अग्नि आलोक
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वे डरने लगे हैं

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,मुनेश त्यागी

उनके पास सारा
तंत्र मंत्र, सरकार
नौकरशाही, फौज
पुलिस और अदालतें हैं,
फिर भी वह डरने लगे हैं।

वे डरते हैं क्योंकि
एक दिन
किसान मजदूर,
नौजवान मेहनतकश,
विद्यार्थी औरतें,
सब के सब,
इस सब दलबल
के बावजूद उनसे
डरना छोड़ देंगे।

वे डरने लगे हैं क्योंकि
जनता के बेटे बेटियों ने
इस जुल्मी व्यवस्था के
खिलाफ खड़ा होना और
इसे समझना शुरू कर दिया है।

वह डरने लगे हैं क्योंकि
जनता ने एकजुट होकर
ऐके का गोल बनाकर
संघर्ष करना सीख लिया है।

वे डरने लगे हैं क्योंकि
किसानों मजदूरों ने नारे बनाकर
नारे लगाना
सीख लिया है।

वे डरने लगे हैं क्योंकि
लोग लड़ना सीख गए हैं और
उन्होंने जान लिया है कि
यहां बिन लड़े कुछ नहीं मिलता।

वे डरने लगे हैं क्योंकि
यह देख कर कि
पहले जो जनता भीड़ थी,
अब जलूस बनने लगी है।

वे डरने लगे हैं क्योंकि
जनता क्रांतिकारी
समाज परिवर्तन की और
क्रांति की बातें करने लगी है।

Ramswaroop Mantri

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