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राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छीने जाने के खिलाफ कोर्ट जाएगी तृणमूल कांग्रेस

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सोमवार, 10 अप्रैल को चुनाव आयोग ने ‘तृणमूल कांग्रेस’, ‘राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया’ से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छीन लिया है। जबकि आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिया गया। ममता बनर्जी चुनाव आयोग के इस फैसले को जल्द ही कोर्ट में चुनौती दे सकती हैं।

जब 3 पार्टियों का राष्ट्रीय दर्जा छीना गया, फिर TMC ही सवाल क्यों उठा रही है? किसी पार्टी को राष्ट्रीय दर्जा मिलने की क्या शर्तें हैं? राष्ट्रीय पार्टी के क्या फायदे होते हैं? भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे ही 8 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे…

सवाल 1: चुनाव आयोग ने 3 दलों से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा क्यों छीना?
जवाब: किसी दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए नीचे दी गई 3 शर्तें में से एक पर खरा उतरना पड़ता है…

1. लोकसभा की कुल सीटों में से 2% सीटें कम से कम तीन राज्यों में जीतना जरूरी है।

2. 4 या ज्यादा राज्यों के विधानसभा चुनाव में कम से-कम 6% वोट हासिल हुआ हो।

3. 4 या इससे ज्यादा राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी की मान्यता मिली हो।

चुनाव आयोग ने कहा कि ‘द इलेक्शन सिंबल- रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट ऑर्डर 1968’ के नियमों के मुताबिक तृणमूल, NCP और CPI ऊपर की तीन में से कोई भी शर्त पूरी नहीं कर रही हैं। इसीलिए इन दलों को मिला राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खत्म कर दिया गया है।

सवाल 2: चुनाव आयोग ने इस फैसले के पीछे कौन से दो तर्क दिए हैं?
जवाब: तृणमूल कांग्रेस से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छीनने के पीछे चुनाव आयोग ने दो तर्क दिए हैं…

1. 2 सितंबर 2016 को तृणमूल कांग्रेस को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था, जब आयोग ने ‘द इलेक्शन सिंबल- रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट ऑर्डर 1968’ कानून में बदलाव किया था।

चुनाव आयोग ने इस कानून को बैकडेट से लागू किया था। इसके मुताबिक TMC को 1 जनवरी 2014 से नेशनल पार्टी का दर्जा मिला। तब से दो लोकसभा चुनाव और 21 राज्यों के विधानसभा चुनाव में तृणमूल के प्रदर्शनों के आधार पर अब उससे नेशनल पार्टी का दर्जा छीना गया है।

2. मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में TMC के पास राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा नहीं रहा। ऐसे में कानूनन राष्ट्रीय पार्टी होने के लिए कम से कम 4 राज्यों में राज्य स्तरीय पार्टी होने के पैमाने को TMC पूरा नहीं कर रही है। अब तृणमूल कांग्रेस के पास सिर्फ 3 राज्यों में राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा है।

सवाल 3: TMC को चुनाव आयोग के इस फैसले पर एतराज क्यों है?
जवाब: तृणमूल कांग्रेस के विरोध का आधार ये है कि 2016 में कानून बदला गया है और इसी समय TMC को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला। नए कानून के मुताबिक पार्टियों के स्टेटस पर 10 साल बाद रिव्यू होना था। यानी 2026 तक TMC से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस नहीं लिया जाना चाहिए।

इसके साथ ही TMC का कहना है कि नियमों के मुताबिक चुनाव आयोग को 2024 लोकसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय पार्टी के स्टेटस का रिव्यू करना चाहिए। इससे पहले रिव्यू करके TMC के राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खत्म करना गलत है।

सवाल 4: TMC जिस आधार पर कोर्ट जा रही है, वो कानूनी तौर पर कितना सही है?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता का कहना है कि राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा किसे मिलेगा, इसको लेकर विवाद नहीं है। विवाद ‘टाइमिंग को लेकर है। मतलब ये कि राष्ट्रीय पार्टी का स्टेटस कब डिसाइड और रिव्यू किया जाए। पहले हर 5 साल में इसका रिव्यू होता था, लेकिन 2016 में इसे बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया।

  • TMC के मामले में चुनाव आयोग का कहना है कि 2014 के हिसाब से देखें तो रिव्यू 2024 में होना चाहिए, लेकिन लोकसभा चुनाव में सभी पार्टियों को इसी आधार पर छूट मिलती है। ऐसे में चुनाव से पहले रिव्यू किया गया है।
  • वहीं, TMC का कहना है कि जब 10 साल का समय पूरा नहीं हुआ है तो लोकसभा इलेक्शन रिजल्ट के बाद रिव्यू होना चाहिए।

विराग कहते हैं कि इसी पेंच के चलते पार्टी कोर्ट जाएगी। इसके बाद कोर्ट में तीन आधार पर इस मामले को परखा जाएगा…

1. अमेंडमेंट में क्या था।

2. TMC ने चुनाव आयोग के सामने अपनी बातें कैसे रखीं।

3. चुनाव आयोग ने नेचुरल जस्टिस के आधार पर कोर्ट में क्या जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि अब देखने वाली बात ये होगी कि TMC का आगे क्या स्टैंड रहता है।

सवाल 5: नया कानून होने के बावजूद इस विवाद के पैदा होने की वजह क्या है?
जवाब: विराग कहते हैं कि सही मायने में चुनाव आयोग को नेशनल पार्टी स्टेटस पर रिव्यू चुनाव के बाद ही करना चाहिए। हालांकि नया कानून होने के बावजूद इस तरह के विवाद पैदा होने की दो वजहें हैं…

1. 2016 में जब कानून में बदलाव हुआ तो 10 साल में रिव्यू कब होगा, इसको लेकर डेडलाइन तय नहीं की गई।

2. अगर 10 साल बाद लोकसभा चुनाव नजदीक हो तो रिव्यू चुनाव से पहले हो या बाद में हो। इसको लेकर भी स्पष्टता नहीं है।

विराग कहते हैं कि ये 2 वजह इस विवाद की जड़ हैं। आगे इस तरह के विवाद न हों, इसके लिए कानून में स्पष्टता लाना बेहद जरूरी है।

Ramswaroop Mantri

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