अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया इजरायल यात्रा और उनके जोरदार स्वागत में कई अहम राजनयिक संदेश छिपे हैं. ये संदेश गाजा युद्धविराम, नेतन्याहू सरकार के लिए समर्थन और मध्य-पूर्व की शांति योजना से जुड़े हैं. यह यात्रा ट्रंप द्वारा इजरायल-हमास युद्धविराम को अंतिम रूप देने और बंधकों की रिहाई के बाद हुई है. इजरायल में उनका नायक जैसा स्वागत एक ऐसे नेता के रूप में उनकी छवि को पुष्ट करता है, जिन्होंने युद्ध को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें व्हाइट हाउस में इजरायल का महानतम मित्र बताया.
अपनी यात्रा के दौरान ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में ‘नए युग के ऐतिहासिक उदय’ की बात की. इससे यह संदेश गया कि यह समझौता केवल युद्ध को खत्म करने से कहीं ज्यादा है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के लिए एक नए राजनीतिक समीकरण का हिस्सा है. ट्रंप ने कहा कि गाजा में हुए युद्ध विराम के साथ दुनिया ‘एक नए मिडिल ईस्ट की ऐतिहासिक सुबह’ देख रही है. उन्होंने पुनर्निर्माण के पक्ष में लड़ाई समाप्त करने के लिए सभी पक्षों से प्रतिबद्धता का आह्वान किया. यहां तक कि ईरान से दोस्ती और सहयोग की अपील भी की.
घरेलू मोर्चे पर फंसे हुए हैं ट्रंप
ट्रंप का विदेश में विजयी भाषण ऐसे समय में आया है जब उन्हें घरेलू मोर्चे पर लगातार बढ़ती उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है. राष्ट्रपति डेमोक्रेट्स के साथ गतिरोध में फंसे हुए हैं, जिसके कारण लगभग दो हफ्तों से सरकार बंद है. ट्रंप प्रशासन ने अदालत में दायर अपने दस्तावेजों में कहा कि वह हजारों संघीय कर्मचारियों को नौकरी से निकाल देगा, जिसके लिए व्हाइट हाउस ने डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया. हालांकि पिछले शटडाउन के दौरान ऐसा कभी नहीं किया गया. ट्रंप को पोर्टलैंड और शिकागो में नेशनल गार्ड भेजने के अपने निर्णय के कारण भी तीव्र विरोध का सामना करना पड़ रहा है. इन शहरों को उन्होंने युद्ध क्षेत्र बताया है और सुझाव दिया है कि सेना इन्हें प्रशिक्षण मैदान के रूप में उपयोग कर सकती है.
तन्याहू की तारीफ के मायने
इजरायल की 120 सदस्यीय विधायिका नेसेट को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दो साल से चल रहे युद्ध की समाप्ति का जश्न मनाया. उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू की प्रशंसा की, जिन्हें उन्होंने पिछले छह हफ्ते हमास के साथ बातचीत के जरिए समझौता करने के लिए मजबूर किया. उन्होंने सुझाव दिया कि इजरायली प्रधानमंत्री माफी के हकदार हैं क्योंकि वे विजेता हैं. ट्रंप का जब स्वागत किया गया तो ट्रंप! ट्रंप!” के नारे लगे और तेल अवीव के समुद्र तट पर उनकी तस्वीर के साथ एक विशाल ‘धन्यवाद’ चिह्न लगाया गया.
नेतन्याहू को दबाव से निकालने में मददगार
यह यात्रा एक ऐसे समय पर हुई है जब नेतन्याहू इजरायल में विपक्ष के दबाव और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ट्रंप की यात्रा और उनके संबोधन ने नेतन्याहू को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर मजबूत समर्थन दिया है. इजरायल के बाद ट्रंप मिस्र गए, जहां उन्होंने गाजा के भविष्य पर एक शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की. यह यात्रा और शिखर सम्मेलन आगे की शांति प्रक्रिया की रूपरेखा को सामने रखने के लिए थे, जिसमें गाजा में एक अमेरिकी नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय बल के तहत नई शासन व्यवस्था स्थापित करना शामिल है.
ट्रंप ने कहा कि हमास का निरस्त्रीकरण होगा. यह समझौते के एक महत्वपूर्ण हिस्से को उजागर करता है, लेकिन इसे लागू करने की राह अभी भी चुनौतीपूर्ण है. यह यात्रा दुनिया को एक मजबूत संकेत है कि अमेरिका खास तौर पर ट्रंप के नेतृत्व में इजरायल का एक अटल सहयोगी है. यह उस मजबूत संबंध को रेखांकित करता है जो दोनों देशों के बीच है.
क्या हैं आगे की चुनौतियां
भले ही ट्रंप ने अपने भाषण में आशावादी रुख अपनाया हो, लेकिन आने वाले दिन और हफ्ते चुनौतियों से भरे हैं. शांति प्रक्रिया के अगले चरणों में नेतन्याहू को और भी ज्यादा समझौते करने पड़ सकते हैं, क्योंकि उन्हें जल्द ही चुनाव का सामना करना है. हमास और गाज़ा के भविष्य पर अभी भी बातचीत होनी बाकी है. इजरायल के दक्षिणपंथी नेताओं ने संकेत दिया है कि वे हमास के खिलाफ युद्ध की समाप्ति की घोषणा करने के लिए तैयार नहीं हैं. वे नेतन्याहू पर रियायतों को सीमित करने के लिए दबाव डाल सकते हैं. हालांकि ट्रंप अब इजरायल में बेहद लोकप्रिय हैं. इसका मतलब है कि वे राजनीतिक रूप से नेतन्याहू के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी हैं और प्रधानमंत्री उनके हाल ही में मजबूत हुए रिश्तों में नई दरार डालने का जोखिम नहीं उठा सकते.





