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ट्रम्प को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका,टेरिफ रद्द

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सनत जैन

अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया है। अमेरिका की सर्वोच्च अदालत की 9 जजों की खंडपीठ ने 6 जजों के बहुमत से राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पिछले 1 साल मैं जिन देशों के ऊपर टैरिफ लगाया गया था, उसको अवैध करार दिया है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अधिकांश देशों पर टैरिफ लगाकर समझौते के लिए जो दबाव बनाया जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार राष्ट्रपति को इस तरह से टेरिफ़ लगाने का कोई अधिकार ही नहीं था। इसके बाद भी डोनाल्ड ट्रंप ने आपातकालीन अधिकारों का प्रयोग करके, सारी दुनिया के देशों को डरा-धमकाकर मनमाफिक तरीके से समझौते करना चाहते थे। इसमें कुछ हद तक डोनाल्ड ट्रंप सफल भी हो गए हैं।

भारत जैसे बड़े राष्ट्र को उन्होंने अपने शिकंजे में कस लिया है। भारत के साथ उन्होंने द्विपक्षी व्यापार मे टैरिफ को लेकर समझौता करने में सफल रहे हैं। इसी तरह का समझौता उन्होंने कई अन्य देशों के साथ भी पिछले कुछ महीनो में किए हैं। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ का भय दिखाकर जो समझौते किए हैं। उस समझौते में कहीं ना कहीं ट्रंप का परिवार का फायदा शामिल है।

जिस तरह से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के मित्र देशों और दुनिया के अन्य देशों में टैरिफ का भय दिखाकर अमेरिका के राष्ट्रीय हितों और अमेरिका की साख को एक बड़ा नुकसान पहुंचाने का काम किया है। इसके साथ ही टेरिफ़ के कारण अमेरिका की महंगाई बढी है, अमेरिका के व्यापारियों को बड़ा नुकसान हुआ है। टैरिफ के कारण सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका को भोगना पड़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने। इसके बाद अमेरिकी कानून के अनुसार वह तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते हैं।

एक तरह से उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल का फायदा अपने परिवार को पहुंचाने के लिए, जो रणनीति अपनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के निर्णय की समीक्षा कर उसे पूरी तरह से अवैध करार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है इस तरह के अधिकार केवल संसद को प्राप्त हैं। राष्ट्रपति को कुछ अधिकार आपातकालीन स्थितियों के लिए दिए गए थे। टेरिफ़ का निर्णय विषम परिस्थिति मे किसी एक या दो राष्ट्रों के साथ हो सकती थी। जिस तरह से डोनाल्ड ट्रंप ने इस कानून के तहत आपातकालीन अधिकार का इस्तेमाल करके मनमाने तरीके से टेरिफ़ लगाए गए हैं। वह अधिकारों का दुरुपयोग है।

अमेरिका के व्यापारी यह मुकदमा विभिन्न अदालतों में लड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सभी अदालत से ट्रंप को मुंह की खानी पड़ी थी। टैरिफ लगाए जाने के बाद अमेरिका में महंगाई बढ़ रही थी। अमेरिका के व्यापारियों के व्यापारिक हित प्रभावित हो रहे थे। ट्रंप का दावा था, टैरिफ लगाने से लगभग 600 अरब डॉलर का फायदा अमेरिका को हुआ है। इसका भार अमेरिका के नागरिकों और अमेरिका के व्यापारियों पर पड़ा है। टेरिफ़ को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर दिखाना पूरी तरह गलत था। अब यह बात सामने आ गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए अपने परिवार के कारोबार को बढ़ाने के लिए अधिकारों का दुरुपयोग किया है।

असल में अमेरिका मे इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनामिक पावर्स एक्ट लागू है । इसके तहत राष्ट्रपति को गंभीर खतरा और असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में कुछ विशेष शक्तियां दी गई थी। इन शक्तियों के माध्यम से राष्ट्रपति तात्कालिक रूप से विदेशी लेनदेन पर रोक या प्रतिबंध लगा सकते थे। इस अधिकार का दुरूपयोग करते हुए ट्रम्प ने टैरिफ के माध्यम से दुनिया के सभी देशों को डरा धमकाकर मनमाने तरीके से समझौता करने का जो दवाब बनाया था। वह अमेरिकी हितों के लिए नहीं, वरन ट्रंप परिवार के लिए उपयोगी था।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ना तय हैं। पिछले 1 वर्ष में इस तरह के आरोप ट्रम्प पर लग रहे हैं। वह अपने पारिवारिक और व्यापारिक हितों के लिए पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस फैसले के बाद निश्चित रूप से डोनाल्ड ट्रंप की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। भारत-पाकिस्तान बांग्लादेश एवं कुछ अन्य देशों के साथ जो समझौतेअमेरिका द्वारा किए गए हैं। वह भविष्य में भी मान्य रहेंगे। समझौता दोनों पक्षों की सहमति के रूप में देखा जा रहा है। जिन देशों ने अमेरिका के साथ समझौते नहीं किए हैं। उनके टैरिफ अपने आप रद्द हो जाएंगे। अमेरिका की सरकार को कंपनियों और व्यापारियों को टेरिफ के कारण जो राजस्व अमेरिकी सरकार द्वारा वसूला गया था।

उसे वापस भी करना पड़ सकता है। एक तरह से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में दादागिरी करते हुए अपने निजी एवं पारिवारिक हितों को ध्यान में रखते हुए जो निर्णय ले रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अब उसे पर रोक लग गई है। इसकी बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया अमेरिका सहित सारे विश्व के देशों में होना तय है। अब देखते हैं, सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अमेरिका में इस मामले का पटाक्षेप किस रूप में दुनिया को देखने को मिलता है।

भारत ने अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर जो समझौता किया है। वह भारत के लिए एक फंदा बन गया है। भारत इससे कैसे बाहर निकलेगा,इसका रास्ता भारत को ही निकलना होगा। भारत सरकार ट्रंप के सामने इतनी बेवस क्यों हैं? इसको लेकर भारत की राजनीति में भी इसका असर देखने को मिलने लगा है।

Ramswaroop Mantri

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