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मानवीय पहचान का यूटर्नU-turn

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शशिकांत गुप्ते इंदौर

यूटर्न मतलब घुमाव वाला टर्न मतलब मोड़।सीधे रास्ते के बीच पुनः विपरीत दिशा में जाने के लिए यूटर्न लिया जाता है।

यदि कोई व्यक्ति एक ही विचारों के प्रति प्रतिबद्धता रखता हो, और अचानक वह अपनी प्रतिबद्धवता के विपरीत कोई वक्तव्य दे तो ऐसे कथन के लिए यूर्टन शब्द का प्रयोग होता है।हाल ही में हिंदुत्व की नई परिभाषा ईजाद की गई है।जो कोई व्यक्ति मुस्लिमों का विरोध करता है, वह हिन्दू हो ही नहीं सकता है?ऐसे कथन के लिए यूटर्न शब्द एकदम सटीक है।यह यूर्टन निम्न पंक्तियों का स्मरण करवाता है। 

*दिल के फफोले जल उठे**सीने के दाग से*

 *इस घर को आग लग गयी**घर के चिराग से*

जबतक दूसरों के प्रति नफरत की आग उगलने से संतोष मिलता है, तबतक पता नहीं चलता है।जब स्वयं का घर जलता है, तो उक्त यूटर्न लेना पड़ता है।इस उक्ति का स्मरण भी होता है कि,अनेकता में एकता, यही तो अपने भारत की विशेषता है।यह  प्राकृतिक है।गंगाजुमनी तहजीब तो भारत को कुदरत ने बक्शी है।ऐसी मान्यता है कि, विश्व में सिर्फ भारत में नदियों का संगम है,और किसी देश में नहीं है।प्रख्यात गांधीवादी विचारक, चिंतक,सर्वोदय के प्रेणता स्व.आचार विनोबा भावेजी ने कहा है, *दो धर्मो का कभी भी झगड़ा नहीं होता है,सभी धर्मों का अधर्म से झगड़ा होता है**द्वेष बुद्धि को हम द्वेष से नहीं मिटा सकतें,प्रेम की शक्ति से ही उसे मिटा सकतें हैं*आश्चर्य होता है कि, नब्बे+सात वर्षों तक यदि कोई संगठन विधर्मियों के लिए नफरत माला जपते रहें और अचानक सौहार्द्र के का मंत्र का उच्चारण करने लग जाएं?सम्भवतः देश के पूर्वी प्रांत में  सम्पन्न विधानसभा चुनाव में जो नतीजे आए उससे जो भय निर्मित हुआ है, उसी का परिणाम हो सकता  है।जो भी हो यह वक्तव्य पढ़,सुनकर एक बात स्पष्ट हो गई कि,देश का हरएक संगठन और हरएक व्यक्ति राजनीति से अछूता नहीं है?मराठी भाषा में एक कहावत है,

*ताका आणायला जाया चे मग भांड  का लपवायचे?*

 अर्थात छांछ खरीदने जाना तो बर्तन को क्यों छिपाना?कोई सोमरस लाने तो जा नहीं रहें हैं।जब राजनीति ही करना है, तो डंके की चोट कहना चाहिए। संगठन तो है यह शुद्धरूप से राजनैतिक संगठन, ऐसा प्रचार करना उचित नहीं है।दोहरा चरित्र हमेशा अशोभनीय और अनैतिक ही होता है।बार बार यह वाक्य दोहराने के लिए बाध्य होना पड़ता है कि, गणवेश बदल दिया है, लेकिन पाठ्यक्रम वही सौ वर्ष पुराना ही है?बहुत ही आश्चर्य महसूस हुआ कि, हिन्दू की परिभाषा में नफरत शब्द को दरकिनार किया जा रहा है।यह सुवाक्य सुनते ही,सन 2002 का गोधरा,1992 का अयोध्या,और 1984 का स्मरण मानस पटल पर उभर आता है?शाहीन बाग की याद ताजा हो जाती है।संस्कार और संस्कृति के पाठ्यक्रम में पढ़ा हुआ व्यक्ति पुलिस के आला अधिकारी के समक्ष बेख़ौफ़ होकर सौहाद्रपूर्ण वातावरण को दूषित करने के लिए खुलेआम वक्तव्य देता है।एक व्यक्ति देश की अखण्डता को अक्षुण्ण रखने की शपथ राष्ट्रपति के समक्ष लेने के बाद गोली मारो, जोरू के भाइयों को, का उदगार सार्वजनिक रूप से करता है।शुद्ध रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले के स्वेद में भी शुक्राणु होतें हैं। साक्षात प्रमाण है पवनपुत्र के स्वेद से मकरध्वज का जन्म हुआ है।कलयुग में यह बहस का विषय है कि, कौन अविवाहित है और ब्रह्मचारी है?बहरहाल देश में सौहाद्रपूर्ण वातावरण  होना चाहिए।उदारमना व्यक्ति बिन बुलाए पड़ौसी देश में जाकर बिरयानी खा सकतें हैं।किंतु किसी अन्य व्यक्ति को  पड़ौसी देश में भेजना मतलब काले पानी की सजा देने जैसी धमकी है?भलेही उस व्यक्ति का मंतव्य *पाक*  साफ ही क्यों न हो।भागवत पुराण बहुत लंबा है।प्रायः भगवतजी की कथा श्राध्द पक्ष में आयोजित की जाती है।जो भी है,देश मे भाईचारा होना चाहिए।समूचे प्राणी मात्र के लहू का रंग लाल ही होता है।हरएक देशवासी की विदेश में  Identity Indian ही होती है।प्रख्यात समजवादी विचारक चिंतक, गांधीजी के अनुयायी, स्व.डॉ राममनोहर लोहियाजी ने कहा है कि  *राजनीति अल्पकालिक धर्म है और धर्म दीर्घकालिक राजनीति है*
शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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