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पुलिस महकमे में अफसरों के घर चाकरी कर रहे ट्रेडमैन

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भोपाल। पुलिस की परीक्षा पास कर ट्रेड मेन के पद पर पदस्थ हुए स्टाफ ने सालों की नौकरी और प्रमोशन के बाद अफसरों के घर चाकरी से निजात दिलाने की गुहार बाबा महाकाल से लगाई है। प्रदेश के पुलिस महकमे में करीब 5500 पुलिस ट्रेडमैन हैं, जिसमें कुक, नाई, धोबी, मोची, ड्राइवर, स्वीपर आदि शामिल हैं। इन सभी की तरफ से गए एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को अपनी व्यथा लेकर बाबा महाकाल के दरबार में अर्जी लगाई। जवानों ने बाबा महाकाल के दरबार में सौंपे पत्र में कहा है कि कंधे पर खाकी वर्दी और हाथों में पुलिस का पहचान पत्र होने के बावजूद उनकी पूरी सर्विस अफसरों के घरों में गुलामोंच की तरह बीत रही है। यहां तक कि नियम के अनुसार प्रमोशन पाकर हवलदार, एएसआई और सब-इंस्पेक्टर बनने के बाद भी इन्हें साहबों के घर की रसोई और बगीचों में ड्यूटी देनी पड़ रही है। इन सभी मे महाकाल से प्रार्थना की है कि उन्हें भी अब थानों में कानून व्यवस्था संभालने की ड्यूटी देते हुए उनकी सेवाओं को सामान्य ड्यूटी (जीडी) के तहत जिला बल में मर्ज किया जाए।
नहीं हुई सुनवाई तो पहुंचे महाकाल के द्वार
अपनी मांगों को लेकर ये जवान पिछले 12 साल से कई बार डीजीपी, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री से गुहार लगा चुके हैं। इसके बाद भी इनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अब इन जवानों ने हारकर महाकाल के दरबार को चुना है। इन ट्रेडमेनों ने अब बाबा महाकाल को अर्जी देकर देकर गुहार लगाई है कि अब सरकार का दिल पसीजे और उन्हें भी फील्ड में ड्यूटी का मौका मिल सके। जवानों का कहना है कि वे खाकी पहनकर प्रदेश की सुरक्षा में योगदान देना चाहते हैं और उन्हें किसी अफसर के बंगले पर व्यक्तिगत सेवा करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
प्रदेश में 2012 में ट्रेडमैन के संविलियन पर लगी थी रोक
महाकाल के चरणों में सौंपी गई अर्जी में इन पुलिसकर्मियों ने मार्मिक शब्दों में अपना दर्द बयां करते हुए लिखा है कि आज हमारी वर्दी अपमान स से झुकी हुई है और हम नहीं चाहते कि भविष्य में हमारे बच्चे हमें गुलाम कहें। इन जवानों की मुख्य मांग यही है कि उन्हें ट्रेड कैडर से हटाकर जनरल ड्यूटी (जीडी) में मर्ज किया जाए, ताकि वे फील्ड में पुलिसिंग कर सकें। गौरतलब है कि इससे पहले नियम था कि किसी भी ट्रेडमैन की पांच साल की सर्विस पूरी होने के बाद उसे जीडी में मर्ज कर दिया जाता था। 2012 में तत्कालीन डीजीपी नंदन दुबे के कार्यकाल में इस व्यवस्था पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई थी। जवानों का आरोप है कि अफसरों ने अपने निजी स्वार्थ और घरों पर अर्दली व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इस नियम को बंद करवा दिया। इन आरक्षकों का दावा है कि एमपी के अलावा अन्य राच्यों में अब भी ट्रेडमैन को पांच साल की सर्विस के बाद डीजी में तैनात कर फील्ड पोस्टिंग दे दी जाती है, लेकिन प्रदेश में पदोन्नति मिलने के बाद भी ट्रेडमैन का काम नहीं बदलता।
ट्रेडमैन के संविलियन पर सख्त है पीएचक्यू
गौरतलब है कि ट्रेडमैन के संविलियन पर पीएचक्यू अब सख्ती बरत रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ट्रेडमैन के सिलेक्सन और डीजी के सिलेक्शन प्रोसेस में अंतर होता है। इनकी भर्ती के लिए अहर्ताएं भी अलग अलग होती हैं। इसके अलावा ट्रेडमैन और डीजी ड्यूटी के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में कॉम्पीटिशन का स्तर भी अलग-अलग होता है। पीएचक्यू ने विगत दिनों रेडिया शाखा में आरक्षक के पदों के संविलियन पर भी रोक लगाते हुए कहा था कि दोनों पदों के लिए भर्ती नियम अलग-अलग हैं। रेडियो शाखा भी ट्रेडमैन में आती है लेकिन वहां पर आरक्षक स्तर की भर्ती के लिए गणित और विज्ञान की अनिवार्यता होती है। ऐसे में डीजीपी कैलाश मकवाणा ने आदेश जारी कर दिया था कि अब रेडियो शाखा में बी अन्य ट्रेडमेन का संविलियन नहीं किया जाएगा।

Ramswaroop Mantri

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