन विश्वास बिल’ में इसे खत्म करने का प्रावधान है।

गाय-भैंस चराने पर भी हो सकती है जेल

वन विभाग की जमीन में अगर आप अपनी गाय, भैंस या कोई मवेशी चराते पाए जाते हैं तो इस पर भी सजा का प्रावधान है। इंडियन फॉरेस्ट ऐक्ट, 1927 के तहत अगर आपके मवेशी भटककर वन विभाग की जमीन में चला जाए, वहां चरने लगे तो आपको 6 महीने तक की सजा हो सकती है। अब लोकसभा में पेश किए गए बिल के जरिए सरकार सजा के प्रावधान को खत्म करने जा रही है। हालांकि, विधेयक में इसके लिए जुर्माने का प्रावधान बरकरार रखा गया है। इसमें 500 रुपये जुर्माने की व्यवस्था है।

आईटी ऐक्ट की धारा 66 A होगी खत्म

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‘जन विश्वास’ बिल के जरिए इंडियन इन्फॉर्मेशन ऐक्ट की विवादित धारा 66 ए को हटाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे हटाने को कह चुका है। कोर्ट ने अपने आदेश के बाद भी इस धारा के तहत केस दर्ज करने पर नाराजगी जाहिर की थी। अब सरकार इस धारा को कानून से ही खत्म करने वाली है। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आईटी ऐक्ट की धारा 66 ए को संविधान के आर्टिकल 19 (1) A के तहत मिले बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार के खिलाफ बताया था। इस धारा के तहत सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक या भड़काऊ पोस्ट पर गिरफ्तारी का प्रावधान था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद तमाम राज्यों में इस धारा के तहत केस दर्ज किया जाना और गिरफ्तारी बदस्तूर जारी रही जिसके बाद अक्टूबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने दो टूक कहा कि अब आईटी ऐक्ट की धारा 66 ए के तहत कोई भी केस दर्ज नहीं होगा।

पॉलिथीन बैग के लिए भी हो सकती है 6 महीने की सजा

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पॉलिथिन बैग पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं ये तो सब जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पॉलिथिन बैग को महज रखने या फिर उसके इस्तेमाल पर आपको जेल भी हो सकती है। कैंटोनमेंट ऐक्ट 2006 के मुताबिक अगर किसी शख्स के पास नॉन-बायोडिग्रेडेबल पॉलिथीन यानी जो खुद से सड़-गल न सके, मिलता है या इस्तेमाल करता पाया जाता है तो उसे 6 महीने तक जेल की सजा हो सकती है। ‘जन विश्वास’ बिल में इस सजा के प्रावधान को खत्म करने का प्रस्ताव है।

रेलवे स्टेशन या ट्रेन की बोगियों में भीख मांगने पर जेल

रेलवे ऐक्ट 1989 के तहत रेलवे स्टेशन या ट्रेन के कोच में भीख मांगने वालों के लिए जेल और जुर्माने का प्रावधान था। लेकिन ‘जन विश्वास’ बिल में जेल की सजा को खत्म करने का प्रस्ताव है। बिल में कहा गया है, ‘किसी भी शख्स को रेल के किसी भी डिब्बे या रेलवे के किसी भी हिस्से में भीख मांगने की इजाजत नहीं है।’

बिना इजाजत चाय की खेती पर सजा का प्रावधान बदलेगा

इसी तरह टी ऐक्ट, 1953 के मुताबिक सरकार ‘चाय की अवैध खेती’ के लिए जुर्माना लगा सकती है। इसके अलावा अगर किसी ने सरकार से इजाजत लिए बगैर चाय की खेती करता है तो कुछ स्थितियों में उसे जेल की सजा भी हो सकती थी। अब नए बिल में सजा के प्रावधान को खत्म करने का प्रस्ताव है।

माप-तौल अधिकारियों को झूठी सूचना देने पर सजा

लीगल मेट्रोलॉजी ऐक्ट, 2009 के तहत अगर कोई शख्स माप-तौल अधिकारी, कंट्रोलर या डायरेक्टर को झूठी सूचना देता है तो यह दंडनीय अपराध था। लेकिन ‘जन विश्वास’ बिल में कठोर प्रावधानों को खत्म करने का प्रस्ताव है। प्रस्ताव के मुताबिक, अब इस तरह के आरोपी उसी तरह जुर्माना देकर छूट सकते हैं जैसे ट्रैफिक नियमों के मामूली उल्लंघन पर छूट जाते हैं।

कई कानूनों में जेल की सजा खत्म होगी, कुछ में जुर्माना जारी रहेगा

ऊपर बताए गए सजा वाले कानूनी प्रावधानों को बदलने की तैयारी तो है ही, कई दूसरे कानूनों के भी ऐसे प्रावधान बदले जाएंगे। जैसे कलेक्शन ऑफ स्टैटिस्टिक्स ऐक्ट 2009 के तहत अकाउंट्स, दस्तावेज या रिकॉर्ड पेश करने में नाकामी पर सजा का प्रावधान है। अगर कोई झूठा या गुमराह करने वाला बयान देता है तब भी सजा का प्रवाधान है। अब जन विश्वास बिल में ऐसे कुछ मामलों में सजा के प्रावधान को खत्म करने और उसकी जगह पर महज जुर्माने का प्रस्ताव है। इसी तरह पब्लिक डेट ऐक्ट के तहत झूठे बयान पर जेल भेजने का प्रावधान है। नए बिल में इसे भी बदलने का प्रस्ताव है। कुल मिलाकर 42 कानूनों के 183 प्रावधानों को खत्म करने या उन्हें न्यायसंगत करने का प्रस्ताव है।

Ramswaroop Mantri

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