चंद्रशेखर शर्मा
लगभग पूरे देश को खुश कर देने वाले भाला फेंक नीरज चोपड़ा ने अपनी शिखर कामयाबी उड़न सिख मिल्खा सिंह को समर्पित की है ! इस ओलिम्पिक के अपने तमाम पदकों की जो तमाम खुशियां हैं, उसका सबसे ऊंचा मानबिंदु नीरज का ये जेस्चर है ! ये देश के एक बहुत जिगरे वाले महान और बुजुर्ग खिलाड़ी की अंतिम आकांक्षा और स्मृति को एक युवा खिलाड़ी का आदरपूर्वक प्रणिपात (प्रणाम) है ! अभिमन्यु चक्रव्यूह में केवल घुसना जानता था। नीरज वो अभिमन्यु है जिसने सवा सौ साल से अभेद्य बने चक्रव्यूह को न केवल भेद दिया है, बल्कि दुनिया के तमाम महारथियों को परास्त कर विजेता योद्धा बनकर लौटा है। लौटा है और बोला है देश के इतिहास का यह पहला पराक्रम महान मिल्खा सिंह के नाम !
गोया वो महान मिल्खा सिंह से कह रहे हों कि, “पाजी, आपकी इच्छा थी न कि ट्रैक एंड फील्ड में भी देश का राष्ट्र गान गूंजे और तिरंगा फहरे ? लो, वो गूंज और सबसे ऊंचा और ऊपर फहराता तिरंगा आपके लिए हाजिर है !” सोचिए, मिल्खा सिंह जहां कहीं भी होंगे, नीरज के शब्दों के बाद उनसे ज्यादा आनंदित और गौरवान्वित कौन हुआ होगा ! नीरज इस जेस्चर के लिए आपको सेल्यूट !

कल जब पदक विजेता और अन्य खिलाड़ी देश लौटे, तब न्यूज चैनल ‘आज तक’ पर चल रहे कार्यक्रम में सुनील गावसकर (शायद इंग्लैंड से) भी शामिल थे। सनी ने कहा कि ऐसे मौकों पर अत्यधिक खुशी और गर्व से उपजे जो सबसे अलहदा और रोमांचक पल होते हैं, वो, वो होते हैं जब राष्ट्रगान बजता है ! उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। बहुत लोग होते हैं, जो इस मौके पर उस दृश्य को मात्र देखकर, खुद वो खुशी, गर्व और रोमांच महसूस करते हैं। कल इस चैनल पर करोड़ों लोगों ने इन्हीं सनी की आंख में पहली बार आंसू देखे ! हां, सनी को मैं खुद दशकों से टीवी पर नियमित देख रहा हूँ। उन्हें मजाक बहुत पसंद है, लेकिन ये पहली बार था, जो जाने क्या उनको ख्याल आया और वो अपने आंसू नहीं रोक पाए !
मन में सवाल है कि ये कौनसे भाव हैं ? ये कौनसा भाव है कि देश का और अपना पहला स्वर्ण पदक एक युवा खिलाड़ी एक महान, लेकिन मरहूम खिलाड़ी के नाम कर देता है ? इतने पत्रकारों ने नीरज से बात की, लेकिन किसी ने नीरज से ही नहीं पूछा कि वो क्या भाव था ? वो क्या भाव होता है कि पदक कोई एक बंदा लेता है और खुशी, गर्व और रोमांच पूरे देश को होता है ? जब क्रिकेट में इतिहास की पहली टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल टेस्ट खेला जा रहा था तो मैंने लिखा था कि उत्तम ये होगा कि विराट ये टेस्ट जीतकर इस उपलब्धि को मिल्खा सिंह के नाम समर्पित कर दें ! हालांकि हम वो मैच ही हार गए। यों ये बहुत अच्छा भी हुआ कि कुछ दिनों बाद ही नीरज ने बिना किसी के लिखे या कहे-सुने अपनी जीत उनके नाम कर दी ! मेरी तो केवल कामना थी, लेकिन कतई अंदाजा न था कि ठीक मेरे जैसी मुराद के साथ एक बंदा दूर टोक्यो ओलिम्पिक में भाला फेंक रहा था ! क्या देशप्रेम भी टेलीपैथी पसंद है ?
जय हिंद !
चंद्रशेखर शर्मा





