उज्जैन के व्यापारियों का हजारों क्विंटल गेंहू बंदरगाह पर अटका है। इसके कारण व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। उज्जैन कृषि उपज मंडी के व्यापारी संघ ने केंद्र व राज्य सरकार से निर्यात नीति में फेरबदल नही करने का अनुरोध किया था।
सुनवाई नहीं होने से प्रदेश व्यापारी महासंघ के आव्हान पर 17 और 18 मई को मंडी में नीलामी नहीं करने का निर्णय लिया गया है। सरकार द्वारा अचानक गेहूं निर्यात पर रोक लगा देने से व्यापारियों की चिंता बढ़ी है। वही उज्जैन से अनाज लेकर गए हजारों ट्रक खाली होने के इंतजार में बंदरगाह पर खड़े हैं।
कृषि उपज मंडी के व्यापारियों का कहना है कि गुजरात के कांडला पोर्ट पर जो 5000 ट्रक खाली होने के इंतजार में खड़े हैं। इनमें उज्जैन जिले के करीब 100 ट्रक भी शामिल है। सरकार द्वारा अचानक गेंहू निर्यात पर रोक लगा दी गई। निर्यातक कंपनियों ने माल लेने से मना कर दिया है। इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान होगा।
व्यापारियों ने इस मामले में सांसद अनिल फिरोजिया को ज्ञापन देकर मांग रखी है कि व्यापारियों का जो माल कांडला पोर्ट पर पहुंच चुका है उसका निराकरण करवाएं। वहीं सांसद अनिल फिरोजिया ने व्यापारियों को आश्वासन दिया है कि जल्दी ही इस समस्या का हल निकाल लिया जाएगा।
व्यापारियों का कहना है कि दो दिन की हड़ताल के बाद भी सरकार ने अपनी विदेश नीति में बदलाव नहीं किया तब वो अनिश्चित हड़ताल पर भी जा सकते हैं। उज्जैन कृषि उपज मंडी समिति के राजेंद्र राठौर ने बताया कि दो माह से चल रहे गेहूं निर्यात पर सरकार द्वारा रोक लगा देने से करोड़ों का कारोबार प्रभावित हो गया है।
प्रदेश भर के अनाज कारोबारी केंद्र व राज्य सरकार से गुहार कर रहे हैं कि 15 दिन तक निर्यात नीति में फेरबदल न किया जाए, ताकि लोडिंग किया हजारों क्विंटल गेहूं पोर्ट पर अनलोड हो जाए व सौदे के गेहूं की डिलीवरी हो जाए। लेकिन सरकार सुनवाई करने को तैयार नहीं है।





