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अंतरिक्ष में दो अतिविशालकाय ब्लैक होल्स  बस अब टकराने वाले ही हैं !

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निर्मल कुमार शर्मा

नवीनतम् वैज्ञानिक जानकारी से युक्त शोध पत्रों को प्रकाशित करनेवाली वैश्विक लब्धप्रतिष्ठित एस्ट्रो फिजिकल जर्नल लेटर या Astrophysical Journal Letter में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार हमारी धरती से लगभग 900करोड़ प्रकाशवर्ष दूर दो अति-विशालकाय या सुपरमैसिव ब्लैक होल्स,जिनका नाम पीकेएस-2131 और 021है,पिछले 10 करोड़ वर्षों से एक-दूसरे के तरफ खिंचे चले आ रहे हैं। अब ये दोनों सुपरमैसिव ब्लैक होल्स एक-दूसरे के इतने नजदीक आ चुके हैं कि दोनों एक-दूसरे के परिक्रमा पथ या circumambulation pathमें प्रवेश कर चुके हैं ! ये दोनों एक-दूसरे के दो वर्ष में एकबार चक्कर काट लेते हैं ! खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार ये दोनों सुपरमैसिव ब्लैक होल्स अगले 10 हजार वर्षों में एक -दूसरे से निश्चित रूप से टकरा जाएंगे ! वैज्ञानिकों के अनुसार अंतरिक्ष में इस अति भयावह टकराव से निकलने वाली गुरूत्वाकर्षण बल की तरंगों से अंतरिक्ष का समय चक्र या Time Zone बदल जाएगा !
वैसे कितने विस्मय और आश्चर्य की बात है कि महान भौतिकविद और भौतिक वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन आज से 117 साल पहले ही अपने जीवन काल में ही वर्ष 1905 में अपने कालजयी सुप्रसिद्ध सापेक्षता के सिद्धांत को प्रकाशित करते समय ही यह भविष्यवाणी कर चुके थे कि अंतरिक्ष में जब दो अतिविशालकाय या सुपरमैसिव ब्लैक होल्स एक-दूसरे से टकराएंगे तब अंतरिक्ष का टाइम जोन में विचलन पैदा हो जाएगा ! ये सुपरमैसिव ब्लैक होल्स इतने बड़े और विशाल होते हैं कि इसकी कल्पना हम ऐसे कर सकते हैं कि हमारी धरती से लाखों गुना बड़े हमारे सूरज से भी ये करोड़ों-अरबों गुने बड़े और अतिशक्तिशाली होते हैं,इनके अकथनीय गुरूत्वाकर्षण बल का अंदाजा हम ऐसे लगा सकते हैं कि अगर हमारा सूरज किसी सुपरमैसिव ब्लैक होल के चपेट में आ जाय तो उसके गुरूत्वाकर्षणीय दबाव से हमारा सूरज सेकेंड के भी लाखों समय पूर्व ही मात्र 6 किलोमीटर व्यास के एक अति छोटे छुद्र स्टार में बदलकर रह जाएगा ! हमारी धरती का तो और भी बुरा हाल होगा,वह ब्लैकहोल के असीम गुरूत्वाकर्षणीय दबाव से अपने 12 हजार 742 किलोमीटर व्यास के आकार से सिकुड़कर मात्र 18 मिलीमीटर के आकार के एक छोटे से गेंद के आकार में आ जाएगी !
अभी तक इस धरती के वैज्ञानिकों को आकार में छोटे ब्लैक होल्स को बहुत बड़े आकार में बदल जाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी लगभग न के बराबर है,इसलिए उक्त वर्णित दो बड़े सुपरमैसिव ब्लैक होल्स क्रमश:पीकेएस-2131और 021के आपस में टकराने से उससे भी बड़े सुपरमैसिव ब्लैक होल बनने की प्रक्रिया के अध्ययन से ब्लैक होल्स के बारे में और भी नवीनतम् जानकारी मिलने की उम्मीद है ।
खगोल वैज्ञानिकों की इस नई खोज पीकेएस-2131और 021नामक ये ब्लैक होल्स अपनी तरह के एक खास ब्लैक होल्स हैं, जिन्हें अंतरिक्ष विज्ञान की भाषा में ब्लाजार या Blazar भी कहते हैं,इस तरह के ब्लैक होल्स अपने अत्यधिक गर्म गैसों के बीच आवेशित कणों का निर्माण करते हैं और अत्यधिक ताकतवर गुरूत्वाकर्षण शक्ति से ये आवेशित कण या गर्म प्लाज्मा एक पतली सी किरण के रूप में खुले अंतरिक्ष में अरबों-खरबों किलोमीटर दूर तक प्रक्षेपित कर दीं जाती हैं !
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार वर्ष 2019 में अतिसंवेदनशील वैज्ञानिक उपकरणों द्वारा इस प्रकार की आवेशित गुरूत्वाकर्षणीय तरंगों को इस धरती पर महसूस किया गया था,ये गुरूत्वाकर्षणीय तरंगें अरबों-खरबों किलोमीटर दूर सुदूर अंतरिक्ष में दो ब्लैक होल्स के टकराने से पैदा हुईं थीं। खगोल वैज्ञानिकों ने शोधकर बताया था कि कि ये आवेशित गुरूत्वाकर्षणीय तरंगें सुदूर अंतरिक्ष में दो ब्लैक होल्स के टकराने से पैदा हुईं थीं, उन्होंने यहां तक बताया था कि उन टकराने वाले दो ब्लैक होल्स में एक हमारे सूरज से लगभग 2.6गुना तो दूसरा 23गुना जरूर बड़े आकार के रहे होंगे !
उक्त वर्णित खगोलीय घटना अरबों साल पूर्व घटित हुई होंगी,जब ये दोनों ब्लैक होल्स आपस में टकराए होंगे,क्योंकि अरबों साल की यात्रा करने के बाद ये खगोलीय घटनाएं प्रकाश और गुरूत्वाकर्षणीय तरंगों के माध्यम से हमारी धरती तक पहुंची होंगी ! उस समय आज के वर्तमान समय की तुलना में हमारे ब्रह्माण्ड की आयु लगभग आधी रही होगी,अरबों साल बाद हमारी धरती पर वर्ष 2019में गुरूत्वाकर्षणीय तरंगों के माध्यम से इनके होने की बात पता चली होगी,इन दोनों ब्लैक होल्स के संलयन से नये बने बडे़ ब्लैक होल का द्रव्यमान हमारे सूरज से लगभग 150गुना ज़्यादा था !

       -निर्मल कुमार शर्मा, 'गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण तथा पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक, सामाजिक, पर्यावरण तथा राजनैतिक विषयों पर सशक्त व निष्पृह लेखन ',प्रताप विहार,गाजियाबाद, उप्र,पिनकोड नंबर-201009,संपर्क -9910629632,ईमेल-nirmalkumarsharma3@gmail.com

Ramswaroop Mantri

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