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ढाई इंच बारिश ने खोल दी निगम की पोल:पिछले साल से भी नहीं लिया सबक, 80 से अधिक पेड़ गिरे

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इंदौर

बसे साफ शहरों में चौथी बार नंबर-1 आने के बाद कुछ घंटों की बारिश से इंदौर पानी-पानी हो गया। बुधवार रात 9 बजे से साढ़े ग्यारह बजे के बीच महज ढाई घंटे में ढाई इंच से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। एक वर्ष पूर्व अगस्त 2020 में बारिश ने सौ साल के रिकॉर्ड तोड़ एक दिन में साढ़े बारह इंच पानी बरसा था, जिसके बाद शहर के जो हालत थे वो देखने वाले हो गए थे। कई इलाकों में नाव व SDRF की मदद से रेस्क्यू करना पड़ा था। लेकिन नगर निगम के आला अधिकारियों ने पिछले वर्ष से भी कोई सबक न लेते हुए नाला टैपिंग कर दी थी । इस बार बारिश हुई तो घर के सामने घुटनों तक पानी भर गया।रात 9 बजे से साढ़े ग्यारह बजे के बीच महज ढाई घंटे में ढाई इंच से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। अब तक कुल बारिश का आंकड़ा बढ़कर 486 मिमी हो गया, जिसमें बुधवार रात 66 मिमी शामिल था।

पिछले वर्ष से भी नहीं लिया सबक

पिछले साल अगस्त माह में एक ही दिन में 12 इंच पानी बरसा था। इंदौर की औसत बारिश 34 इंच मानी जाती है। उस हिसाब से पूरे सीजन की बारिश का 35 फीसदी हिस्सा इस एक दिन में ही बरस गया था। होमगार्ड की टीम द्वारा किला मैदान रोड समीप सिकंदराबाद, गरीब नवाज और भिस्ती मोहल्ले में रेस्क्यू कर चार घंटे के भीतर महिला और बच्चों सहित कुल 58 लोगों को वहां से बाहर निकाला था गया, लेकिन पिछले साल से कोई सबक न लेते हुए नगर निगम के अधिकारियों ने एक बार फिर शहर की जनता को परेशान होने पर मजबूर कर दिया है। इससे पहले 10 अगस्त 1981 को एक दिन में सबसे ज्यादा 8.3 इंच पानी गिरा था।

वर्ष 2020 में सिकंदराबाद कॉलोनी में पानी भरने पर नाव से रेस्क्यू किया था।

वर्ष 2020 में सिकंदराबाद कॉलोनी में पानी भरने पर नाव से रेस्क्यू किया था।

वर्ष 2020 की तस्वीर

वर्ष 2020 की तस्वीर

कुछ घंटों में खुली निगम की पोल

मानसून के इस वर्ष के मौसम में पहली बार कल जोरदार बारिश हुई। यह बारिश इतनी तेज थी कि कुछ ही देर में शहर में चारों तरफ सड़कें पानी से लबालब हो गईं, जहां देखो वहां जलभराव हो गया। कई क्षेत्र जलभराव से बुरी तरह से प्रभावित हुए। इन क्षेत्रों में हालात इतने गंभीर बन गए कि वहां रहने वाले लोगों की रात काली हो गई। लोग पूरी रात अपने घरों में भरा हुआ पानी निकालने में लगे रहे। सड़कों पर जमा पानी तो निकालना लोगों के बस की बात थी ही नहीं। शहर में खास तौर पर जनता कॉलोनी, व्यास पुल, हरसिद्धि, जनता क्वार्टर कलेक्ट्रेट वाले क्षेत्र में सबसे ज्यादा और जोरदार जलजमाव हुआ। धार रोड पर स्थित ग्रीन पार्क कॉलोनी तो पानी के डेरे के रूप में तब्दील हो गई। नागरिक इस जलजमाव से हैरान परेशान रहे। नगर निगम के अधिकारियों को तो यह समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर यह जलजमाव क्यों हो गया। इस जलजमाव के साथ ही नगर निगम के द्वारा बारिश की स्थिति से निपटने के लिए की गई तैयारी और व्यवस्था की पोल खुल कर सामने आ गई। सारी तैयारी बहुत ज्यादा सतही रूप से की गई थी। यही कारण है कि इन तैयारियों का कोई परिणाम सामने नहीं आ रहा था।

कई इलाकों में पेड़ गिर गए।

कई इलाकों में पेड़ गिर गए।

80 शिकायतें, कई पेड़ गिरे

कई स्थानों पर 10 से ज्यादा पेड़ गिरने की घटनाएं हुईं, उसमें कई दोपहिया वाहन से लेकर बड़े वाहन भी दब गए। डीआईजी आफिस, गीताभवन, गुरुनानक कालोनी, हरसिद्धि, द्वारकापुरी, टापूनगर, रामबलीनगर, कलेक्टोरेट, मोती तबेला चौराहा से लेकर कई स्थानों पर सड़कों पर नाले के समान पानी बह रहा था। तेज बारिश के बाद निगम कमिश्नर ने अधिकारियों के साथ कंट्रोल रूम पर बैठकर मोर्चा संभाला और अधिकारियों को फटकार लगाकर जल जमाव वाले क्षेत्रों में भेजा। करीब 80 से ज्यादा स्थानों पर जलजमाव की शिकायतें आती रहीं। शिवाजी मार्केट और रामबाग के पुल के नीचे पानी इतनी तेजी से बह रहा था कि वहां लगाए गए फव्वारे पानी के बहाव में बह गए। सबसे विकट स्थिति हाथीपाला और जूनी इंदौर, कलालकुई क्षेत्र की थी, जहां सड़कों पर ऐसा पानी बह रहा था कि मानों नदी बह रही हो। आसपास की मल्टियों के बेसमेंट में भी पानी भरने के कारण दोपहिया वाहन डूब गए थे। कई अधिकारियों को फटकार लगाने के बाद संसाधन लेकर क्षेत्र में भेजा गया। जिन स्थानों पर पेड़ गिरे थे, वहां उद्यान विभाग की 10 से ज्यादा टीमें भेजी गईं। सुबह तक कई क्षेत्रों में पानी निकासी की मशक्कत चलती रही। द्वारकापुरी और गुरुनानक कालोनी की गली-गली में जलजमाव सुबह तक नजर आ रहा था।

कई सड़के हुए जल-मगन

कई सड़के हुए जल-मगन

10 से ज्यादा बड़े चैंबर फोड़े

रात में तेज बारिश के बाद कुलकर्णी भट्टा और जनता क्वार्टर में भी जल जमाव के कारण लोगों की भारी फजीहत हुई। देर रात तक लोग सड़कों से लेकर मोहल्लों तक में भराए पानी के कारण अफसरों को फोन लगाकर मामले की शिकायत करते रहे। कुछ दिनों पहले रहवासियों ने ड्रेनेज के आधे अधूरे चैंबरों को लेकर शिकायतें की थी और कल रात उसी के कारण जल जमाव की नौबत आई। बाद में निगम अफसरों ने जेसीबी और संसाधन बुलाकर वहां करीब 10 से ज्यादा बड़े चैंबर फोड़कर पानी निकासी कराई।

बुधवार रात पाटनीपुरा इलाके में सड़कों की हालत

बुधवार रात पाटनीपुरा इलाके में सड़कों की हालत

नाला टैपिंग पर उठे सवाल

इंदौर नगर निगम के द्वारा नाला टैपिंग के काम को पूरा किए जाने के बाद पहली बार कल रात को तेज और जोरदार बारिश हुई। इस बारिश के साथ ही निगम द्वारा किए गए नाला टैपिंग के काम पर सवाल उठ गए हैं। आम लोगों का मानना है कि जब नगर निगम के द्वारा अच्छा और बेहतर काम किया गया है तो फिर क्यों सारे शहर में पानी भरा जाता है। नगर निगम के द्वारा पिछले कई सालों से चल रहे नाला टैपिंग के काम को पिछले दिनों पूरा कर लेने का दावा किया गया। इसके साथ ही शहर के मध्य क्षेत्र सहित अलग-अलग क्षेत्रों से निकलने वाले नाले में सीवरेज का पानी जाने का रास्ता भी बंद किया गया। निगम का दावा है कि अब यह सभी नालें नदी के रूप में परिवर्तित हो गए हैं। निगम के द्वारा बारिश के पानी को स्टॉर्म वाटर लाइन के माध्यम से निकालने की भी पूरी व्यवस्था सारे शहर में की गई है। इस काम पर निगम ने करोड़ों रुपए की राशि भी खर्च की है। इस काम के पूरा हो जाने के बाद कल रात को जब पहली बार जोरदार बारिश हुई तो इस काम की पूरी कलाई खुलकर सामने आ गई।

इंदौर नगर निगम के द्वारा नाला टैपिंग के काम को पूरा किए जाने के बाद पहली बार कल रात को तेज और जोरदार बारिश हुई। इस बारिश के साथ ही निगम द्वारा किए गए नाला टैपिंग के काम पर सवाल उठ गए हैं। आम लोगों का मानना है कि जब नगर निगम के द्वारा अच्छा और बेहतर काम किया गया है तो फिर क्यों सारे शहर में पानी भरा जाता है। नगर निगम के द्वारा पिछले कई सालों से चल रहे नाला टैपिंग के काम को पिछले दिनों पूरा कर लेने का दावा किया गया इसके साथ ही शहर के मध्य क्षेत्र सहित अलग-अलग क्षेत्रों से निकलने वाले नाले में सीवरेज का पानी जाने का रास्ता भी बंद किया गया। निगम का दावा है कि अब यह सभी नाले नदी के रूप में परिवर्तित हो गए हैं। निगम के द्वारा बारिश के पानी को स्टॉर्म वाटर लाइन के माध्यम से निकालने की भी पूरी व्यवस्था सारे शहर में की गई है। इस काम पर निगम ने करोड़ों रुपए की राशि भी खर्च की है। इस काम के पूरा हो जाने के बाद कल रात को जब पहली बार जोरदार बारिश हुई तो इस काम की पूरी कलई खुलकर सामने आ गई।

वर्ष 2016 से शुरू हुआ नाला टेपिंग की योजना

नगर निगम ने करोड़ रुपए खर्च कर नाला टेपिंग की योजना शुरू की और यह व्यवस्था नदी नालों के आसपास आउटफाल बंद करने की योजना के तहत हुआ है। वैसे देखा जाए तो वर्ष 2016 से नाला टेपिंग का काम चल रहा था और नगर निगम का दावा है कि अब किसी भी तरह से नाला नहीं भरेगा, जबकि इसके विपरीत थोड़ी सी बारिश में पानी भर जाता है। शहर के कई इलाकों में नालों का पानी रोक देने से गंदा पानी एक ही जगह भरा जाता है , जिसके चलते बदबू फैलने से कई लोग बीमार हो जाते हैं। अफसरों का दावा था कि इस बार नाला टैपिंग के चलते सभी आउटफाल बंद कर दिए गए है ।

Ramswaroop Mantri

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