पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.
वैश्विक जानकार कहते कि ट्रेड डील ट्रम्प ने मोदीजी को गनपोइंट जैसी धमकी के साथ अपनी जिद्द व शर्तों पर घुटने टिकवा कर की है.ट्रम्प की खुद की दादागिरी इतनी कि जो कुछ भी जानकारी दूँगा वो स्वयं मेंही दूँगा और कृषि, डेयरी या ऊर्जा के क्षैत्र में जैसे चाहूँगा वैसे प्रवेश करूँगा.भारत की सरकार को गर्दन झुकाए मेरी हर बात पर झुकना और मत्था ही नीचे रखना होगा.किसी प्रकार आनाकानी की तो छोड़ूँगा नहीं.वैसा सामान्य समझदार यही कहेगा जब ट्रेड डील होती है तो बराबरी के हित व परस्पर आपसी बराबरी की शर्तों पर ही होती है मगर शायद दुनिया में दो देश याने अमेरिका व भारत के बीच हुई ट्रेड डील अनूठी,अनोखी व अदभुत है जिसमें सिर्फ जो अमेरिका ने चाहा उस पर गर्दन झुकाकर भारत ने विरोध तो छोड़ो अपने हितों तक बचाने वास्ते आनाकानी तक करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया.सारी बाते छोड़ दो मगर जब ट्रम्प ने इंडोनेशिया पर 20% तो इंडोनेशिया ने अमेरिका पर 20%, वियतनाम पर 20%तो उसने अमेरिका पर 20%,चीन पर 34%लगाया तो चीन ने अमेरिका पर भी 34%, कनाडा पर अमेरिका ने 25% तो कनाडा ने 25%,इसी तरह अमेरिका ने मलेशिया,क्यूबा, जर्मनी,जापान,फ्रांस,डेनमार्क,इंग्लैंड,दक्षिण अफ़्रीका, ब्राजील,मलेशिया,साउथ कोरिया से लेकर इंग्लैंड तक पर जितना टैरिफ़ लगाया उपरोक्त सारे देशों ने अमेरिका पर भी उतना ही टैरिफ़ लगाया.इतना ही नहीं बंगला देश जैसे टुचिये देश ने भी अमेरिका द्वारा लगाए 20% टैरिफ़ जितना ही उस पर लगाया मगर भारत ही दुनिया में एक इकलौता देश है जिस पर एक तरफा अमेरिका द्वारा लगाए 18% टैरिफ़ के मुकाबले भारत ने ट्रम्प से डरकर नाक रगड़ते अमेरिका पर सिर्फ़ 0% याने नो टैक्स नो टैरिफ़ पर घुटने टेक लिए मगर दूसरी घटना उससे भी ज़्यादा खतरनाक हुई कि जैसे ही पीयूष गोयल ने संसद में आकर मोदी सरकार को बचाने व होशियारी दिखाने की कोशिश करते कहा कि हमारी भी संप्रभुता है कि हमे जिस देश से सस्ता तेल मिलेगा वहीं से ख़रीदेंगे,हम किसी से नहीं दबेंगे तो सिर्फ़ एक दिन बाद ही ट्रम्प ने भारत सरकार को धमकाया कि ख़बरदार अगर रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष एक बूंद भी पेट्रोल लिया या लेते पकड़े गए तो फिर से संकट में ही फँस जाओगे , हम भारत पर टोटल विजिलेंस याने अपनी पूरी निगरानी रखेंगे,इस पर सीधे रूप से भारत की पूरी जासूसी भी करेंगे.याने भारत अपनी संप्रभुता की कोई रक्षा भी नहीं कर पाएगा,उसके लिए उसे अमेरिका की मेहरबानी पर ही निर्भर रहना होगा याने मोदी जी ने भय के मारे इतने झूककर ऐसी ट्रेड डील करली है कि भले ही भारत में कोई सरकार हो मगर उसे ट्रम्प से पूछकर और आज्ञा लेकर ही अपने फैसले लेने होंगे.याने देश व देश के हितों को हमने ट्रम्प के हाथों में क़ैद करवाकर हमारी सरकार ने देश को उसके हाथों में नाचने वाली कठपुतली बनाकर रख दिया. याने अगर हमने कृषि व डेयरी क्षैत्र को भी किंचित मात्र बचाने की कोई गुस्ताखी कर ली तो ट्रम्प हमारी गर्दन मरोड़ देगा.✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️






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