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थिएटर ऑफ़ रेलेवंस द्वारा दो दिवसीय वैचारिक नाट्य उत्सव 18 दिसंम्बर से पनवेल में

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इंसानियत ! क्या इंसानियत से बड़ी है आपकी आस्था,आपका धर्म,आपकी पार्टी,आपका संगठन? जरा सोचिये की आपके लिए मनुष्य होने के क्या मायने हैं? मनुष्यता के क्या मूल्य हैं? क्यों सत्ता हमेशा ‘इंसानियत’ को मार कर मुस्कुराती है? आज के इस ‘खरीदने-बेचने’ के वस्तुवादी मशीनी दौर में इन सवालों पर सोचने का समय नहीं है ना …. इसलिए तो आप के आसपास भय,भूख और मौत का साया मंडरा रहा है .. मनुष्य ही दूसरे मनुष्य के लिए महामारी बना हुआ है …क्या आप इस भय से मुक्ति चाहते हैं! तो आइये ..अपने अंदर इंसानियत की लौ को जगाएं !
इंसानियत,समता, न्याय ,संविधान ,शांति और प्रजा कल्याण का संकल्प लिए थिएटर ऑफ़ रेलेवंस शुभचिंतक और प्रयोगकर्ता 18-19 दिसम्बर,2021 को वासुदेव बलवंत फड़के नाटयगृह,पनवेल में आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं दो दिवसीय वैचारिक नाट्य उत्सव !
कला मनुष्य में इंसानियत जगाती है. नाटक मनुष्य की वैचारिक क्षमता को दृष्टि प्रदान कर विवेक जगाता है. नाटक किसी मोहनदास को ‘सत्य’ के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है. मनुष्य को ‘विचार’ करने की क्षमता बाकी प्राणियों से अलग करती है…
आइये इस वैचारिक नाटय उत्सव को अपनी रचनात्मक सहभागिता से सराबोर कर अपने अन्दर इंसानियत की लौ प्रज्वलित करें !


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थिएटर ऑफ़ रेलेवंस शुभचिंतक और प्रयोगकर्ता
आयोजित
दो दिवसीय वैचारिक नाट्य उत्सव
कब : 18-19 दिसम्बर,2021
कहाँ : वासुदेव बलवंत फड़के नाटयगृह,पनवेल !
18 दिसम्बर, सुबह 11.30 बजे
नाटक ‘सम्राट अशोक’
नाटककार – धनंजय कुमार
निर्देशक – मंजुल भारद्वाज
नाटक ‘सम्राट अशोक’

सम्राट के आदमी होने और फिर आदर्श राजा बनने की कहानी है. अशोक पहला राजा था, जिसने धर्म को शासन पर हावी नहीं होने दिया. और सभी धर्मों के प्रति समभाव रखते हुए धर्मनिरपेक्ष शासन का उदाहरण दुनिया के सामने रखा ! भारतीय संविधान के मूल तत्वों को बचाने का संकल्प है नाटक ‘सम्राट अशोक’।
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19 दिसम्बर, सुबह 11.30 बजे
नाटक ‘लोक-शास्त्र सावित्री’
लेखक-निर्देशक – मंजुल भारद्वाज
नाटक ‘लोक-शास्त्र सावित्री’

समता का यलगार है नाटक ‘लोक-शास्त्र सावित्री’. सावित्रीबाई फुले ने आधी आबादी के ‘इंसान’ होने के प्राकृतिक अधिकार को स्त्री शिक्षा की ज्योत जलाकर ‘गुलामी’ की जंज़ीरों को तोड़ा. समता,न्याय और मानवता के लिए आजीवन संघर्ष किया. आज देश में करोड़ों शिक्षित महिला हैं पर एक भी महिला ‘सावित्रीबाई फुले’ बन पाई?
एक ऐसे समय में जब विकार का बोलबाला है… विकार आस्था, धर्म और राष्ट्रवाद का चोला ओढ़ विचार पर तांडव कर रहा है। संविधान सम्मत न्याय, अधिकार, समता की आवाज़ देशद्रोह है। लोकतंत्र की आत्मा ‘प्रतिरोध’ देशद्रोह है। जब समाज एक ‘फ्रोजन स्टेट’ में है। महामारी काल में देश श्मशान और कब्रिस्तान बना हुआ है। बेरोज़गारी, भूख और मौत हर तरफ़ से हर पल आपके पास मंडरा रही हो ऐसे विध्वंस काल में ‘थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ के सृजनकारों ने अपने नाटकों से विचार की ज्योति जला मानवीय विवेक को आलोकित किया है।
‘थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ के सृजनकार मानवीय विवेक को आलोकित कर विचार की ज्योत प्रज्ज्वलित करने के लिए दो वैचारिक नाटक ‘सम्राट अशोक’ और ‘लोक-शास्त्र सावित्री’ 18-19 दिसम्बर, 2021 को सुबह 11.30 बजे,वासुदेव बलवंत फड़के नाटयगृह, पनवेल में प्रस्तुत करेंगे !


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18 दिसम्बर, सुबह 11.30 बजे
नाटक ‘सम्राट अशोक’
नाटककार – धनंजय कुमार
निर्देशक और स्वयं सम्राट अशोक की भूमिका में – मंजुल भारद्वाज
नाटक ‘सम्राट अशोक’

सम्राट के आदमी होने और फिर आदर्श राजा बनने की कहानी है. अशोक पहला राजा था, जिसने धर्म को शासन पर हावी नहीं होने दिया. और सभी धर्मों के प्रति समभाव रखते हुए धर्मनिरपेक्ष शासन का उदाहरण दुनिया के सामने रखा ! भारतीय संविधान के मूल तत्वों को बचाने का संकल्प है नाटक ‘सम्राट अशोक’।
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19 दिसम्बर, सुबह 11.30 बजे
नाटक ‘लोक-शास्त्र सावित्री’
लेखक-निर्देशक – मंजुल भारद्वाज
नाटक ‘लोक-शास्त्र सावित्री’

समता का यलगार है नाटक ‘लोक-शास्त्र सावित्री’. सावित्रीबाई फुले ने आधी आबादी के ‘इंसान’ होने के प्राकृतिक अधिकार को स्त्री शिक्षा की ज्योत जलाकर ‘गुलामी’ की जंज़ीरों को तोड़ा. समता,न्याय और मानवता के लिए आजीवन संघर्ष किया. आज देश में करोड़ों शिक्षित महिला हैं पर एक भी महिला ‘सावित्रीबाई फुले’ बन पाई?
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कलाकार : अश्विनी नांदेडकर, सायली पावसकर,कोमल खामकर, सुरेखा साळुंखे, तुषार म्हस्के, स्वाती वाघ, संध्या बाविसकर,नृपाली जोशी, प्रियांका कांबळे, साक्षी,मोरेश्वर माने!

Ramswaroop Mantri

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