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*कोविड घोटाले पर उद्धव का पहला बड़ा खुलासा…’यूपी में गंगा में लाशें बह रही थीं, तब मुंबई मॉडल की तारीफ हो रही थी…’*

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मुंबई बीएमसी चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे ने ‘खिचड़ी घोटाले’ और कोविड काल के आरोपों पर पहली बार खुलकर जवाब दिया है. न्‍यूज18 लोकमत से बातचीत में उन्होंने महामारी एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि उस वक्त टेंडर नहीं, जान बचाना जरूरी था. उद्धव ने विरोधियों को याद दिलाया कि जब यूपी में गंगा में लाशें बह रही थीं, तब मुंबई मॉडल की तारीफ हो रही थी.

मुंबई. बीएमसी चुनाव का बिगुल बजते ही महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है. एक तरफ बीजेपी और शिंदे गुट पुरानी फाइलों की धूल झाड़कर ‘कोविड घोटाले’ और ‘खिचड़ी घोटाले’ का जिन्न बाहर निकाल रहे हैं, तो दूसरी तरफ 20 साल बाद एक साथ आए ठाकरे बंधुओं उद्धव और राज ठाकरे ने पलटवार शुरू कर दिया है. कोविड काल में हुए कथित घोटाले पर उद्धव ठाकरे ने पहली बार चुप्पी तोड़ी थी. ‘न्यूज 18 लोकमत’ को दिए एक एक्‍सक्‍लूस‍िव इंटरव्‍यू में उन्‍होंने कहा, जब गंगा में लाशें बहाई जा रही थीं, तब हम लोगों की जान बचा रहे थे.

उद्धव जी, बीएमसी चुनाव नजदीक आते ही महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान कोविड काल में हुए कामों पर सवाल उठ रहे हैं. बीजेपी-शिंदे गुट का आरोप है कि उस दौरान ‘खिचड़ी’ से लेकर ‘बॉडी बैग’ तक में भारी भ्रष्टाचार हुआ?

गंभीर होकर… देखिए, जब मैं मुख्यमंत्री था, तो हमारी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना थी. उस वक्त के हमारे काम की तारीफ सिर्फ मैं नहीं कर रहा, बल्कि देश के सुप्रीम कोर्ट ने की थी. बॉम्बे हाईकोर्ट और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने ‘मुंबई मॉडल’ का लोहा माना था. जो लोग आज हम पर उंगली उठा रहे हैं, उन्हें याद करना चाहिए कि उस वक्त देश के दूसरे हिस्सों में क्या हालात थे. गंगा में लाशें बह रही थीं… वो लाशें किसकी थीं? मैं उस राजनीति में नहीं जाना चाहता. लेकिन इतना तय है कि कोरोना की विकट परिस्थिति में मुंबई और महाराष्ट्र में हमने बेहतरीन काम किया.

लेकिन आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर टेंडर दिए गए?


कोरोना की महामारी शुरू होते ही प्रधानमंत्री मोदी ने खुद देश में एपीडेमिक एक्‍ट लागू किया था. क्या आप जानते हैं इसका मतलब क्या है? इस एक्ट के तहत आपातकालीन स्थिति में काम करने के लिए टेंडर प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती. जान बचाने के लिए त्वरित निर्णय लेने होते हैं. इसके बावजूद, हमने पारदर्शिता रखी. मुंबई महानगरपालिका ने शॉर्ट नोटिस पर टेंडर निकाले. हमने नियमों का पालन किया, जबकि उस वक्त इसकी बाध्यता भी नहीं थी.

‘खिचड़ी घोटाला’ आजकल सुर्खियों में है. कहा जा रहा है कि प्रवासी मजदूरों के खाने में भी पैसे खाए गए?

यह आरोप हास्यास्पद और शर्मनाक है. उस वक्त मुंबई में लाखों प्रवासी मजदूर फंसे हुए थे. सब कुछ बंद था. उन भूखे लोगों को क्या खिलाते? सबसे जल्दी और आसानी से बनने वाला भोजन ‘खिचड़ी’ ही था. हमने टेंडर इसलिए निकाले ताकि उन लाखों मजदूरों को दिन में तीन बार सम्मानजनक खाना मिल सके. इतनी बड़ी तादाद में तुरंत खाना तैयार करना था. इसे घोटाला कहना उन मजदूरों और हमारी मानवता का अपमान है. हमारे ऊपर सिर्फ आरोप लगाए जा रहे हैं, साबित कुछ नहीं हुआ है. हमने काम किया, और दुनिया ने उसे देखा.

Ramswaroop Mantri

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