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लोकतंत्र विरुद्ध अधिनायकवाद…!

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शशिकांत गुप्ते इंदौर

बरतानिया हुक़ूमत भारतीय क्रांतिकारियों को देशद्रोही कहती थी।अंग्रेज विदेश से व्यापारी बन कर आए और अपने देश पर हुक़ूमत करने लग गए।
क्रांतिकारियों ने बरतानिया हुकूमत के विरुद्ध आंदोलन किया।स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान असंख्य देशभक्तों ने अपनी कुर्बानी दी।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद गांधीजी ने कहा कि,वे अब क्रांति अच्छे से कर पाएंगे।गांधीजी ने क्रांति की व्यापक वाख्या की है।
1947 की स्वतंत्रता के बाद, 1977 में जो सत्ता परिवर्तन हुआ उसे दूसरी आजादी की संज्ञा दी गई।
सन 1977 का सत्ता परिवर्तन कांग्रेस की पराजय नहीं थी।वास्तव में यह अधिनायकवादी प्रवृत्ति की हार थी।जो निहायत जरूरी थी।
गैर कांग्रेसवाद का नारा बुलंद करने वाले समाजवादी विचारक चिंतक क्रांतिकारी स्व.डॉ रामनोहर लोहियाजी ने कहा था कि,जब कांग्रेस में अधिनायकवाद समाप्त होगा, तब हम कांग्रेस से भी हाथ मिलाने के लिए पीछे नहीं हटेंगे।
वर्तमान में कांग्रेस मुक्त भारत की घोषणा के पीछे अहंकार झलकता है।जिस दल से देश की मुक्त करने की घोषणा जोरशोर से की जाती है, उसी कांग्रेस के लोगों को एनकेनप्रकारेण अपने दल में शरीक करना आश्चर्यजनक ही है।
देश को कांग्रेस मुक्त करने की घोषणा करना और स्वयं को कांग्रेस युक्त बनाना सखेद आश्चर्य है।
राजनीति में पनपता अधिनायकवाद लोकतंत्र को कमजोर करता है।अधिनायकवाद के कारण एक ही व्यक्ति के हाथों सत्ता केंद्रित हो जाती है।ऐसा व्यक्ति अपने इर्दगिर्द हॉ में हॉ मिलाने वालों को पंसद करता है।
ऐसा व्यक्ति अहंकार में इतना चूर हो जाता है कि, अपनी आत्ममुग्धता में लीन हो जाता है।यह प्रवृत्ति अंतः उसी व्यक्ति के लिए ही घातक होती है।
विश्व के सबसे बडे तानाशाह हिटलर को चौदह महीने पश्चात पता चला कि,उसकी सेना रूस में हार गई है।
अधिनायकवादी मानसिकता का व्यक्ति लोकतंत्र से भयभीत रहता है।
बार बार यह स्मरण में आता है कि,भारत की भूमि में लोकतंत्र और धर्म निरपेक्षता मजबूती से रची बसी है।यह भारत भूमि का प्राकृतिक गुण है।प्रकृति का नियम है कि, जो प्रकृति से खिलवाड़ करता है,वह असफल ही होता है।
जैसा कि,शुरुआत में कहा गया है कि, बरतानिया हुक़ूमत क्रांतिकारियों को देशद्रोह की धारा 124 A का इस्तेमाल कर जैल में डाल देती थी।अंग्रेजी हुक़ूमत ने इस धारा का इस्तेमाल गांधीजी और तिलकजी पर भी किया है।
बहुत ही दुःखद स्थिति है कि, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उक्त धारा का इस्तेमाल विरोधियों के लिए जाता है।यह इस्तेमाल कमोबेश हरएक सरकार ने किया है।सन 2014 के बाद तो धारा 124 A के इस्तेमाल का प्रतिशत बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
124 A के बढतें इस्तेमाल को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने भी यह चिंता व्यक्त की है।
अंग्रेज लोग व्यापारी बन कर भारत में आए थे, और हुक़ूमत करने लग गए।वर्तमान में पूजीवादी व्यवस्था के चलतें सत्ता पर व्यापारियों का वर्चस्व है।
यह सब अधिनायकवादी प्रवृत्ति के कारण ही है।

Ramswaroop Mantri

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