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यह स्वेच्छिक बदल है दलबदल नहीं

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शशिकांत गुप्ते इंदौर

सियासी तिजारत में सौदा मुकम्मल हो रहा है।सत्तर वर्ष से जमें कचरे से स्वेच्छ से बाहर आकर सियासी वाशिंगमशीन में धुलकर स्वच्छ हो गए हैं।स्वच्छता के कारण धर्म में आस्था प्रकट करेंगे और पवित्र रंग के झंडे को राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता देतें हुए उसके सामने नतमस्तक होंगे?पूर्ण रूप से राष्ट्रवादी हो जाएंगे,?लोकतंत्र में श्रीमंत महाराज अंतः मंत्री बनेंगे? राजनैतिक दलों में आम कार्यकर्ता की हैसियत झाड़ू लगाना, जाजम बिछाना और कुर्सियों को करीने से रखने की रह गई है।

गरीब देश में धनकुबेरों के साथ विश्व के सबसे सियासी दल की अंतरंगता के कारण  दल को भरपल्ले सहयोग राशि मिल रही है।यह सहयोग राशि का लेनदेन पारस्परिक होता है।यह लेनदेन बहुत ही निजी होता है।इसीलिए वर्तमान में आम कर्यकर्ता को झाड़ू लगना और दरी बिछाने  नहीं पड़ता है।यह काम अब धनकुबेरों के आर्थिक  सहकार्य के कारण ठेके पर होने लगा है।

अब कार्यकताओं का काम पार्टी के झंडे उठाना व्यक्तिपूजक नारे लगाना,और भारत माता की जय बोलना, और दूसरों से जबरन बुलवाना,रामप्रभु जय जयकार करते हुए, स्वयं अपनी आस्था को प्रकट करना और दूसरों से डराधमकाकर प्रभु की जय जयकार करवाना।यही कार्य आम कार्यकर्ताओं के जिम्मे रह गया है।देश के बुनियादी सवालों पर ध्यान देने की फुर्सत नहीं है।सौ रुपयों से ऊपर पेट्रोल बिकने के बाद यदि विपक्ष आंदोलन करता है तो मीडिया छोटी सी न्यूज बनाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझता है।महंगाई के कारण भलेही देश के आमजन की ऎसी की तैसी ही क्यो न हो रही हो?

मीडिया को अपने टीआरपी बढाने की चिंता है।इसीलिए न्यूज़ चैनलों पर महंगाई पर जब बहस करवाई जाती है,तब बहस के बीच बीच में पिज़्ज़ा और immunity बढाने के खाद्य पदार्थो के विज्ञापन दिखाए जातें हैं।यह सारा खेल सत्ता केंद्रित राजनीति के कारण खेला जा रहा है।हे प्रभुरामजी आप तो अंतर्यामी हैं।त्रेतायुग में पाषण पर सिर्फ आपका नाम लिखने से सागर में पाषण तैरने लगे थे।आप ने समुद्र पर फ्लोटिंग ब्रिज निर्मित किया था।है प्रभु आपसे आमजन की यही पार्थना है कि, आप इन पाषण हृदय सियासतदानों का हृदयपरिवर्तन कर दीजिए।इनलोगों आँखे और कान खोल दीजिए।इनलोगों आमजन की आह और कराह सुनाई दे।जमीनी समस्याएं दिखाई दे।आमजन यह समझता है कि, त्रेतायुग में दैत्यराज के दस मुँह थे।कलयुग में इनलोगों के अनगिनत मुखड़े है।आप तो इन्हें आसानी से पहचान सकतें हैं।हे प्रभु आपसे यही विनंती है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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