अग्नि आलोक
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ये बादशाह का हुक्म है

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पुनीत शर्मा

तुम्हारी अर्थियां उठें मगर ये ध्यान में रहे कि
मेरे लिये जो है सजी
वो सेज ना खराब हो
ये बादशा का हुक्म है

और एक हुक्म ये भी है
भले कोई भी मरे
मेरी इमेज ना खराब हो
सुनो मेरे मंत्रियों
सफेदपोश संत्रियो
जहां मिले जमीन खाली
रोप दो कपास को
कपास मिल में डाल कर
बुनो सफेद चादरें

गली गली में जाकर फिर
ढको हरेक लाश को
सवाल जो करे उसे
नरक में तब तलक रखो
कहे न जब तलक मुझे
कि आप लाजबाव हो

ये बादशा का हुक्म है
और एक हुक्म ये भी है
भले कोई मरे
मेरी इमेज ना खराब हो

खरीदो ड्रोन कैमरे
खिंचाओ मेरी फोटुयें
दिखाओ उसको न्यूज पे
करो मेरा प्रचार फुल
कहीं दिखे जो दाग
तो जबान से ही पौंछ दो
मगर ये ध्यान में रहे
जबान पे हो लार फुल
निकाल हर किसी की रीढ़
भीड़ वो बनाओ तुम
वो जुल्म पे, हिसाब पर
कभी न इंकलाब हो

ये बादशा का हुक्म है
और एक हुक्म ये भी है
भले कोई मरे
मेरी इमेज इमेज ना खराब हो

जो सत्य हो वही दिखे
ना लाग ना लपेट हो
न कोई पेड न्यूज हो
न झूठ का प्रचार हो
काट दे जो जुल्म को
जो चीर दे अनर्थ को
पत्रकार की कलम में
ऐसी तेज धार हो
सलाख डाल कर
निकाल कर
उछाल दो उसे
किसी की आंख में अगर
ये बेहूदा सा ख्वाब हो

ये बादशा का हुक्म है
और एक हुक्म ये भी है
भले कोई मरे
मेरी इमेज ना खराब हो

भले कोई मरे
मेरी इमेज ना खराब हो

पुनीत शर्मा

Ramswaroop Mantri

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