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गहलोत के बुलावे पर फिर नहीं आए तीन निर्दलीय विधायक… बसपा के भी कई विधायक लापता

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एस पी मित्तल, अजमेर

राजस्थान में चार सीटों हो रहे राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 31 मई की रात को प्रदेश के सभी 13 निर्दलीय विधायकों को जयपुर स्थित अपने सरकारी आवास पर बुलाया। लेकिन व्यक्तिगत बुलावे के बाद भी तीन विधायक खुसबीर सिंह रमिला खडिय़ा और बलजीत यादव नहीं आए। जो सयंम लोढ़ा लगातार सरकार की आलोचना करते हैं, वे 31 मई को सबसे पहले सीएम आवास पर पहुंचे और भरोसा दिलाया कि वे कांग्रेस के प्रत्याशियों को ही अपना वोट देंगे। रात 11 बजे तक चली इस बैठक में कांग्रेस के तीनों प्रत्याशी मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला और प्रमोद तिवारी के साथ साथ प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी उपस्थित रहे। सीएम और तीनों प्रत्याशियों ने उपस्थित 10 निर्दलीय विधायकों से एक एक कर संवाद किया। कुछ विधायकों ने अपनी समस्याएं भी रखी लेकिन आम तौर पर सभी विधायकों का कहना था कि सीएम गहलोत ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में विकास के अनेक काम करवाए हैं, इसलिए वे कांग्रेस के समर्थन में भी अपना वोट देंगे। बैठक में सीएम गहलोत ने कहा कि भाजपा के नेता निर्दलीय विधायकों से संपर्क कर रहे हैं। मुझे हर विधायक की जानकारी है। लेकिन किसी भी विधायक को डरने की जरुरत नहीं है। तीनों प्रत्याशियों ने भी भरोसा दिलाया कि निर्दलीय विधायकों को पहले की तरह कांग्रेस सरकार का समर्थन मिलता रहेगा। सीएम से इस मुलाकात के बाद किशनगढ़ के निर्दलीय विधायक सुरेश टाक जब  जयपुर से किशनगढ़ की ओर आ रहे थे कि रास्ते में ही उनकी मुलाकात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया से हो गई। सड़क किनारे कार में ही कोई डेढ़ घंटे तक पूनिया और टाक के बीच राजनीतिक मंत्रणा हुई। स्वाभाविक है कि इस वार्ता में पूनिया ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित सुभाष चंद्रा को वोट देने का आग्रह किया। पूनिया का यह आग्रह इसलिए भी मायने रखता है कि विधायक सुरेश टाक की पृष्ठभूमि भाजपा की रही है। गत बार जब भाजपा ने टाक को उम्मीदवार नहीं बताया तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और विधायक बने। पूनिया और टाक के बीच हुई मुलाकात की खबर रात को ही सरकार तक पहुंच गई। यही वजह रही कि होते होते टाक के किशनगढ़ स्थित आवास पर सुरक्षा कर्मी तैनात कर दिए गए। अब विधायक टाक की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

मैं अशोक गहलोत के साथ-टाक:

निर्दलीय विधायक सुरेश टाक ने स्पष्ट किया है कि वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ हैं। भले ही उनकी विचारधारा भाजपा की रही हो। टाक ने कहा कि किशनगढ़ की जनता ने उन्हें विकास के मुद्दे पर चुनाव जिताया था। मैंने किशनगढ़ के विकास के जो भी प्रस्ताव सीएम गहलोत के समक्ष रखे उन्हें मंजूर किया गया है। यही वजह है कि आज किशनगढ़ का तेज से विकास हो रहा है। किशनगढ़ का और विकास करवाने के लिए वे राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों को ही अपना वोट देंगे।

प्रत्याशी चिंतित:

सुभाष चंद्रा की उम्मीदवारी से राजस्थान के कांग्रेस के तीनों प्रत्याशी चिंतित हैं। असल में चंद्रा ने अपनी उम्मीदवारी से चुनाव को रोचक बना दिया है। चंद्रा को जीतने के लिए 41 वोट चाहिए। चंद्रा के पास भाजपा के 30 सरप्लस वोट हैं। ऐसे में चंद्रा को 11 वोटों का जुगाड़ करना है। हनुमान बेनीवाल की आरएलपी के तीन वोट चंद्रा के बताए जा रहे हैं। बसपा, निर्दलीय और बीटीपी के विधायक भी चंद्रा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि कांग्रेस के प्रत्याशियों की चिंता बढ़ी हुई है। जानकार सूत्रों के अनुसार 31 मई की रात को ही बसपा के 6 विधायकों को भी सीएम आवास पर आमंत्रित किया गया था, लेकिन जोगेंद्र अवाना और दीपचंद खेरिया ही आए। बसपा के चार विधायक लापता बताए गए। यहां यह उल्लेखनीय है कि बसपा के जो छह विधायक कांग्रेस में शामिल हुए हैं, उन पर कांग्रेस का व्हीप लागू नहीं होगा। चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है कि राजस्थान में भी हरियाणा की तरह विधायकों के वोट निरस्त हो सकते हैं। वर्ष 2016 में सुभाष चंद्रा ने हरियाणा से भाजपा के समर्थन से ही राज्यसभा का चुनाव जीता था। तब कांग्रेस के 14 विधायकों के वोट निरस्त हो गए। यानी ऐसे विधायक व्हीप के उल्लंघन के दायरे में नहीं आए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि व्हीप जारी होने के बाद पार्टी के हर विधायक को अपना वोट पार्टी के प्रतिनिधि को दिखा कर डालना होता है। विधानसभा में उपसचिव रहे और कई बार राज्यसभा चुनाव करवाने वाले विशेषज्ञ सुरेश जैन का कहना है कि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीनों उम्मीदवारों की वरीयता निर्धारण की है। अभी तक कांग्रेस में अपने प्रत्याशियों की वरीयता घोषित नहीं की है। इसलिए तीनों प्रत्याशी चिंतित हैं। जैन ने बताया कि यदि कोई विधायक व्हिप का उल्लंघन करता है तो उसकी विधायकी पर कोई खतरा नहीं है। क्योंकि व्हीप पार्टी द्वारा जारी किया जाता है। पार्टी अपनी ओर से विधायक को नोटिस जारी कर सकती है। इस मामले में अनेक कानूनी पेचीदगियों है। इसी का फायदा व्हिप का उल्लंघन करने वाले विधायक उठाते हैं। लेकिन जिस तरह से वोट निरस्त होने की परंपरा चल रही है उसकी वजह से व्हिप का उल्लंघन नहीं माना जाता है।

कांग्रेस का ट्रेनिंग कैंप शुरू:

राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस के विधायकों का ट्रेनिंग कैंप जयपुर की होटल क्लार्क में शुरू हो गया है। 2 जून तक चलने वाले इस कैंप में सभी विधायकों को आमंत्रित किया गया है। कैम्प में कांग्रेस के प्रत्याशी भी उपस्थित रहेंगे। माना जा रहा है कि 2 जून के बाद कांग्रेस के सभी विधायकों को उदयपुर की होटलों में 10 जून तक रखा जाएगा।  10 जून का ही राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव होना है। निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के विधायकों को भी कांग्रेस की ओर से उदयपुर में ही आमंत्रित किया गया है। 

Ramswaroop Mantri

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